खाकी का काम जनता की रक्षा करना और पीड़ितों को इंसाफ दिलाना होता है, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो समाज का व्यवस्था पर से भरोसा उठने लगता है। राजस्थान के नागौर जिले से एक ऐसा ही शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग की साख पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। एक विवाहिता को मदद का भरोसा देकर उसके करीब आए एक सहायक उप-निरीक्षक (ASI) ने अपनी ही वर्दी की मर्यादा को तार-तार कर दिया। आरोपी पुलिसकर्मी पर वीडियो कॉल के जरिए आपत्तिजनक हरकतें करने और विरोध करने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देने का गंभीर आरोप है।
न्यायालय ने भेजा न्यायिक हिरासत में
विवाहिता से आपत्तिजनक बातचीत और वीडियो कॉल पर अवांछित हरकतें करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए तत्कालीन गोटन थाना और हाल जसनगर थाने के एएसआई रामनिवास इनाणिया को बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश किया गया। मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने आरोपी पुलिसकर्मी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और आम जनता के बीच इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है।
ऐसे शुरू हुआ खाकी का काला खेल
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पीड़िता ने हाल ही में नागौर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) आशाराम चौधरी के समक्ष पेश होकर अपनी आपबीती सुनाई और मदद की गुहार लगाई। पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता पारिवारिक विवाद के चलते अपने मकान में अकेली रह रही थी। उसके पति द्वारा लगातार परेशान किए जाने से तंग आकर वह न्याय की आस में नागौर जिले के गोटन थाने पहुंची थी।
उस समय थाने में तैनात एएसआई रामनिवास इनाणिया ने शुरुआत में पीड़िता की बात सुनी और उसके परिजनों को महिला को परेशान न करने की हिदायत दी थी। लेकिन पीड़िता को क्या पता था कि जिस पुलिसकर्मी को वह अपना मददगार मान रही है, वही उसकी लाचारी का फायदा उठाने की फिराक में है।
जांच के बहाने बढ़ाई नजदीकियां और करने लगा गंदी मांग
पीड़िता द्वारा दर्ज कराए गए परिवाद के मुताबिक, थाने में मुलाकात के बाद एएसआई रामनिवास ने उसका मोबाइल नंबर ले लिया। इसके बाद वह जांच के बहाने लगातार महिला के संपर्क में रहने लगा। शुरुआत में उसने हालचाल पूछने के नाम पर फोन करना शुरू किया, लेकिन धीरे-धीरे उसकी नीयत में खोट आने लगा।
- आपत्तिजनक बातचीत: एएसआई जांच के नाम पर फोन कर के कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें करने लगा और अनैतिक संबंध बनाने का दबाव डालने लगा।
- झूठे केस की धमकी: जब महिला ने उसकी इन घिनौनी हरकतों का विरोध किया, तो खाकी की हनक दिखाते हुए उसने विवाहिता को गंभीर परिणामों और झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी।
- व्हाट्सऐप पर प्रताड़ना: आरोपी यहीं नहीं रुका, बल्कि उसने व्हाट्सऐप पर महिला को आपत्तिजनक तस्वीरें भेजना भी शुरू कर दिया।
वीडियो कॉल और पुख्ता सबूत
हद तो तब हो गई जब गत 17 जुलाई को आरोपी एएसआई ने सारी हदें पार करते हुए व्हाट्सऐप पर वीडियो कॉल किया और गंदी हरकतें व बातें की। तंग आकर पीड़िता ने हिम्मत जुटाई और आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ सबूत इकट्ठा किए। महिला ने एएसआई द्वारा की गई बातचीत के वीडियो और वॉयस रिकॉर्डिंग को नागौर एएसपी आशाराम चौधरी के समक्ष पेश किया।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एएसपी ने तुरंत प्रभाव से जांच के आदेश दिए और नियमानुसार सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए। इसके बाद गोटन थाने में आरोपी एएसआई रामनिवास के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मंगलवार को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और बुधवार को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
पुलिस अधिकारियों का बयान
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर कोताही नहीं बरती जाएगी। पीड़िता द्वारा मुहैया कराई गई वॉयस रिकॉर्डिंग, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच की जा रही है। पुलिस विभाग का यह कड़ा रुख यह संदेश देने के लिए काफी है कि वर्दी की आड़ में अपराध करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह विभाग का अपना अधिकारी ही क्यों न हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. नागौर में किस पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया गया है?
नागौर में विवाहिता से आपत्तिजनक बातचीत और प्रताड़ना के आरोप में तत्कालीन गोटन थाना और हाल जसनगर थाना के एएसआई रामनिवास इनाणिया को गिरफ्तार किया गया है।
2. आरोपी एएसआई पर क्या मुख्य आरोप हैं?
आरोपी पर जांच के बहाने महिला का नंबर लेकर उसे परेशान करने, वीडियो कॉल पर आपत्तिजनक बातें करने, अनैतिक संबंध का दबाव बनाने और विरोध करने पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का आरोप है।
3. इस मामले का खुलासा कैसे हुआ?
पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर नागौर के एएसपी आशाराम चौधरी के सामने पेश होकर वीडियो और वॉयस रिकॉर्डिंग जैसे पुख्ता सबूतों के साथ परिवाद दर्ज कराया, जिसके आधार पर यह कार्रवाई हुई।