राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में रविवार को एक ऐसा वैचारिक और सांस्कृतिक महाकुंभ देखने को मिला, जिसने देश की राजनीति और सामाजिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। मौका था श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के पुरोधा और विश्व हिंदू परिषद के महान विभूति रहे अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी वर्ष के प्रांतीय शुभारंभ का। इस भव्य आयोजन में न केवल उनके कृतित्व और व्यक्तित्व का स्मरण किया गया, बल्कि वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर दो टूक बातें भी रखी गईं। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह से ऊर्जा, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत था।
'एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे': सीएम मोहन यादव
समारोह को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के दो टूक अंदाज में कहा कि एक ही देश और प्रदेश में दो अलग-अलग कानून या विधान नहीं चल सकते। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जिस प्रकार हिंदू समाज में एक विवाह का नियम कानूनी रूप से अनिवार्य है, उसी प्रकार यह नियम हर नागरिक पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
बहुविवाह के संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट घोषणा की कि मध्य प्रदेश की धरती पर अब बहुविवाह किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे समय की सबसे बड़ी मांग बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप देश में समानता के अधिकारों को धरातल पर उतारने का कार्य तेजी से हो रहा है।
गौ-सेवा और किसानों के कल्याण की दिशा में बड़ा कदम
इस वैचारिक मंथन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के लोक-कल्याणकारी कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गौ-वंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में गौशालाओं को प्रति गाय मिलने वाले अनुदान को सीधे दोगुना यानी 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये कर दिया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि आने वाले समय में भी गौ-वंश की सेवा और उनकी बेहतरी के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, वे बिना किसी संकोच के उठाए जाएंगे।
मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की उठी पुरजोर मांग
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सह संगठन महामंत्री विनायक राव देशपांडे ने मंच से एक बेहद अहम और लंबे समय से चली आ रही मांग को फिर से मुखर किया। उन्होंने देश भर के देवालयों और मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त करने का आह्वान किया। देशपांडे ने कहा कि सदियों से हमारी आस्था के केंद्र रहे मंदिरों का संचालन नौकरशाही या सरकारी तंत्र के अधीन नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके लिए समाज और संतों की भागीदारी वाली एक स्वतंत्र, स्वायत्त और पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि इस दिशा में एक प्रभावी 'स्वायत्त देवस्वम बोर्ड' या 'धर्म परिषद' जैसी व्यवस्था का गठन किया जाना चाहिए, ताकि मंदिरों की पवित्रता, उनकी संपत्ति और उनके सांस्कृतिक वैभव का उपयोग समाज कल्याण और राष्ट्र निर्माण के लिए सही ढंग से हो सके।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामाजिक समरसता का प्रतीक था राम मंदिर आंदोलन
बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने अपने संबोधन में अशोक सिंघल के जीवन को रामजन्मभूमि आंदोलन के इतिहास से जोड़ा। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि का आंदोलन केवल एक मंदिर निर्माण की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा और प्रभावी सांस्कृतिक पुनर्जागरण था।
पवैया ने उन अनगिनत कारसेवकों के बलिदान को नमन किया जिन्होंने इस महान कार्य के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने समाज में फैली दूरियों को मिटाने के लिए 'सामाजिक समरसता' को आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया और कहा कि एकजुट हिंदू समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव है।
सालभर चलेगा राष्ट्रव्यापी और अंतरराष्ट्रीय अभियान
अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी का यह आयोजन महज एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि विश्व हिंदू परिषद ने इसे एक विशाल राष्ट्रव्यापी और अंतरराष्ट्रीय अभियान का रूप दिया है। यह विशेष अभियान 27 सितंबर 2026 से शुरू होकर आगामी 27 सितंबर 2027 तक, यानी पूरे एक साल तक देश और दुनिया भर में चलाया जाएगा।
विहिप की रूपरेखा के अनुसार, देश के 47 प्रमुख केंद्रों के साथ-साथ विदेशों में भी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों में मुख्य रूप से:
- वैचारिक संगोष्ठियां और संगोष्ठी सत्र
- सामाजिक समरसता सम्मेलन
- व्यापक सेवा कार्य और जनजागरण अभियान
- गौरक्षा और संगठन विस्तार से जुड़े कार्यक्रम
- युवा पीढ़ी को अशोक सिंघल के जीवन दर्शन से परिचित कराना
शामिल होंगे। संगठन का उद्देश्य इन आयोजनों के माध्यम से उनके विचारों को घर-घर तक पहुंचाना है।
देशभर में दिखा जन्मशताब्दी का व्यापक असर
भोपाल के अलावा देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित 'भारत मंडपम' में भी जन्मशताब्दी वर्ष का मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी और गुजरात के अहमदाबाद (कर्णावती) में मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल की उपस्थिति में भी भव्य कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। एक ही दिन देश के अलग-अलग कोनों से शुरू हुए इन कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया कि अशोक सिंघल के विचार आज भी करोड़ों देशवासियों के दिलों में जीवंत हैं।
मंच पर दिग्गजों का जमावड़ा
भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित इस ऐतिहासिक प्रांतीय समारोह में विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंच पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ-साथ विहिप के केंद्रीय सह संगठन महामंत्री विनायक राव देशपांडे, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, गुफा मंदिर धाम के पीठाधीश्वर स्वामी रामप्रवेशदास देवाचार्य महाराज, बौद्ध भिक्षु भदंत बुद्धघोष, वरिष्ठ समाजसेवी और कार्यक्रम के अध्यक्ष चौधरी ओ.पी. गोंदिया तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पाण्डेय प्रमुख रूप से मौजूद रहे। संतों और प्रबुद्धजनों के सान्निध्य में संपन्न यह कार्यक्रम आने वाले समय में एक बड़े सामाजिक परिवर्तन की पटकथा लिखता नजर आ रहा है।