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US Election: पोस्टल बैलट नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, कोर्ट की हरी झंडी का इंतज़ार

US Election: पोस्टल बैलट नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, कोर्ट की हरी झंडी का इंतज़ार

अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से चुनावी प्रणाली और मतदान के तौर-तरीकों को लेकर हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी डाक सेवा यानी यूएस पोस्टल सर्विस (USPS) ने आगामी चुनावों और मतदान की प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। यदि अदालत से इसे हरी झंडी मिल जाती है, तो मेल-इन वोटिंग (Mail-in voting) यानी डाक के जरिए वोट डालने के नियमों में भारी फेरबदल देखने को मिलेगा। इस नए प्रस्ताव का मकसद पूरी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाना है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक दलों और चुनाव विशेषज्ञों के बीच बहस भी छिड़ गई है।

क्या हैं नए नियम और क्यों पड़ी इनकी जरूरत?

हाल के वर्षों में अमेरिका में मेल-इन वोटिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान करोड़ों मतदाताओं ने अपने घरों से ही डाक के जरिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। हालांकि, इसके बाद से ही मतदान की इस पद्धति की सुरक्षा और समय पर वोटों की गिनती को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

यूएसपीएस (USPS) द्वारा तैयार किए गए इन नए नियमों के तहत डाक से आने वाले मतपत्रों (Ballots) की छंटनी, उनकी हैंडलिंग और डिलीवरी की समय-सीमा को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। एजेंसी का तर्क है कि इससे चुनावी धांधली की गुंजाइश कम होगी और हर एक वोट तय समय पर संबंधित चुनाव अधिकारियों तक सुरक्षित पहुंच सकेगा।

अदालत के पाले में गेंद: क्या है कानूनी दांव-पेंच?

यह पूरा मामला फिलहाल न्यायिक समीक्षा के अधीन है। यूएस पोस्टल सर्विस ने अपने नियमों का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, लेकिन इसे लागू करने से पहले संघीय अदालत (Federal Court) की औपचारिक अनुमति का इंतजार किया जा रहा है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि अदालत इन नियमों को मंजूरी देती है, तो इसका सीधा असर उन राज्यों पर पड़ेगा जहां मेल-इन वोटिंग का प्रतिशत सबसे ज्यादा है।

"चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता और विश्वसनीयता बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। डाक सेवा यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर नागरिक का वोट बिना किसी बाधा के सही जगह पहुंचे।" - यूएसपीएस अधिकारी

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और आम जनता पर असर

अमेरिकी राजनीति में मतदान के नियम हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहे हैं।

  • डेमोक्रेटिक पार्टी का पक्ष: डेमोक्रेट्स का मानना है कि मेल-इन वोटिंग नियमों को सख्त करने से कामकाजी वर्ग, बुजुर्गों और अल्पसंख्यकों के लिए मतदान करना कठिन हो सकता है। उनका तर्क है कि इससे मतदान का अधिकार सीमित हो सकता है।
  • रिपब्लिकन पार्टी का पक्ष: दूसरी ओर, रिपब्लिकन पार्टी इन सख्त नियमों का स्वागत कर रही है। उनका दावा है कि कड़े नियमों से चुनावी धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी और चुनाव परिणामों की सटीकता में सुधार होगा।

आम मतदाताओं के लिए इसका मतलब यह होगा कि उन्हें अब अपने मतपत्र को भेजने के लिए तय की गई समय-सीमा का बेहद सख्ती से पालन करना होगा। थोड़ी सी भी लापरवाही या देरी से भेजा गया वोट अमान्य घोषित किया जा सकता है।

भविष्य की राह और चुनौतियाँ

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, डाक सेवा और चुनाव आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि देश के दूर-दराज के इलाकों से भी वोट समय पर आएं। यदि अदालत इन नए नियमों को हरी झंडी देती है, तो राज्यों को भी अपने स्तर पर मतदाताओं के बीच जागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग बदले हुए नियमों से समय रहते वाकिफ हो सकें।


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ममता पाठक

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Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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