समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली में एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए आजम खान के ठिकानों और उनकी महत्वाकांक्षी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर जोरदार छापा मारा है। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और समर्थकों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है।
सुबह-सुबह केंद्रीय बलों के साथ पहुंची ED की टीमें
बुधवार की सुबह जब आम दिनों की तरह लोग अपनी दिनचर्या में व्यस्त थे, तब रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के गेट पर अचानक केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ ED के अधिकारी पहुंचे। यह छापेमारी महज एक जगह तक सीमित नहीं थी, बल्कि उत्तर प्रदेश के रामपुर, सहारनपुर और देश की राजधानी दिल्ली समेत कुल 10 परिसरों पर एक साथ अंजाम दी गई।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17 के तहत की जा रही है। पिछले कुछ समय से एजेंसी मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी में हुए वित्तीय लेन-देन की सूक्ष्मता से जांच कर रही थी, जिसके बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है।
किन-किन ठिकानों पर पड़ी रेड?
जांच एजेंसी के रडार पर कई ऐसे लोग और संस्थान आए हैं, जिन पर वित्तीय गड़बड़ी में शामिल होने का शक है। ED की टीमों ने जिन प्रमुख ठिकानों पर दबिश दी है, उनमें शामिल हैं:
- रामपुर: मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी का पूरा परिसर, मैसर्स एएंडएस इंटरप्राइजेज, सीके एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड, सीके एसोसिएट्स के डायरेक्टर पवन कुमार जैन का दफ्तर और शाहीन खान का आवास।
- सहारनपुर: सिल्वा मार्केट स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) दीपक गुप्ता का कार्यालय और उनका ग्रीन पार्क कॉलोनी स्थित आवास।
- दिल्ली: जसोला और जामिया नगर इलाके में स्थित जौहर एसोसिएट के पार्टनर सैयद खालिद का आवास।
सरकारी फंड के दुरुपयोग और ठेकेदारों से सांठगांठ का गंभीर आरोप
प्रवर्तन निदेशालय की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि सरकारी ठेकों और फंड्स के आवंटन में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। आरोप है कि सरकारी काम करने वाले कुछ चुनिंदा निजी ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच भारी-भरकम वित्तीय लेन-देन हुआ था।
जांच एजेंसी का मानना है कि इन ठेकेदारों ने अपने व्यावसायिक लाभ के बदले में जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय को भारी चंदा या निर्माण कार्यों के रूप में अप्रत्यक्ष फायदा पहुंचाया। ED की टीमें इसी अंडर-द-टेबल डीलिंग और मनी ट्रेल (Money Trail) को साबित करने के लिए बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल एविडेंस और अकाउंट की फाइलों को खंगाल रही हैं।
जब्त किए गए अहम दस्तावेज
छापेमारी के दौरान ईडी के अधिकारियों ने विश्वविद्यालय परिसर और अन्य ठिकानों से कई बेहद संवेदनशील वित्तीय दस्तावेज, कंप्यूटर डेटा और बैंक खातों की फाइलें अपने कब्जे में ले ली हैं। इन दस्तावेजों का विश्लेषण करने के बाद एजेंसी कुछ और लोगों को पूछताछ के लिए समन भेज सकती है। अचानक हुई इस कार्रवाई से आजम खान के करीबियों में भारी बेचैनी देखी जा रही है।
कानूनी शिकंजे में पहले से घिरे हैं आजम खान
बता दें कि आजम खान पहले से ही कई मुकदमों में सजा काट रहे हैं और सीतापुर जेल में बंद हैं। हाल ही में उन्हें एक अन्य मामले में भी झटका लगा था। अब इस नए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की रेड ने उनकी कानूनी मुश्किलों के दायरे को और ज्यादा बढ़ा दिया है। यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी के पुख्ता सबूत कोर्ट में साबित होते हैं, तो ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े अन्य पदाधिकारियों की मुश्किलें भी आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: ED ने आजम खान के किन ठिकानों पर छापेमारी की है?
उत्तर: ED ने रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के अलावा, सहारनपुर और दिल्ली में स्थित सीए, ठेकेदारों और सहयोगियों के कुल 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है।
Q2: यह कार्रवाई किस कानून के तहत की जा रही है?
उत्तर: यह पूरी कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17 के तहत की जा रही है।
Q3: इस पूरी जांच का मुख्य फोकस क्या है?
उत्तर: जांच का मुख्य फोकस जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के निर्माण कार्यों में सरकारी फंड के कथित दुरुपयोग और ठेकेदारों के साथ हुए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की सच्चाई सामने लाना है।