छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। जिले के प्रसिद्ध पर्यटन और ग्रामीण क्षेत्र अमृतधारा में अचानक 12 जंगली हाथियों के एक बड़े दल ने दस्तक दे दी है। हाथियों की इस अचानक मौजूदगी से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और ग्रामीणों की सांसे अटक गई हैं। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला और एहतियातन पूरी बस्ती को खाली कराकर सभी ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है।
अमृतधारा में अचानक पहुंचा हाथियों का झुंड
सोमवार सुबह जैसे ही ग्रामीणों ने विशालकाय जंगली हाथियों को अपने गांवों के करीब और खेतों की तरफ बढ़ते देखा, तो उनके होश उड़ गए। हाथियों का यह दल काफी बड़ा है, जिसमें नर हाथियों के साथ-साथ छोटे बच्चे भी बताए जा रहे हैं। हाथियों की चिंघाड़ और उनकी मौजूदगी से पूरा इलाका दहशत के साये में है। जानकारों का कहना है कि यह दल भोजन और पानी की तलाश में जंगलों से भटकते हुए रिहायशी इलाकों के करीब आ पहुंचा है।
अमृतधारा का यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जलप्रपात के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से यहां वन्यजीवों और इंसानों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। ताजा मामले ने प्रशासन और वन विभाग की नींद उड़ा दी है। जैसे ही हाथियों के आने की सूचना विभाग को मिली, वैसे ही सायरन और अलर्ट मोड के जरिए पूरे गांव में मुनादी कराई गई।
प्रशासन और वन विभाग की तत्परता
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय वन रेंज अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंच गए। स्थिति की नजाकत को देखते हुए बिना एक पल गंवाए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया। हाथियों के रास्ते में आने वाली पूरी बस्ती को खाली कराने का अभियान चलाया गया।
- सुरक्षित स्थान पर शिफ्टिंग: बस्ती के सभी परिवारों को सुरक्षित स्कूलों और सामुदायिक भवनों में ठहराया गया है।
- खाद्य सामग्री और मदद: प्रशासन द्वारा विस्थापित ग्रामीणों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की जा रही है।
- सतर्कता दल तैनात: वन विभाग के विशेष मैदानी अमले को हाथियों की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए तैनात किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि हाथियों को इंसानी बस्तियों से दूर भगाने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जा रहा है। हालांकि, हाथियों का रुख अभी भी गांव के आसपास के जंगलों और खेतों की तरफ ही बना हुआ है, जिसके कारण खतरा टला नहीं है।
ग्रामीणों में डर और अनिश्चितता का माहौल
अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने वाले ग्रामीणों में भारी मायूसी और डर का माहौल है। कई किसानों की फसलें इन हाथियों के पैरों तले रौंदी जा चुकी हैं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है। एक स्थानीय ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'हमने अचानक सुबह हाथियों को अपनी बाड़ियों के पास देखा। बच्चों और महिलाओं की चीख-पुकार मच गई। गनीमत रही कि वन विभाग समय पर पहुंच गया, वरना कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।'
किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिरता देख ग्रामीण काफी चिंतित हैं। उनका कहना है कि सरकार और वन विभाग को इस क्षेत्र में हाथियों के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस नीति बनानी चाहिए, ताकि हर बार इस तरह की इमरजेंसी से न जूझना पड़े।
वन विभाग की अपील और आगे की रणनीति
वन विभाग ने आसपास के तमाम गांवों के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया है। विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी व्यक्ति जंगल की तरफ न जाए और न ही हाथियों के झुंड के करीब जाने की कोशिश करे। सेल्फी लेने या वीडियो बनाने के चक्कर में लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, जिसे लेकर प्रशासन सख्त हो गया है।
विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का दल लगातार ड्रोन कैमरों की मदद से हाथियों की लोकेशन ट्रैक कर रहा है। जैसे ही हाथी घने जंगलों की तरफ रुख करेंगे, स्थिति की समीक्षा के बाद ग्रामीणों को वापस उनके घरों में लौटने की अनुमति दी जाएगी। फिलहाल, हालात नियंत्रण में हैं लेकिन एहतियात के तौर पर अगले 24 से 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।