Breaking
► SUV के नीचे फंसी 14 साल की लड़की, 30 लोगों ने बिना सोचे उठाई गाड़ी ► सितंबर के पहले दिन महंगाई का झटका, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर महंगा ► बिहार बाढ़ के बीच नेपाल से आई रहस्यमयी मछलियां, खाने से लोग बीमार ► राहुल गांधी पर FIR से उत्तराखंड में उबाल, सचिवालय के बाहर पुलिस से भिड़े कांग्रेसी ► चंदौली में बाढ़ का कहर: 5 प्रमुख मार्ग ठप, 60 गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कटा ► वाराणसी जोन में चंदौली पुलिस का जलवा, इनामिया बदमाशों की धरपकड़ में हासिल किया नंबर-1 स्थान ► दिल्ली मतदाता सूची अपडेट: मुस्लिम बहुल सीटों पर नामों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा ► कीव पर भीषण रूसी हमला: रेलवे कर्मचारियों को बनाया गया निशाना, कई मौतें ► नेपाल-चीन बॉर्डर पर तबाही: 100 से ज्यादा भारतीय लापता, हिमालयी सैलाब का खौफनाक मंजर ► नेपाल में प्रलय: लापता हाइड्रोपावर कर्मियों को खोजने के लिए पहाड़ियों में ब्लास्ट, अब तक 939 मौतें ► SUV के नीचे फंसी 14 साल की लड़की, 30 लोगों ने बिना सोचे उठाई गाड़ी ► सितंबर के पहले दिन महंगाई का झटका, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर महंगा ► बिहार बाढ़ के बीच नेपाल से आई रहस्यमयी मछलियां, खाने से लोग बीमार ► राहुल गांधी पर FIR से उत्तराखंड में उबाल, सचिवालय के बाहर पुलिस से भिड़े कांग्रेसी ► चंदौली में बाढ़ का कहर: 5 प्रमुख मार्ग ठप, 60 गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कटा ► वाराणसी जोन में चंदौली पुलिस का जलवा, इनामिया बदमाशों की धरपकड़ में हासिल किया नंबर-1 स्थान ► दिल्ली मतदाता सूची अपडेट: मुस्लिम बहुल सीटों पर नामों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा ► कीव पर भीषण रूसी हमला: रेलवे कर्मचारियों को बनाया गया निशाना, कई मौतें ► नेपाल-चीन बॉर्डर पर तबाही: 100 से ज्यादा भारतीय लापता, हिमालयी सैलाब का खौफनाक मंजर ► नेपाल में प्रलय: लापता हाइड्रोपावर कर्मियों को खोजने के लिए पहाड़ियों में ब्लास्ट, अब तक 939 मौतें

राहुल गांधी पर FIR से उत्तराखंड में उबाल, सचिवालय के बाहर पुलिस से भिड़े कांग्रेसी

राहुल गांधी पर FIR से उत्तराखंड में उबाल, सचिवालय के बाहर पुलिस से भिड़े कांग्रेसी

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सियासी पारा अपने उरूज पर है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज हुई एक एफआईआर (FIR) ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के तेवर पूरी तरह आक्रामक नजर आए और पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की पुष्कर सिंह धामी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर जोरदार हुंकार भरी। स्थिति उस वक्त और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता सचिवालय का घेराव करने के लिए आगे बढ़े और पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की देखने को मिली, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।

सचिवालय घेराव के दौरान पुलिस से भिड़े कांग्रेसी

मंगलवार को सुबह से ही देहरादून की सड़कों पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने लगी थी। हाथों में पार्टी के झंडे और तख्तियां लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एकत्र हुए और धामी सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कार्यकर्ताओं की मांग थी कि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। प्रदर्शनकारियों ने जब राज्य सचिवालय की ओर कूच किया, तो पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें बीच रास्ते में ही रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगा दी थी।

पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं और सुरक्षा बलों के बीच तीखी बहस हुई। बैरिकेड्स पार करने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। इस गहमागहमी के बीच कई कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना था कि पुलिस प्रशासन सत्ताधारी दल के इशारे पर काम कर रहा है और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार को भी कुचला जा रहा है।

आखिर क्यों दर्ज हुई है राहुल गांधी पर एफआईआर?

इस पूरे विवाद की जड़ उत्तराखंड के हल्द्वानी में घटी एक घटना से जुड़ी है। कुछ समय पहले हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आरोप है कि इस कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद उस मंच का धार्मिक अनुष्ठान के जरिए 'शुद्धिकरण' किया गया था। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई थी।

विवाद तब और गहरा गया जब राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे दलित समाज के अपमान और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ दिया था। राहुल गांधी के इस बयान के बाद वाल्मीकि समाज के एक स्थानीय व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी ने एक सामान्य धार्मिक कार्यक्रम को जानबूझकर जातिगत रंग देने की कोशिश की है और समाज में भ्रम फैलाया है। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिसके बाद से ही राजनीतिक संग्राम छिड़ा हुआ है।

कांग्रेस ने खोला मोर्चा: 'न्याय की मांग करना अपराध नहीं'

राहुल गांधी पर हुई इस कानूनी कार्रवाई के बाद कांग्रेस पार्टी आक्रामक मुद्रा में आ गई है। पार्टी के तमाम बड़े नेता खुलकर राहुल गांधी के समर्थन में उतर आए हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है।

सचिन पायलट ने एक तीखे बयान में कहा, 'हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद जिस तरह से मंच का शुद्धिकरण किया गया, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए हमारे लोगों ने अनगिनत प्रयास किए, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने कभी कोई सुधि नहीं ली। विडंबना देखिए कि जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस भेदभावपूर्ण और छुआछूत की प्रवृत्ति के खिलाफ आवाज उठाई और इसे दलित समाज का अपमान बताया, तो फौरन उन्हीं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।'

पायलट ने आगे सवाल उठाते हुए कहा, 'क्या इस देश में न्याय की मांग करना या दलितों के अधिकारों के लिए बोलना अपराध बन गया है? इस तरह के मुकदमों और पुलिसिया दबाव से कांग्रेस पार्टी या राहुल गांधी की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। भाजपा का यह दलित-विरोधी चेहरा अब पूरे देश के सामने बेनकाब हो चुका है।'

अखिलेश यादव ने भी बीजेपी को घेरा

इस सियासी विवाद में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी कूद पड़े हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से भाजपा सरकार पर करारा प्रहार किया है।

अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा, 'भारतीय जनता पार्टी की मूल सोच ही दलित-विरोधी है। यही मानसिकता उत्तराखंड में पहले मंच को धुलवाती है और जब कोई इसके खिलाफ आवाज उठाता है, तो देश के नेता प्रतिपक्ष पर ही एफआईआर दर्ज करवा दी जाती है। यह कृत्य बेहद घोर निंदनीय है। भाजपा ने इस तरह के हथकंडे अपनाकर अपनी आसन्न हार के पराजय-पत्र पर खुद ही दस्तखत कर दिए हैं।'

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पलटवार

विपक्ष के इन तीखे हमलों और आरोपों पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कड़ा पलटवार किया है। सीएम धामी ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे हर छोटी-बड़ी बात में जाति और भेदभाव तलाशने की राजनीति करते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, 'चाय पीने के दौरान या सामान्य मुलाकातों में इंसान को सिर्फ अपनापन और आत्मीयता दिखनी चाहिए, लेकिन राहुल गांधी को हर जगह सिर्फ जाति नजर आती है। यह उनकी संकीर्ण राजनीतिक सोच को दर्शाता है। राज्य सरकार कानून के दायरे में रहकर काम कर रही है और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।'

उत्तराखंड की राजनीति पर असर

आगामी दिनों में इस मुद्दे के और तूल पकड़ने के पूरे आसार हैं। कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है कि अगर यह एफआईआर वापस नहीं ली गई, तो वे पूरे राज्य में व्यापक स्तर पर आंदोलन तेज करेंगे। दूसरी ओर, सत्ताधारी दल भी पीछे हटने के मूड में नहीं है और वह राहुल गांधी के बयानों को राज्य की संस्कृति और सद्भाव के खिलाफ बता रहा है। बहरहाल, इस सियासी ड्रामे के केंद्र में एक बार फिर दलित अस्मिता, राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी कार्रवाई का यह जटिल चक्र आ गया है, जिसपर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।

About the Author

रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

Read More