पड़ोसी देश बांग्लादेश की सियासत इन दिनों एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां इतिहास खुद को दोहरा रहा है। जी हां, देश में पूरे 35 साल के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस हाई-प्रोफाइल चुनाव में नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के दिग्गज नेता फखरुल इस्लाम आलमगीर और जमात-ए-इस्लामी समर्थित 11 दलों के गठबंधन के प्रत्याशी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद आमने-सामने हैं। इस चुनावी जंग ने न सिर्फ बांग्लादेशी राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त ढाका पर टिकी हुई हैं।
1991 के बाद पहली बार निर्विरोध नहीं हो रहा चुनाव
बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में यह चुनाव बेहद खास है। आखिरी बार साल 1991 में ऐसा मौका आया था जब राष्ट्रपति पद के लिए एक से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में थे और मुकाबला हुआ था। इसके बाद के पिछले तीन दशकों में जितने भी राष्ट्रपति चुनाव हुए, वे सभी औपचारिकता बनकर रह गए और हर बार उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए। लेकिन इस बार की तस्वीर बिल्कुल अलग है।
मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। चुनाव आयोग के इतिहास में पहली बार वोटों की गिनती का लाइव प्रसारण किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह के संशय की कोई गुंजाइश न बचे।
वोटिंग का समय और पूरी प्रक्रिया
देश की जातीय संसद के 349 सांसद इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान राष्ट्रीय संसद के सत्र कक्ष में दोपहर 2 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलेगा। वोटिंग की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले मुख्य चुनाव आयुक्त खुद सांसदों को मतदान करने का सही तरीका समझाएंगे ताकि किसी भी वोट के अमान्य होने का खतरा न रहे।
किसे मिल सकती है बढ़त?
राजनीतिक विश्लेषकों और आंकड़ों की मानें तो बीएनपी (BNP) उम्मीदवार फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत लगभग तय मानी जा रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि हाल ही में फरवरी में हुए जातीय संसद के चुनावों में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए दो-तिहाई सीटें अपने नाम की थीं। संसद में स्पष्ट बहुमत होने के कारण बीएनपी उम्मीदवार के पक्ष में आंकड़ों का पलड़ा भारी है।
बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनावों का दिलचस्प इतिहास
आंकड़ों पर नजर डालें तो बांग्लादेश के अब तक के राजनीतिक सफर में कुल 12 बार राष्ट्रपति चुनाव हुए हैं। इनमें से 8 बार ऐसा हुआ जब राष्ट्रपति पूरी तरह निर्विरोध चुने गए। देश में संविधान लागू होने के बाद पहला राष्ट्रपति चुनाव 1974 में हुआ था, जिसमें मोहम्मद मोहम्मदुल्लाह पहले राष्ट्रपति बने थे।
हालांकि, इसके बाद देश की व्यवस्था में कई बार बदलाव हुए। साल 1975 में संविधान संशोधन के बाद सीधे जनता द्वारा राष्ट्रपति चुने जाने का प्रावधान आया। इस जनता आधारित प्रणाली के तहत 1978, 1981 और 1986 में चुनाव हुए। लेकिन साल 1991 में देश ने एक बार फिर संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया और तभी से राष्ट्रपतियों का चुनाव आम जनता की बजाय संसद के सदस्यों (MPs) के जरिए ही होता आ रहा है।
क्यों नौबत आई इस चुनाव की?
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद शुरू हुआ। शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए गत 24 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर संपर्क साधने की उनकी कोशिशों के कारण प्रधानमंत्री तारिक रहमान उनसे नाराज चल रहे थे, जिसके बाद उनका हटना तय माना जा रहा था।
मतदान से पहले बीएनपी खेमे में हलचल
इस बड़े राजनीतिक संग्राम से ठीक एक दिन पहले बुधवार को संसद भवन में बीएनपी सांसदों की एक अति-महत्वपूर्ण बैठक हुई। प्रधानमंत्री के डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी जाहिदुल इस्लाम रोनी ने जानकारी दी कि यह बैठक दोपहर 4 बजे शुरू हुई और इसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने की। इस रणनीतिक बैठक में पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार फखरुल इस्लाम आलमगीर भी विशेष रूप से मौजूद रहे ताकि जीत के समीकरणों को अंतिम रूप दिया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: बांग्लादेश में कितने साल बाद राष्ट्रपति चुनाव में मुकाबला हो रहा है?
उत्तर: बांग्लादेश में पूरे 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला हो रहा है। आखिरी बार 1991 में ऐसा हुआ था जब एक से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में थे।
Q2: इस चुनाव में मुख्य उम्मीदवार कौन-कौन हैं?
उत्तर: इस चुनाव में सत्ताधारी पार्टी बीएनपी (BNP) के फखरुल इस्लाम आलमगीर और जमात-ए-इस्लामी समर्थित 11 दलों के गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद आमने-सामने हैं।
Q3: राष्ट्रपति चुनाव में वोट कौन डालता है?
उत्तर: बांग्लादेश की जातीय संसद के 349 सांसद इस चुनाव में मतदान करते हैं।