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वाराणसी में मिठाइयों पर बढ़ी निगरानी, 15 अक्टूबर से ‘यूज बाय डेट’ भी जरूरी

वाराणसी में मिठाइयों पर बढ़ी निगरानी, 15 अक्टूबर से ‘यूज बाय डेट’ भी जरूरी

वाराणसी। त्योहारी सीजन शुरू होते ही मिठाई, दूध, पनीर, खोया और दूसरे खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने लगी है। इसी बीच वाराणसी में खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच अभियान तेज किया है। 9 अक्टूबर को सामने आई एक स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, दो दिनों के दौरान जिले में 52 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और अलग-अलग खाद्य पदार्थों के 34 नमूने जांच के लिए लिए गए।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने भी देशभर में त्योहारों के दौरान मिलावट और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

पुरव सैनिक डेस्क ने FSSAI की ताजा advisory, उत्तर प्रदेश में लागू होने जा रहे मिठाई संबंधी नियम और वाराणसी की स्थानीय कार्रवाई से जुड़ी उपलब्ध जानकारी की पड़ताल की। उपभोक्ताओं के लिए इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि 15 अक्टूबर 2026 से उत्तर प्रदेश में बिक्री के लिए रखी खुली मिठाइयों पर ‘यूज बाय डेट’ प्रदर्शित करना अनिवार्य होने जा रहा है।

वाराणसी में 52 प्रतिष्ठानों की जांच

वाराणसी से सामने आई स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने दो दिनों के भीतर 52 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान दूध समेत विभिन्न खाद्य पदार्थों के कुल 34 नमूने लिए गए।

रिपोर्ट में बताया गया कि अभियान सहायक आयुक्त खाद्य-द्वितीय एवं अभिहित अधिकारी के निर्देशन में चलाया गया। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने प्रतिष्ठानों पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और नियमों के पालन की जांच की।

नमूने लिए जाने का अर्थ अपने-आप यह नहीं है कि संबंधित खाद्य पदार्थ मिलावटी पाए गए हैं। किसी नमूने को मानक के अनुरूप या प्रतिकूल घोषित करने के लिए प्रयोगशाला जांच के परिणाम जरूरी होते हैं। इसलिए लैब रिपोर्ट आने से पहले किसी दुकान या उत्पाद को मिलावटी बताना उचित नहीं होगा।

त्योहार से पहले FSSAI ने क्यों बढ़ाई निगरानी?

FSSAI ने 29 सितंबर 2026 को जारी अपनी विशेष festive drive advisory में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निगरानी और enforcement बढ़ाने को कहा है।

इस अभियान में विशेष रूप से दूध और दूध से बने उत्पाद, मिठाइयां, नमकीन और दूसरे savouries, खाद्य तेल, पेय पदार्थ, घी समेत ऐसे खाद्य उत्पाद शामिल हैं जिनकी त्योहारों के दौरान मांग तेजी से बढ़ती है।

FSSAI ने अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों और संभावित hot spots पर inspections और sampling बढ़ाने के साथ जरूरत के अनुसार Food Safety on Wheels जैसी मोबाइल जांच सुविधाओं के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है।

इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में वाराणसी समेत उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों में मिठाई और खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच बढ़ती दिखाई दे सकती है।

15 अक्टूबर से यूपी में बदल जाएगा मिठाई खरीदने का एक अहम नियम

उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर 2026 से बिक्री के लिए प्रदर्शित और भंडारित मिठाइयों पर ‘यूज बाय डेट’ दिखाना अनिवार्य किया जा रहा है।

इस बदलाव का खास असर उन खुली मिठाइयों पर पड़ेगा जो दुकानों के काउंटर या ट्रे में रखी रहती हैं।

अभी ग्राहक अक्सर मिठाई देखकर यह नहीं जान पाता कि उसे कितने समय पहले बनाया गया था या उसे कब तक खाना उचित है। नया display rule ग्राहक को कम-से-कम यह जानने में मदद करेगा कि दुकान उस मिठाई को किस तारीख तक उपयोग योग्य बता रही है।

त्योहारों के दौरान जब दुकानों पर बिक्री कई गुना बढ़ जाती है, तब ऐसी जानकारी उपभोक्ताओं के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकती है।

बनारस में मिठाई खरीदते समय ग्राहक क्या देखें?

वाराणसी में दशाश्वमेध, गोदौलिया, चौक, लंका, सिगरा, भोजूबीर, पांडेयपुर और शहर के दूसरे बाजारों में त्योहार के दिनों में मिठाइयों की खरीद बढ़ जाती है। ऐसे में केवल मिठाई का रंग और सजावट देखकर खरीदने के बजाय कुछ सामान्य सावधानियां उपयोगी हो सकती हैं।

  • खुली मिठाई खरीदते समय ट्रे पर उपलब्ध ‘यूज बाय डेट’ की जानकारी जरूर देखें, खासकर 15 अक्टूबर के बाद। दुकान साफ-सुथरी है या नहीं, मिठाई ढकी हुई है या लंबे समय से खुले में रखी है, इस पर ध्यान दें। पैक्ड मिठाई में ingredient list, manufacturing/packing information, best-before/use-by और FSSAI licence/registration details देखें। दूध, खोया और पनीर जैसी जल्दी खराब होने वाली सामग्री से बनी मिठाई खरीदने के बाद उसे लंबे समय तक गर्म जगह पर न रखें। मिठाई की गंध, स्वाद या बनावट असामान्य लगे तो केवल कीमत बचाने के लिए उसका सेवन न करें।

चमकीला रंग अच्छी मिठाई की गारंटी नहीं

त्योहारी मिठाइयों में रंग और सजावट ग्राहक का ध्यान जल्दी खींचते हैं, लेकिन केवल ज्यादा चमकीला रंग किसी उत्पाद की गुणवत्ता का प्रमाण नहीं है।

FSSAI की मिठाई संबंधी guidance में permitted food colours, अच्छी गुणवत्ता वाले raw materials, hygiene और सही storage पर जोर दिया गया है।

इसीलिए ग्राहक के लिए बेहतर तरीका यह है कि वह दुकान की स्वच्छता, पैकिंग या display information और उत्पाद की freshness पर ध्यान दे।

बार-बार इस्तेमाल किए तेल को लेकर भी FSSAI की चेतावनी

त्योहार के दौरान केवल मिठाइयां ही नहीं, समोसा, कचौड़ी, नमकीन और दूसरे fried snacks की बिक्री भी बढ़ती है।

FSSAI की RUCO पहल के अनुसार तेल को बार-बार तलने में इस्तेमाल करने पर उसमें Total Polar Compounds बढ़ सकते हैं। खाद्य व्यवसायों के लिए इस्तेमाल किए गए frying oil में TPC की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत तय की गई है।

घर में भी तलने वाले तेल को लगातार कई बार गर्म करके इस्तेमाल करना अच्छी kitchen practice नहीं मानी जाती।

इसलिए मिठाई के साथ नमकीन या तले हुए snacks खरीदते समय दुकान की साफ-सफाई और frying setup देखना भी उपयोगी है।

सिर्फ छापेमारी नहीं, जांच रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण

त्योहारी अभियान के दौरान अक्सर बड़ी संख्या में नमूने लिए जाने की खबर सामने आती है, लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।

Sample लिया जाना और sample fail होना दो अलग बातें हैं।

नमूना लेने के बाद प्रयोगशाला में उसकी जांच होती है। रिपोर्ट में मानकों का उल्लंघन मिलने के बाद ही संबंधित मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाती है।

इसलिए PurvSainik.com आगे वाराणसी में लिए गए नमूनों की laboratory reports और खाद्य सुरक्षा विभाग की आगे की कार्रवाई पर भी नजर रखेगा।

उपभोक्ताओं के लिए इस खबर का क्या मतलब है?

वाराणसी में शुरू हुई जांच को केवल दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई के रूप में देखने के बजाय इसे त्योहार से पहले food-safety alert के रूप में भी देखा जा सकता है।

FSSAI की nationwide festive drive और उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर से ‘यूज बाय डेट’ संबंधी व्यवस्था के बाद इस बार ग्राहकों के पास मिठाई की freshness को लेकर पहले से ज्यादा जानकारी मांगने का आधार होगा।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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