पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चलाए जा रहे विशेष खाद्य सुरक्षा अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्यभर में अशुद्ध और मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर लगाम लगाने के लिए चलाए गए इस बड़े अभियान के दौरान कुल 1,730 खाने-पीने की जगहों पर औचक छापेमारी की गई। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से खाद्य कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
अधिकारियों की कड़ी कार्रवाई में कई बड़े खुलासे
प्रशासन की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों पर नकेल कसना था। छापेमारी के दौरान कई ऐसी जगहों का पता चला जहां नियमों को ताक पर रखकर खाद्य पदार्थों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा था। अधिकारियों ने मौके पर ही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कड़े कदम उठाए।
कार्रवाई के मुख्य आंकड़े:
- खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां: नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कुल 13 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया गया है।
- रेस्तरां पर शिकंजा: साफ-सफाई और अन्य मानकों की अनदेखी करने वाले 5 प्रमुख रेस्तरां के लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित कर दिए गए हैं।
- पैकबंद पानी के प्लांट: शुद्धता के दावों की पोल खोलते हुए 6 पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर (प्योर वाटर बॉटलिंग प्लांट) को सील कर दिया गया है।
जनता की सेहत से समझौता बर्दाश्त नहीं
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि त्योहारों और सामान्य दिनों में भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए राज्य के विभिन्न जिलों में इस तरह के निरीक्षण अभियानों को और अधिक तीव्र किया जाएगा। जिन प्रतिष्ठानों को बंद किया गया है, उन्हें तब तक दोबारा संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी जब तक वे सभी तय मानकों को पूरा नहीं कर लेते।
स्थानीय लोगों में जागरूकता जरूरी
खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे बाजार से कोई भी खाद्य सामग्री या पैकेटबंद पानी खरीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट, सील और गुणवत्ता की जांच अवश्य करें। यदि किसी भी दुकान या रेस्तरां में अनियमितता पाई जाती है, तो उसकी शिकायत तुरंत संबंधित विभाग को दी जानी चाहिए ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें।
आगे की रणनीति
प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि इन सील की गई इकाइयों और प्लांटों से सप्लाई होने वाले उत्पाद किन-किन बाजारों में खपाए जा रहे थे। इस कड़ी से जुड़े अन्य लोगों और वितरकों की भी सुरागकशी की जा रही है ताकि मिलावट के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। आने वाले दिनों में राज्यभर में इस तरह के औचक निरीक्षणों का दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा।