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दिवाली पर सिर्फ घर क्यों? इन 7 आदतों की भी कर दें ‘सफाई’

दिवाली पर सिर्फ घर क्यों? इन 7 आदतों की भी कर दें ‘सफाई’

अक्टूबर 2026 का महीना आते ही त्योहारों की सरगर्मी शुरू हो चुकी है। हर साल की तरह इस बार भी घरों की डीप क्लीनिंग (Deep Cleaning) जोरों पर है। अलमारियों के कोने टटोले जा रहे हैं, पुराने सामान बाहर आ रहे हैं और घर को रोशन करने के लिए नई-नई लाइटें व सजावट का सामान खरीदा जा रहा है। लेकिन, क्या कभी आपने गहराई से सोचा है कि घर के कोने-कोने को चमकाने के साथ-साथ क्या हमारी अपनी कुछ पुरानी और बेकार हो चुकी आदतों की भी सफाई होनी चाहिए?

इस बार की दिवाली 2026 को बाजारवाद की अंधी दौड़ से थोड़ा बाहर निकालकर कुछ अलग और सार्थक तरीके से मनाया जा सकता है। महंगे डेकोरेशन आइटम और अंधाधुंध खरीदारी के बजाय अगर हम अपने जीवनशैली और सोच में कुछ छोटे मगर बेहद असरदार बदलाव ले आएं, तो त्योहार का असली आनंद दोगुना हो जाता है। आइए जानते हैं ऐसे सात बड़े बदलावों के बारे में, जो आपके घर और जीवन दोनों को एक नई रोशनी से भर देंगे।

1. ‘शायद कभी काम आएगा’ वाली अलमारी को दें एक नया रूप

दिवाली की सफाई का सबसे बड़ा टास्क होती है अलमारी और स्टोर रूम की सफाई। इस दौरान ऐसे दर्जनों सामान हाथ लगते हैं जिन्हें पिछले एक या दो साल से छुआ तक नहीं गया होता है। छोटे हो चुके कपड़े, पुराने बर्तन, किताबें और बच्चों के खिलौने यदि अच्छी स्थिति में हैं, तो उन्हें कचरे में फेंकने के बजाय किसी जरूरतमंद तक पहुंचाना ही बुद्धिमानी है।

इसके लिए एक सीधा नियम बनाएं—जिस वस्तु का उपयोग पिछले बारह महीनों में नहीं हुआ और निकट भविष्य में जिसकी कोई संभावना नहीं दिखती, उसे अपने घर से विदा कर दें। इससे न केवल आपके घर में अनावश्यक सामान का बोझ कम होगा, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी बढ़ेगा।

2. पुरानी साड़ियों और बोतलों से करें बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट सजावट

बाजार से हर साल नया प्लास्टिक या आर्टिफिशियल डेकोरेशन खरीदने के बजाय इस बार थोड़ा इको-फ्रेंडली (Eco-friendly) रुख अपनाएं। आपके घर में रखी पुरानी साड़ियों या भारी दुपट्टਿਆਂ के बॉर्डर से बेहद खूबसूरत तोरण बनाए जा सकते हैं। रंगीन कपड़ों के कतरनों से बंदनवार, कुशन कवर या टेबल रनर तैयार किए जा सकते हैं।

  • पुराने कांच के जैम या कॉफी जार को साफ करके उनमें फेयरी लाइट्स डालकर बेहतरीन लैंटर्न बनाए जा सकते हैं।
  • घर के पुराने मटकों या दीयों को पेंट करके उन्हें नए सिरे से इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • प्रकृति के अनुकूल यह सजावट आपके घर को एक अलग ही रॉयल और विंटेज लुक देगी।

3. ‘हर सेल और ऑफर को खरीदना है’ वाली मानसिकता पर लगाएं ब्रेक

त्योहारी सीजन आते ही ई-कॉमर्स वेबसाइट्स और बाजारों में बंपर डिस्काउंट की बाढ़ आ जाती है। भारी छूट देखकर ऐसी चीजें खरीद लेना बहुत आसान है, जिनकी हमें असल जिंदगी में कोई जरूरत ही नहीं होती। इस आदत को इस दिवाली हमेशा के लिए अलविदा कहने का वक्त आ गया है।

शॉपिंग करने से पहले खुद से तीन बुनियादी सवाल जरूर पूछें:

  • क्या मुझे वास्तव में इस वस्तु की जरूरत है?
  • क्या घर में इसका कोई बेहतर विकल्प पहले से मौजूद है?
  • क्या मैं इसे सिर्फ इसलिए खरीद रहा/रही हूँ क्योंकि इस पर भारी डिस्काउंट मिल रहा है?

यदि इनमें से दो सवालों के जवाब न में हों, तो उस सामान को अपने ऑनलाइन शॉपिंग कार्ट से तुरंत हटा दें।

4. मिठाई के डिब्बों और गिफ्ट बैग्स को रीसायकल करें

दीपावली के बाद घरों में आकर्षक मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स के महंगे डिब्बों का अंबार लग जाता है। कुछ दिनों बाद ये डिब्बे कूड़ेदान की शोभा बढ़ाते हैं। इस बार थोड़ी सी रचनात्मकता दिखाइए। इन मजबूत डिब्बों को साफ करके इनमें बच्चों की स्टेशनरी, सिलाई का सामान, दवाइयां या मेकअप का सामान व्यवस्थित तरीके से रखा जा सकता है। अच्छी क्वालिटी के गिफ्ट बैग्स को संभालकर रखें ताकि अगली बार किसी को उपहार देते वक्त उनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।5. डिजिटल डिटॉक्स: इस दिवाली एक शाम स्क्रीन से दूरी, अपनों के करीब

त्योहार का मतलब अब सिर्फ सोशल मीडिया पर डालने के लिए बेहतरीन रील्स और तस्वीरें खींचना भर रह गया है। इस दिवाली इस ट्रेंड को थोड़ा बदलें। परिवार के साथ मिलकर तय करें कि शाम के कम से कम दो घंटे कोई भी स्मार्टफोन या टैबलेट हाथ में नहीं लेगा।

इस दौरान सब मिलकर रंगोली बना सकते हैं, पारंपरिक पकवानों का लुत्फ उठा सकते हैं या घर के बुजुर्गों से उनके बचपन के दिनों की दीपावली के दिलचस्प किस्से सुन सकते हैं। यकीन मानिए, तकनीक से दूर बिताए गए ये पल जीवनभर की सबसे खूबसूरत यादें बन जाएंगे।

6. ऐसी सजावट चुनें जो साल-दर-साल साथ निभाए

थर्मोकोल और प्लास्टिक की वे चीजें जो एक ही रात में टूट-फूट जाती हैं, पर्यावरण के साथ-साथ आपके बजट पर भी भारी पड़ती हैं। इस बार सजावट के लिए टिकाऊ विकल्पों को प्राथमिकता दें। पीतल या तांबे के दीये, मिट्टी के पारंपरिक बर्तन, ठोस लकड़ी के डेकोरेशन पीस और फैब्रिक से बने झालरें ऐसी चीजें हैं जो सालों-साल चलती हैं। इनसे हर साल नया सामान खरीदने का खर्च भी बचेगा और कचरा भी कम उत्पन्न होगा।

7. घर के साथ-साथ अपने रिश्तों की भी करें मन की सफाई

दिवाली सिर्फ घर की लिपाई-पुताई का नाम नहीं है, यह मन के मैल को धोने और पुरानी कटुता को भुलाने का भी पर्व है। यदि किसी रिश्तेदार, मित्र या पड़ोसी से किसी छोटी-सी बात पर लंबे समय से बोलचाल बंद है, तो इस पावन अवसर पर पहल करें। एक छोटा सा शुभकामना संदेश या एक अदद फोन कॉल रिश्तों में जमी बर्फ को पिघला सकती है। हो सकता है कि आपका यह छोटा सा कदम एक पुराने रिश्ते को हमेशा के लिए पुनर्जीवित कर दे।

बच्चों के लिए शुरू करें एक सुंदर परंपरा: 'एक दीया, एक अच्छी आदत'

इस बार बच्चों को सिर्फ पटाखों या मिठाइयों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें जीवन के मूल्य सिखाएं। परिवार का हर सदस्य एक कागज की पर्ची पर वह अच्छी आदत लिखे जिसे वह आने वाले साल में अपने अंदर उतारना चाहता है—जैसे पानी की बर्बादी रोकना, हर रोज कुछ पन्ने पढ़ना, बुजुर्गों की मदद करना या स्क्रीन टाइम कम करना।

इन पर्चियों को संभालकर एक सुरक्षित जगह पर रख दें। अगली दिवाली 2027 में इन्हें दोबारा खोलकर देखें कि आपने अपने संकल्प को कितना पूरा किया। यह गतिविधि बच्चों के मानसिक और नैतिक विकास के लिए अद्भुत साबित होगी।

निष्कर्ष

घर के बाहर रंग-बिरंगी झालरें और सैकड़ों लाइटें लगा देने से मकान रोशन हो सकता है, लेकिन असली दिवाली तब मन के भीतर उतरती है जब हमारे व्यवहार और आदतों में सकारात्मक बदलाव आता है। इस बार जब आपकी घरों की सफाई का दौर पूरा हो जाए, तो खुद से बस एक छोटा सा सवाल जरूर पूछें—'ऐसी कौन सी आदत है जिसे मुझे इस दिवाली यहीं छोड़ देना चाहिए?' इस सवाल का जवाब ही आपके जीवन की सबसे बड़ी रोशनी बनेगा।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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