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चित्रकूट और गाजीपुर में बाढ़ का कहर, सीएम योगी के निर्देश पर युद्धस्तर पर राहत कार्य

चित्रकूट और गाजीपुर में बाढ़ का कहर, सीएम योगी के निर्देश पर युद्धस्तर पर राहत कार्य

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन को प्रभावित किया है, लेकिन समय रहते उठाए गए प्रशासनिक कदमों के कारण किसी भी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 के शुरुआती हफ्तों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक अमला पूरी तरह से फील्ड में उतरा हुआ है। चित्रकूट और गाजीपुर जैसे संवेदनशील जिलों में चलाए गए राहत और बचाव अभियानों ने यह साबित कर दिया है कि आपदा की स्थिति से निपटने के लिए सरकार कितनी गंभीर है।

चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर घटा, पर प्रशासन की चौकसी बरकरार

धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण जिले चित्रकूट में पिछले कुछ दिनों से आफत बनी मंदाकिनी नदी के तेवर अब कुछ नरम पड़े हैं। 29 अगस्त को जो नदी उफान पर थी और अपने उच्चतम स्तर 135.20 मीटर पर बह रही थी, उसका जलस्तर अब घटकर 128.00 मीटर पर आ गया है। हालांकि जलस्तर में आई इस गिरावट से राहत जरूर मिली है, लेकिन जिला प्रशासन ने अपनी निगरानी में कोई ढिलाई नहीं बरती है।

राहत आयुक्त कार्यालय से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, इस आपदा के दौरान अब तक कुल 688 लोगों को सुरक्षित उनके घरों या बाढ़ शरणालयों तक पहुंचाया जा चुका है। सबसे राहत की बात यह है कि इस पूरी प्राकृतिक चुनौती के दौरान जिले में किसी भी प्रकार की जनहानि या पशुहानि की सूचना नहीं है, जो प्रशासन की समय पर की गई तैयारियों को दर्शाता है.

36 गांवों के 13 हजार से अधिक लोग प्रभावित

मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से जिले के कुल 36 गांव इसकी चपेट में आए थे। इनमें कर्वी तहसील के रामघाट क्षेत्र समेत 19 गांव, राजापुर के 7 गांव और मानिकपुर के 10 गांव शामिल हैं। इन इलाकों की कुल 13,906 आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई। प्रशासन ने बिना समय गंवाए इन सभी इलाकों में युद्धस्तर पर राहत सामग्री पहुंचानी शुरू कर दी ताकि लोगों को भुखमरी या अन्य संकटों का सामना न करना पड़े.

खाद्य सामग्री और मेडिकल सहायता का वितरण

  • संकट की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी वस्तुएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता रही है। आंकड़ों के अनुसार:लंच पैकेट: प्रभावित क्षेत्रों में अब तक कुल 28,803 लंच पैकेट बांटे जा चुके हैं। अकेले कर्वी तहसील में 24,530, राजापुर में 4,043 और मानिकपुर में 230 पैकेट वितरित किए गए हैं।
  • राहत किट: कुल 2,065 राहत किट जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाई गई हैं, जिसमें कर्वी में 1,073, राजापुर में 796 और मानिकपुर में 196 किट शामिल हैं।
  • शरणालय: विस्थापितों के रहने के लिए कुल 18 बाढ़ शरणालयों को पूरी तरह क्रियाशील रखा गया है।

स्वास्थ्य सेवाएं और फसल नुकसान का सर्वेक्षण

बाढ़ के बाद पनपने वाली बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए जिले में कुल 28 मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है। ये टीमें एंबुलेंस और जरूरी जीवन रक्षक दवाओं के साथ लगातार गांवों में स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण का काम कर रही हैं। इसके साथ ही, किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए फसल क्षति का सर्वेक्षण भी तेजी से कराया जा रहा है ताकि सही समय पर मुआवजा दिया जा सके.

मकान क्षति के मामलों में तुरंत आर्थिक सहायता

प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आपदा से प्रभावित हर एक घर के नुकसान का आंकलन निष्पक्ष तरीके से हो। चित्रकूट में बाढ़ की वजह से कुल 653 मकानों को आंशिक क्षति पहुंची है। इनमें से 188 मामलों में तत्काल कार्रवाई करते हुए 7.52 लाख रुपये की सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। वहीं, पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए एक मकान के मामले में 1.20 लाख रुपये की बड़ी सहायता दी गई है। बाकी बचे हुए मामलों में भी भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही राहत राशि पीड़ितों तक पहुंच जाएगी.

गाजीपुर में टला बड़ा हादसा: रात के अंधेरे में हुआ चमत्कारी रेस्क्यू

चित्रकूट के अलावा गाजीपुर जिले से भी एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है, जहां गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। डूहिया सरैया के पास गंगा नदी के बीच बने एक टापू पर अचानक पानी बढ़ने से 12 चरवाहे और उनकी 2 हजार से अधिक भेड़ें फंस गईं। स्थिति इतनी गंभीर थी कि जरा सी चूक से बड़ा नुकसान हो सकता था।

देर रात जैसे ही स्थानीय प्रशासन को इस घटना की सूचना मिली, पुलिस और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। तुरंत एक संयुक्त टीम को ददरी घाट रवाना किया गया। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए नाइट विजन ड्रोन की मदद से टापू पर फंसे इंसानों और भेड़ों की सटीक लोकेशन को चिन्हित किया गया।

इसके बाद फ्लड कंपनी पीएसी, स्थानीय पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और कुशल नाविकों की मदद से एक बेहद जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया जो करीब छह घंटे तक लगातार चला। अंधेरे और पानी के तेज बहाव के बीच चलाए गए इस सफल अभियान के बाद सभी 12 चरवाहों और दो हजार से ज्यादा भेड़ों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई के लिए स्थानीय ग्रामीणों और चरवाहों ने प्रशासन और पुलिस दल की जमकर सराहना की है।

प्रशासन की अपील और आगे की तैयारियां

मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भले ही कुछ राहत की सांस ली है, लेकिन अभी भी निचले इलाकों में पूरी सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे एहतियात बरतें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। उत्तर प्रदेश सरकार की यह तत्परता दिखाती है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय आम जनजीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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