क्या आपने कभी सोचा है कि एक साथ 4500 किलो रसगुल्ले तैयार करने के लिए आखिर कितने दूध की जरूरत पड़ी होगी? अगर आप गणित लगाएंगे तो शायद हैरान रह जाएंगे, लेकिन उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन के अधिकारियों ने जब यह हिसाब लगाया, तो उनके भी होश उड़ गए। संभल के मंगनपुर गांव में एक ग्राम प्रधान के घर पर हुई छापेमारी के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को एक नए असमंजस में डाल दिया है।
छापेमारी में मिला 4500 किलो रसगुल्ला, अधिकारियों के उड़ गए होश
पूरा मामला संभल के हजरतनगर गढ़ी थाना क्षेत्र के मंगनपुर गांव का है। यहां लंबे समय से अवैध तरीके से बड़े पैमाने पर सफेद रसगुल्ले तैयार किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार के नेतृत्व में खाद्य विभाग और प्रशासनिक टीम ने एक औचक छापेमारी की।
जब अधिकारी ग्राम प्रधान के घर के अंदर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। घर के अंदर भारी मात्रा में तैयार सफेद रसगुल्ले, छेना और अन्य कच्चा माल भरा हुआ था। तौलने पर पता चला कि यह तैयार माल कोई क्विंटल-दो क्विंटल नहीं, बल्कि पूरे 4500 किलोग्राम (साढ़े चार टन) है। इस भारी-भरकम खेप को देखकर ही प्रशासन समझ गया था कि यह किसी छोटे-मोटे घरेलू इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े कमर्शियल नेटवर्क के तहत पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सप्लाई के लिए तैयार किया जा रहा था।20 हजार लीटर दूध का हिसाब कहां है?
कार्रवाई के दौरान असली ट्विस्ट तब आया जब प्रशासनिक अधिकारियों ने गणितीय और व्यावहारिक पहलुओं की पड़ताल शुरू की। सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार ने फैक्ट्री संचालक से एक सीधा और तीखा सवाल पूछा— "इतनी भारी मात्रा (4500 किलो) में रसगुल्ले तैयार करने के लिए कम से कम 20 हजार लीटर दूध की आवश्यकता पड़ी होगी। यह दूध कहां से आया और इसका खरीद रिकॉर्ड कहां है?"
अधिकारी के इस सवाल पर फैक्ट्री संचालक और वहां मौजूद लोग पूरी तरह निरुत्तर हो गए। वे इस बात का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए कि आखिरकार रातों-रात या कुछ दिनों के भीतर इतनी भारी मात्रा में कच्चा दूध किस डेयरी या किस विक्रेता से खरीदा गया था। इस खुलासे के बाद अब यह जांच केवल 'गुणवत्ता' तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि 'कच्चे माल के अवैध स्रोत' तक फैल चुकी है।
लैब में भेजे गए सैंपल, रिपोर्ट का इंतजार
प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके से रसगुल्ले, छेना और इस्तेमाल हो रही अन्य सामग्रियों के नमूने (Samples) एकत्र कर लिए हैं। इन सभी सैंपलों को एक विशेष मैसेंजर के जरिए मेरठ स्थित प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है।
- क्या रसगुल्ले खाने योग्य थे?
- क्या इनमें किसी खतरनाक केमिकल या यूरिया का इस्तेमाल हुआ था?
- क्या दूध सिंथेटिक था?
इन तमाम सवालों के जवाब लैब रिपोर्ट आने के बाद ही आधिकारिक तौर पर मिल सकेंगे। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की सख्त वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी।
प्रधान पति का पक्ष: 'हमारे पास लाइसेंस और जीएसटी है'
दूसरी ओर, इस पूरी कार्रवाई के बाद आरोपी ग्राम प्रधान के पति अबरार ने मीडिया और प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखा है। उनका दावा है कि यह कारोबार उनके बेटे द्वारा चलाया जाता है और उनके पास इससे जुड़े वैध लाइसेंस और जीएसटी नंबर भी मौजूद हैं।
अबरार का कहना है कि उनके यहां रसगुल्ले केवल दूध, चीनी और पाउडर के मिश्रण से तैयार किए जाते हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उनके यहां से पहले भी विभाग द्वारा सैंपल लिए जा चुके हैं जो जांच में पास हुए थे। बहरहाल, प्रशासन का कहना है कि लाइसेंस होना एक बात है, लेकिन 20 हजार लीटर दूध की खरीद का कोई दस्तावेज या बिल न होना गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।
त्योहारों के सीजन में पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
दिलचस्प बात यह है कि मंगनपुर और उसके आसपास का इलाका सफेद रसगुल्लों के अवैध और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए पहले भी चर्चा में रहा है। होली के पावन पर्व के दौरान भी खाद्य विभाग ने यहां छापेमारी कर कई कुंतल तैयार माल को नष्ट कराया था। इसके बावजूद इस अवैध कारोबार का थम न जाना प्रशासनिक व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े करता है।
फिलहाल, संभल प्रशासन इस बात की गहराई से छानबीन कर रहा है कि इस अवैध डेयरी और मिठाई निर्माण इकाई को पर्दे के पीछे से कौन लोग संरक्षण दे रहे थे और जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले इस नेटवर्क की जड़ें कहां-कहां तक फैली हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: संभल में प्रशासन ने कितनी मात्रा में रसगुल्ले जब्त किए हैं?
प्रशासन ने मंगनपुर गांव में छापेमारी के दौरान लगभग 4500 किलोग्राम (4.5 टन) तैयार सफेद रसगुल्ले और अन्य कच्चा माल जब्त किया है।
Q2: अधिकारियों ने किस बात पर सवाल उठाया है?
सिटी मजिस्ट्रेट ने सवाल उठाया है कि 4500 किलो रसगुल्ले बनाने के लिए करीब 20,000 लीटर दूध की जरूरत पड़ी होगी, लेकिन फैक्ट्री संचालक के पास इस दूध की खरीद का कोई रिकॉर्ड या वैध जवाब नहीं है।
Q3: जब्त किए गए रसगुल्लों की जांच कहां हो रही है?
खाद्य विभाग की टीम ने रसगुल्ले और अन्य सामग्रियों के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए मेरठ स्थित प्रयोगशाला में भेजा है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।