भारतीय खेल जगत के गलियारों से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आ रही है। देश के राष्ट्रीय खेल कहे जाने वाले हॉकी में एक बार फिर अंदरूनी कलह और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। राजधानी दिल्ली की सड़कों पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब कई दिग्गज खिलाड़ी और खेल प्रेमी हॉकी प्रशासन में कथित रूप से चल रही मनमानी के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब खेल के दिग्गजों ने खुलकर सिस्टम की सफाई यानी 'क्लीन-अप' की मांग कर दी है।
'एबीसीडी कौन है पता नहीं, बन गया सेक्रेटरी...'
इस पूरे प्रदर्शन के दौरान एक बयान ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा और सोशल मीडिया से लेकर खेल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया। प्रदर्शन कर रहे दिग्गजों और खेल से जुड़े जानकारों का यह दर्द साफ झलक रहा था कि प्रशासनिक पदों पर ऐसे लोगों को बैठा दिया गया है जिनके बारे में जमीनी स्तर पर किसी को कोई जानकारी ही नहीं है। विरोध प्रदर्शन के दौरान उठी इन आवाजों ने यह साबित कर दिया है कि खिलाड़ियों और एडमिनिस्ट्रेशन के बीच का यह फासला अब बहुत ज्यादा बढ़ चुका है, जिसे पाटना बेहद जरूरी हो गया है।
हॉकी इंडिया के कामकाज के तौर-तरीकों पर लंबे समय से अंदरखाने सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब यह असंतोष खुलकर सतह पर आ गया है। देश की राजधानी में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन ने खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दिग्गजों का साफ कहना है कि यदि समय रहते भारतीय हॉकी के ढांचे को ठीक नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के प्रदर्शन पर पड़ेगा।
क्यों भड़का है यह नया बखेड़ा?
- प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी: खेल प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों का आरोप है कि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों में पारदर्शिता का अभाव है।
- योग्यता बनाम मनमानी: चयन और प्रशासनिक पदों पर अनुभवी और हकदार लोगों को नजरअंदाज किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
- खिलाड़ियों की अनदेखी: मैदान पर खून-पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों की बात सुनने वाला कोई नहीं बचा है, ऐसा प्रदर्शनकारियों का मानना है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद से हॉकी गलियारों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। पूर्व खिलाड़ियों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही इस संबंध में उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर सकता है और पूरी व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की मांग को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंप सकता है।
दिग्गजों की दो टूक: चाहिए पूरी तरह क्लीन-अप
प्रदर्शन में शामिल हुए खेल दिग्गजों का कहना है कि अब सिर्फ आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। भारतीय हॉकी को अगर वैश्विक स्तर पर अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को और मजबूत करना है, तो जड़ से सफाई करनी होगी। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और गैर-पेशेवर रवैये को खेल से बाहर का रास्ता दिखाना ही एकमात्र विकल्प बचा है।
खेल प्रेमियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस प्रदर्शन के बाद खेल प्रशासन और सरकार की तरफ से क्या कदम उठाए जाते हैं। क्या सचमुच भारतीय हॉकी को एक नई दिशा मिलेगी या यह विरोध प्रदर्शन भी कागजी बहसों में ही सिमट कर रह जाएगा? आने वाला वक्त ही यह तय करेगा कि देश के राष्ट्रीय खेल का भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा।