क्या आपने कभी सोचा है कि कानून की नजरों से बचने के लिए शातिर अपराधी किस हद तक जा सकते हैं? महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसे सुनकर पुलिस भी एक पल के लिए हैरान रह गई। अपराधियों ने गोमांस की तस्करी का एक ऐसा नायाब और शातिर तरीका निकाला था, जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की हो।
छत्रपति संभाजीनगर की अपराध शाखा (Crime Branch) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए बोलेरो वाहन से लगभग 2 हजार किलो गोमांस बरामद किया है। इस अवैध तस्करी के खेल का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को धर दबोचा है, जबकि इस नेटवर्क से जुड़े तीन अन्य लोग अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं, जिनकी तलाश तेजी से जारी है। आइए जानते हैं इस पूरी फिल्मी अंदाज में चल रही तस्करी की कहानी और कैसे पुलिस ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
कैसे दिया जा रहा था तस्करी को अंजाम?
मामला तब खुला जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि अवैध रूप से गोमांस का परिवहन किया जा रहा है। शहर से सटे मालिवाडा क्षेत्र में पुलिस ने जब एक संदिग्ध बोलेरो वाहन को रोका, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। तस्करों ने पुलिस और प्रशासन को धोखा देने के लिए बेहद शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया था।
वाहन के अंदर गोमांस को पहले सफेद तिरपाल में कसकर लपेटा गया था ताकि खून या बदबू बाहर न आए। इसके बाद तापमान बनाए रखने और मांस खराब न हो, इसके ऊपर भारी मात्रा में बर्फ डाली गई थी। सिर्फ इतना ही नहीं, पुलिस को पूरी तरह गुमराह करने के लिए इस 'खतरनाक' खेप के ठीक ऊपर 10 से 12 खाली पुठ्ठों (गत्ते के डिब्बे) के डिब्बे सजा दिए गए थे, ताकि दूर से देखने पर यह सिर्फ एक सामान्य कूरियर या पार्सल ढोने वाली गाड़ी लगे।
फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया कि अपराधियों ने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए बोलेरो वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट लगा रखी थी, ताकि किसी भी टोल प्लाजा या ट्रैफिक कैमरे में असली पहचान न आ सके। पुलिस ने वाहन समेत कुल 10 लाख 27 हजार रुपये का माल जब्त किया है।
पकड़े गए शातिर तस्कर, कौन हैं आरोपी?
पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आदिल रफीक शेख (24) और जीशान सादिक सय्यद (26) के रूप में हुई है। दोनों आरोपी महाराष्ट्र के श्रीरामपुर इलाके के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इन्हें महज कुछ घंटों के सफर के एवज में लालच दिया गया था।
शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें इस खेप को तयशुदा जगह तक पहुंचाने के लिए सिर्फ तीन घंटे की ड्राइविंग करनी थी, जिसके बदले उन्हें 5,000 रुपये मिलने तय हुए थे। यह पूरा मांस मुंबई के एक व्यापारी को 350 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाना था।
मुंबई भेजने का था पूरा प्लान, आमने इंटरचेंज पर बदलना था वाहन
तस्करों का यह रैकेट काफी सोच-समझकर चलाया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की योजना बोलेरो वाहन को सीधे मुंबई या भीड़भाड़ वाले इलाकों में ले जाने की नहीं थी। बल्कि, उनका प्लान था कि वाहन को समृद्धि महामार्ग पर स्थित 'आमने इंटरचेंज' तक ले जाया जाए।
- गाड़ी बदलने की रणनीति: आमने इंटरचेंज पर पहुंचकर इस बोलेरो से गोमांस को एक दूसरी कार में शिफ्ट (स्थानांतरित) किया जाना था।
- अंतिम ठिकाना: इसके बाद इस अवैध मांस को कल्याण-ठाणे बेल्ट के विभिन्न होटलों और स्थानीय बाजारों में खपाने की योजना थी।
लेकिन इससे पहले कि वे अपने इस प्लान को अंजाम तक पहुंचा पाते, अपराध शाखा की टीम ने सटीक सूचना के आधार पर समृद्धि महामार्ग पर पहुंचने से पहले ही उन्हें दबोच लिया।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
इस पूरी वारदात का मुख्य सूत्रधार या सरगना जुबेर बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस अवैध कारोबार में और भी कई बड़े चेहरे शामिल हो सकते हैं। गिरफ्तार दोनों आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह मांस कहां से लाया गया था और इसके पीछे कौन सा बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।
फरार चल रहे जुबेर और अन्य तीन आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें छापेमारी कर रही हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की इस मुस्तैदी से एक बार फिर साफ हो गया है कि अवैध गतिविधियों को अंजाम देने वाले कितने भी शातिर क्यों न हों, कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: पुलिस ने कुल कितना गोमांस जब्त किया है?
Ans: पुलिस ने बोलेरो वाहन से करीब 2 हजार किलो गोमांस जब्त किया है, जिसकी कीमत बाजार में काफी आंकी जा रही है।
Q2: तस्करों ने पुलिस से बचने के लिए क्या तरीका अपनाया था?
Ans: तस्करों ने मांस को सफेद तिरपाल और बर्फ में छिपाया था। उसके ऊपर गत्ते के खाली डिब्बे रखे गए थे और वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई थी।
Q3: इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
Ans: इस मामले में अब तक दो आरोपियों (आदिल रफीक शेख और जीशान सादिक सय्यद) को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य सरगना जुबेर सहित तीन अन्य आरोपी फरार हैं।