जापान के आइची-नगोया में जारी एशियाई खेल-2026 के एथलेटिक्स ट्रैक से भारत के लिए एक बेहद गर्व करने वाली खबर सामने आई है। देश के स्टार लॉन्ग डिस्टेंस रनर गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ स्पर्धा में अपने पुराने प्रदर्शन में सुधार करते हुए रजत पदक (Silver Medal) पर कब्जा जमाया है। गुलवीर की इस शानदार उपलब्धि से पूरे देश में जश्न का माहौल है और खेल प्रेमियों द्वारा उन्हें लगातार बधाइयां दी जा रही हैं।
कड़े मुकाबले में दिखाया दम, बहरीन के धावकों को दी कड़ी टक्कर
टॉप्स (TOPS) कोर एथलीट गुलवीर सिंह ने फाइनल रेस के दौरान अपनी रणनीति और स्टेमिना का बेहतरीन नमूना पेश किया। उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण रेस को 28 मिनट 29.38 सेकंड में पूरा कर दूसरा स्थान हासिल किया। हालांकि, स्वर्ण पदक (Gold Medal) के लिए बहरीन के धावक बिरहानु बालेव और गुलवीर के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली।
बहरीन के बिरहानु बालेव ने 28 मिनट 27.51 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं, बहरीन के ही एक अन्य एथलीट अल्बर्ट किप्टू ने 28 मिनट 34.38 सेकंड का समय लेते हुए कांस्य (Bronze Medal) पदक जीता। गुलवीर सिंह के इस रजत पदक के साथ ही भारत ने एशियाई खेलों की इस प्रतिष्ठित स्पर्धा में अपनी साख को और मजबूत कर लिया है।
लगातार दूसरी बार पोडियम पर तिरंगा
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इसके साथ ही भारत ने एशियाई खेलों की पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में लगातार दूसरी बार पदक अपने नाम किया है। इससे पहले, हांगझोउ में आयोजित पिछले एशियाई खेलों में भी गुलवीर ने इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इस बार अपने प्रदर्शन का स्तर ऊंचा उठाते हुए उन्होंने कांस्य से रजत तक का सफर तय किया है, जो उनकी निरंतर मेहनत और अनुशासन को दर्शाता है।
गांव की पगडंडियों से ग्लोबल पोडियम तक का प्रेरणादायक सफर
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के एक छोटे से गांव सिरसा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश का नाम रोशन करने वाले गुलवीर सिंह की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। वर्तमान में वह भारतीय सेना में 'नायब सूबेदार' के पद पर देश की सेवा कर रहे हैं।
साल 2018 में ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट का हिस्सा बनने वाले गुलवीर ने अपनी फौज की तैयारी के शुरुआती दिनों में गांव की कच्ची सड़कों और खेतों की पगडंडियों पर नंगे पांव दौड़ लगाकर प्रैक्टिस की थी। सेना में भर्ती होने के बाद उन्हें अपने हुकूम को तराशने का सही प्लेटफॉर्म मिला और उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
रिकॉर्ड्स की झड़ी: भारतीय एथलेटिक्स के नए 'सुपरमैन'
गुलवीर सिंह का पिछले कुछ सालों का प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। उनके नाम कई बड़े और ऐतिहासिक राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज हैं:
- राष्ट्रीय रिकॉर्ड: गुलवीर के नाम 5000 मीटर, 10,000 मीटर, एक मील और हाफ मैराथन में भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज हैं।
- ऐतिहासिक मील दौड़: वर्ष 2025 में वह चार मिनट से कम समय में एक मील की दौड़ पूरी करने वाले इतिहास के पहले भारतीय बने थे, जहां उन्होंने 3:55.63 मिनट का वक्त निकाला था।
- हाफ मैराथन कमाल: इसी साल उन्होंने 59:42 मिनट में हाफ मैराथन पूरी करके एक घंटे से कम समय में यह दूरी तय करने वाले पहले भारतीय होने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।
- एशियाई रिकॉर्ड: इनडोर 5000 मीटर दौड़ में 12:59.77 मिनट का समय निकालकर उन्होंने 13 मिनट से कम समय में इस रेस को पूरा करने वाले पहले एशियाई एथलीट बनने का गौरव भी हासिल किया था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम
गुलवीर सिंह ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर ग्लोबल मंच पर कई मेडल जीते हैं। साल 2023 की एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप (5000 मीटर कांस्य) से शुरू हुआ उनका सफर साल 2025 में दक्षिण कोरिया के गुमी में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदकों की बरसात तक पहुंचा, जहां उन्होंने 5000 और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में सोना जीता था। इसके अलावा, राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए मेडल बटोरे हैं।
विशेष ट्रेनिंग और भविष्य की राह
अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को लगातार शीर्ष स्तर पर बनाए रखने के लिए गुलवीर अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स स्थित विश्व प्रसिद्ध हाई-परफॉर्मेंस सेंटर में विशेष प्रशिक्षण लेते हैं। वहां की आधुनिक सुविधाएं और कठिन ट्रेनिंग शिड्यूल उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धावकों से मुकाबला करने के लिए तैयार करते हैं।
एशियाई खेल-2026 में जीता गया यह रजत पदक केवल एक मेडल नहीं है, बल्कि यह उन तमाम युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत के दम पर आसमान छूने का सपना देखते हैं। गुलवीर सिंह की यह सफलता यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों और पसीना बहाने से डर न लगे, तो गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ सफर दुनिया के सबसे बड़े खेल स्टेडियमों के पोडियम तक जरूर पहुंचता है।