क्या आपने कभी सोचा है कि दो पड़ोसी देशों के बीच बहने वाली नदियां सिर्फ पानी का जरिया होती हैं, या फिर वे कूटनीति, राजनीति और भावनाओं का एक ऐसा समंदर होती हैं, जिसमें कूटनीतिक रिश्ते भी तैरते हैं? आज भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तीस्ता नदी का पानी एक ऐसा ही अनसुलझा सवाल बन चुका है, जिस पर नई दिल्ली से लेकर ढाका तक सियासी पारा अक्सर चढ़ता रहता है।
हाल ही में विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर बात की है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि तीस्ता और अन्य जल-बंटवारे के मुद्दों पर बातचीत किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि पहले से तय द्विपक्षीय संस्थाओं के माध्यम से ही आगे बढ़ाई जाएगी। आइए गहराई से समझते हैं कि आखिर इस पूरे विवाद की जड़ें कहां हैं और भारत का आधिकारिक रुख क्या कहता है।
दोनों देशों के बीच साझा हैं कुल 54 नदियां
हाल ही में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब तीस्ता नदी और बांग्लादेश के रुख को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही नपा-तुला लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया।
"बांग्लादेश और भारत के बीच कई नदियां साझा हैं। अगर सटीक आंकड़ों की बात करें, तो दोनों देशों के बीच कुल 54 नदियां एक-दूसरे की सीमाओं को पार करती हैं। जल से संबंधित कोई भी सहयोग या चर्चा, जो दोनों देशों के मध्य होनी है, वह द्विपक्षीय 'संयुक्त नदी आयोग' (Joint Rivers Commission) और तय वार्ता तंत्रों के माध्यम से ही की जाएगी।" — रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय
प्रवक्ता के इस बयान से साफ है कि भारत सरकार इन सभी 54 नदियों के प्रबंधन को लेकर एक समग्र और संस्थागत दृष्टिकोण रखती है, न कि किसी एक नदी को अलग-थलग करके देखती है।
आखिर क्या है तीस्ता नदी विवाद और क्यों अटका है समझौता?
तीस्ता नदी भारत के सिक्किम राज्य से निकलती है और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहां यह ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। यह नदी दोनों देशों के लाखों किसानों और मछुआरों की आजीविका का मुख्य आधार है। लेकिन इसके पानी के बंटवारे को लेकर गतिरोध दशकों पुराना है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 की ऐतिहासिक 'गंगा जल संधि' आज भी सफलतापूर्वक काम कर रही है, जिसके तहत फरक्का बैराज पर शुष्क मौसम में पानी का बंटवारा तय होता है। लेकिन तीस्ता के मामले में सहमति नहीं बन पाई है।
- साल 2011 का वह प्रस्ताव: एक समय ऐसा भी आया था जब समझौते की उम्मीद जगी थी। साल 2011 में प्रस्तावित एक समझौते के तहत तीस्ता के पानी का 42.5 प्रतिशत हिस्सा भारत को और 37.5 प्रतिशत हिस्सा बांग्लादेश को देने की बात थी, जबकि शेष 20 प्रतिशत हिस्सा अनकहा छोड़ा गया था।
- पश्चिम बंगाल की आपत्तियां: इस समझौते के रास्ते में सबसे बड़ा राजनीतिक और भौगोलिक रोड़ा पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार का रुख रहा है। राज्य की जल आवश्यकताओं का हवाला देते हुए इस समझौते का कड़ा विरोध किया गया, जिसके चलते केंद्र सरकार इसे अंतिम रूप नहीं दे पाई।
तीस्ता नदी परियोजना पर भारत का रुख है बिल्कुल साफ
हाल के दिनों में तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और इसके पुनरुद्धार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चाएं तेज हुई हैं। चीन जैसी बाहरी ताकतों की इस क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्पी के बीच भारत की पैनी नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।
विदेश मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भारत का जो दृष्टिकोण और राष्ट्रीय हित हैं, उनसे बांग्लादेशी पक्ष को पूरी तरह अवगत करा दिया गया है। भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने के लिए हमारे पास पहले से ही पुख्ता और स्थापित तंत्र मौजूद हैं, और उन्हीं के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए।
भविष्य की राह और कूटनीतिक चुनौतियां
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते हाल के वर्षों में कई मोर्चों पर मजबूत हुए हैं—चाहे वह कनेक्टिविटी का मामला हो, व्यापार का हो या ऊर्जा सुरक्षा का। हालांकि, तीस्ता जैसे जल-बंटवारे के मसले दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील परीक्षा बने हुए हैं। आम जनता और किसानों की उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि कूटनीति के इस दौर में जल्द ही कोई ऐसा व्यावहारिक रास्ता निकलेगा जिससे दोनों देशों के हितों की रक्षा हो सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. भारत और बांग्लादेश के बीच कितनी नदियां साझा हैं?
उत्तर: भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां साझा हैं, जो दोनों देशों की सीमाओं के आर-पार बहती हैं।
Q2. तीस्ता नदी जल विवाद मुख्य रूप से क्यों अटका हुआ है?
उत्तर: तीस्ता समझौते के रास्ते में मुख्य अड़चन पश्चिम बंगाल सरकार की अपनी जल आवश्यकताएं और आपत्तियां हैं, जिसके कारण 2011 का प्रस्तावित समझौता अब तक लागू नहीं हो सका है।
Q3. जल विवादों को सुलझाने के लिए कौन सा तंत्र उपयोग किया जाता है?
उत्तर: भारत और बांग्लादेश के बीच जल संबंधी मामलों और वार्ताओं को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय 'संयुक्त नदी आयोग' (Joint Rivers Commission) का उपयोग किया जाता है।