राजधानी दिल्ली की सियासत में एक बार फिर से 'शीश महल' को लेकर पारा हाई हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पुराना आधिकारिक आवास एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में आ गया है। उत्तर दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित 6, फ्लैगस्टाफ रोड का यह आलीशान बंगला एक बार फिर से राजनीतिक दलों के बीच वाकयुद्ध और जांच का मुख्य केंद्र बन चुका है। सोमवार को दिल्ली विधानसभा की लोक लेखा समिति (PAC) की एक उच्चस्तरीय टीम इस विवादित बंगले का जमीनी मुआयना करने के लिए पूरी तैयारी के साथ पहुंच रही है। समिति के साथ कैमरों की टीमें भी मौजूद रहेंगी, जो इस पूरे निरीक्षण को अपने कैमरे में रिकॉर्ड करेंगी ताकि खर्च और निर्माण में हुई कथित अनियमितताओं के पुख्ता सबूत जुटाए जा सकें।
कैमरों के साथ पहुंचेगी पीएसी की टीम, हर कोने की होगी वीडियोग्राफी
मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष और लोक लेखा समिति के सदस्यों की यह टीम इस विशाल बंगले के चप्पे-चप्पे का जायजा लेगी। इस निरीक्षण के दौरान कैमरों के जरिए हर उस हिस्से को रिकॉर्ड किया जाएगा, जिसे लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार आम आदमी पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री पर निशाना साधती रही है। बीजेपी का मुख्य आरोप है कि इस सरकारी आवास के सौंदर्यीकरण और नवीनीकरण पर जनता के खून-पसीने की कमाई का बेहिसाब और अनावश्यक पानी की तरह बहाव किया गया है।
राजनीतिक गलियारों में इस बंगले को 'शीश महल' का नाम दिया गया है, जो साल 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े चुनावी हथियारों में से एक था। चुनाव के बाद से ही यह बंगला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, और अब विधानसभा की समिति द्वारा खुद मौके पर जाकर पड़ताल करना इस मामले को एक नया मोड़ दे रहा है।
क्या हैं मुख्य आरोप और किस बात पर है विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ें उस भारी-भरकम खर्च से जुड़ी हैं, जो इस बंगले के रिनोवेशन के दौरान किया गया था। बीजेपी और विपक्षी नेताओं का आरोप है कि:
- सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर आलीशान सुविधाएं जुटाई गईं।
- निर्माण कार्यों के लिए दिल्ली शहरी कला आयोग (DUAC) और दिल्ली नगर निगम (MCD) से जरूरी और अनिवार्य मंजूरियां नहीं ली गईं।
- बड़े प्रोजेक्ट की एक साथ अनुमति लेने के बजाय, जांच से बचने के लिए इसे छोटे-छोटे रिपेयरिंग और मेंटेनेंस के टेंडरों में विभाजित किया गया ताकि नियमों की धज्जियां उड़ाई जा सकें।
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का यह भी कहना है कि जनता के टैक्स के पैसों का इस तरह का इस्तेमाल पूरी तरह से संवेदनहीनता को दर्शाता है, और इसकी गहराई से स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच होनी बेहद जरूरी है ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
आम आदमी पार्टी का पलटवार और तीखा जुबानी जंग
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। आप नेताओं और पूर्व सीएम का पक्ष रखते हुए विधानसभा में विपक्ष की प्रमुख नेत्रा आतिशी ने पहले ही इन सभी दावों को पूरी तरह बेबुनियाद और झूठा करार दिया है। उनका तर्क रहा है कि मुख्यमंत्री आवास पुराना हो चुका था और उसमें सुरक्षा तथा अन्य बुनियादी जरूरतों के हिसाब से मरम्मत कराना प्रशासनिक आवश्यकता थी, जिसे बेवफा राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
इसके बावजूद, सियासी उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक दोनों दल एक-दूसरे पर हमलावर मुद्रा में हैं। सत्ता पक्ष के नेताओं का दावा है कि पारदर्शी तरीके से जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
फिलहाल सील है बंगला, स्टेट गेस्ट हाउस में बदलने की है योजना
आपको बता दें कि यह बहुचर्चित बंगला वर्तमान में सील हालत में है। जुलाई 2026 में दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री प्रवेश वर्मा ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा था कि इस सील किए गए बंगले के विवाद को खत्म करते हुए इसे भविष्य में एक 'स्टेट गेस्ट हाउस' के रूप में तब्दील कर दिया जाएगा। मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस मुद्दे को लेकर पूर्व सीएम पर लगातार तीखे त कसे हैं और सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए अपनी बात पुरजोर तरीके से रखी है।
अब देखना यह होगा कि आज होने वाले इस पीएसी (PAC) के दौरे और वीडियोग्राफी के बाद समिति अपनी रिपोर्ट में क्या खुलासे करती है। क्या यह दौरा इस राजनीतिक ड्रामे पर विराम लगा पाएगा या फिर आने वाले दिनों में यह विवाद दिल्ली की राजनीति को और अधिक गरमाएगा? इन तमाम सवालों के जवाब आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट होने की उम्मीद है, क्योंकि जनता की निगाहें अब पूरी तरह से इस हाई-प्रोफाइल जांच पर टिकी हुई हैं।