बाजार से सीधे मेडिकल स्टोर पर जाकर अपनी मर्जी से दवा खरीद लेना और खा लेना अब आपको बहुत भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य और सुरक्षा के मोर्चे पर एक बेहद गंभीर और जरूरी अपडेट सामने आया है। देश के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने दवाओं के अंधाधुंध और बेलगाम इस्तेमाल पर लगाम कसने के लिए बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं। अक्सर लोग मामूली सिरदर्द, बदन दर्द या सर्दी-जुकाम होने पर खुद ही डॉक्टर बन जाते हैं और केमिस्ट की दुकान से बिना किसी वैध पर्चे (Prescription) के धड़ल्ले से पेनकिलर और एंटीबायोटिक्स खरीदकर खा लेते हैं। लेकिन अब यह लापरवाही आपकी सेहत के लिए घातक साबित हो सकती है।
कड़े नियमों की क्यों पड़ी जरूरत?
हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिसर्च में यह बात खुलकर सामने आई है कि लोग बिना डॉक्टर की सलाह के मनमाने तरीके से दवाइयों का सेवन कर रहे हैं। विशेष तौर पर एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) और स्ट्रॉन्ग पेनकिलर्स (Painkillers) का ओवर-द-काउंटर यानी बिना पर्ची के मिलने वाला चलन देश में तेजी से बढ़ा है। इसके परिणाम बेहद डरावने आ रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को भांपते हुए ही ड्रग्स कंट्रोलर ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियामकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर्स की कड़ी निगरानी करें।
अब नियम के मुताबिक, कोई भी मेडिकल स्टोर संचालक या फार्मासिस्ट किसी भी ग्राहक को डॉक्टर के वैध नुस्खे के बिना एंटीबायोटिक्स या दर्द निवारक दवाएं नहीं बेच पाएगा। यदि कोई केमिस्ट इस नियम का उल्लंघन करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ भारी जुर्माने से लेकर लाइसेंस रद्द करने तक की कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
किडनी और लिवर पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा
नेफ्रोलॉजिस्ट और जनरल फिजिशियन लगातार इस बात की चेतावनी देते रहे हैं कि बिना डॉक्टर की देखरेख के ली जाने वाली पेनकिलर दवाइयां सीधे तौर पर हमारी किडनी पर हमला करती हैं। जब आप बिना सोचे-समझे लगातार ऐसी दवाइयां खाते हैं, तो किडनी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। धीरे-धीरे किडनी के फिल्टर करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है और नौबत किडनी फेलियर (Kidney Failure) तक पहुंच जाती है।
- लिवर की क्षति: कई दर्द निवारक दवाएं और एंटीबायोटिक्स लिवर की कोशिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे हेपेटाइटिस या लिवर फेलियर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
- दवाओं का असर बेअसर होना (Antimicrobial Resistance): एंटीबायोटिक्स का बिना जरूरत और अधूरा कोर्स करने से शरीर के बैक्टीरिया उन दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट हो जाते हैं। भविष्य में जब वास्तव में उस एंटीबायोटिक की जरूरत होती है, तो वह शरीर पर असर करना बंद कर देती है।
- गैस्ट्रिक अल्सर और ब्लीडिंग: लगातार पेनकिलर खाने से पेट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचता है, जिससे गंभीर अल्सर और ब्लीडिंग की शिकायत हो सकती है।
आम जनता के लिए क्या है सलाह?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ तौर पर कहना है कि हर बीमारी और उसका शरीर पर असर अलग होता है। जो दवा आपके किसी रिश्तेदार या पड़ोसी को किसी बीमारी में फायदा कर गई, जरूरी नहीं कि वह आपके शरीर के लिए भी उतनी ही सुरक्षित हो। इसलिए किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या होने पर हमेशा एक योग्य और रजिस्टर्ड डॉक्टर से ही परामर्श करें। डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों को अच्छी तरह जांचने के बाद ही सही दवा और उसकी खुराक तय करते हैं।
केमिस्टों और मेडिकल संचालकों की भी बढ़ेगी जवाबदेही
इस नए अभियान के तहत अब दवा विक्रेताओं की भी जिम्मेदारी तय कर दी गई है। केमिस्ट शॉप्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे काउंटर पर बिना डॉक्टर के मुहर और हस्ताक्षर वाले पर्चे के कोई भी शेड्यूल ड्रग (Schedule Drugs) या एंटीबायोटिक न दें। कई जगहों पर औचक निरीक्षण (Surprise Inspections) भी किए जा रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नियमों का पालन सख्ती से हो रहा है या नहीं।
निष्कर्ष
अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करना और खुद का डॉक्टर बन जाना कभी भी बुद्धिमानी नहीं है। थोड़ा सा आराम पाने के लिए खाई जाने वाली बिना पर्ची की दवाएं आपकी पूरी जिंदगी को खतरे में डाल सकती हैं। इसलिए सतर्क रहें, जागरूक रहें और हमेशा डॉक्टर की सलाह के बाद ही किसी दवा का सेवन करें। स्वस्थ शरीर ही असली पूंजी है, इसे छोटी-छोटी लापरवाहियों से दांव पर न लगाएं।