वैश्विक मुद्रा बाजार में इन दिनों सरगर्मी तेज हो गई है। अमेरिकी मुद्रा डॉलर (US Dollar) आज यानी बुधवार को प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले लगभग स्थिर नजर आ रहा है। बाजार की नजरें पूरी तरह से अमेरिका से आने वाले ताजा महंगाई के आंकड़ों (US Inflation Data) पर टिकी हुई हैं। दूसरी ओर, ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (Aussie Dollar) में अच्छी खासी तेजी दर्ज की गई है।
कड़े फैसलों के मुहाने पर अमेरिकी बाजार
फेडरल रिजर्व के अगले कदमों को समझने के लिए निवेशक इस समय अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा गर्म रहते हैं, तो डॉलर में एक बार फिर जोरदार उछाल देखने को मिल सकता है। इसके विपरीत, यदि महंगाई में नरमी के संकेत मिलते हैं, तो फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बढ़ जाएगा, जिसका असर सीधे तौर पर करेंसी मार्केट पर पड़ेगा।
कारोबारी सत्र की शुरुआत में डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के प्रदर्शन को मापता है, बिना किसी बड़े उतार-चढ़ाव के सीमित दायरे में कारोबार कर रहा था। बाजार विशेषज्ञ इसे 'तूफान से पहले की शांति' के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि आंकड़े जारी होने के बाद करेंसी बाजार में भारी वोलैटिलिटी ( उतार-चढ़ाव) की पूरी संभावना है।
ऑस्ट्रेलियन डॉलर में क्यों आई तेजी?
मुख्य अमेरिकी मुद्रा जहां सुस्त चाल चल रही है, वहीं ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) ने मजबूत वापसी की है। इसके पीछे मुख्य वजह घरेलू मोर्चे पर ब्याज दरों को लेकर निवेशकों का नजरिया है। हाल ही में आए रोजगार और आर्थिक आंकड़ों के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) अपनी ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है या जरूरत पड़ने पर और सख्ती बरत सकता है।
- ब्याज दरों का अनुमान: आरबीए की नीतियों को लेकर बाजार में hawkish रुख बना हुआ है।
- कमोडिटी कीमतों का समर्थन: वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में स्थिरता से भी ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था को बल मिला है।
- जोखिम उठाने की क्षमता: एशियाई बाजारों में निवेशकों के बीच जोखिम उठाने की प्रवृत्ति (Risk-on sentiment) बढ़ने से भी कमोडिटी से जुड़ी मुद्राओं को फायदा हुआ है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
फॉरेक्स मार्केट (Forex Market) के जानकारों का कहना है कि आने वाले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। मुद्रा बाजार में ट्रेडिंग करने वालों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी पोजीशन को लेने से पहले अमेरिकी डेटा के रिलीज होने का इंतजार करें। छोटी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय अत्यधिक जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि एक ही आंकड़े से पूरी दिशा बदल सकती है।
एशियाई सत्र के दौरान अन्य प्रमुख मुद्राएं जैसे कि जापानी येन (JPY) और ब्रिटिश पाउंड (GBP) भी डॉलर के मुकाबले दायरे में ही कारोबार कर रही हैं। निवेशकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया के कारण बाजार में फिलहाल कोई स्पष्ट एकतरफा रुझान देखने को नहीं मिल रहा है।
