अंधेरे में जीने को मजबूर ग्रामीण अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख इलाके में पिछले चार दिनों से लगातार बिजली गुल रहने से आक्रोशित ग्रामीणों ने आखिरकार बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि गुस्साए लोगों ने सीधे सीताद्वार विद्युत उपकेंद्र पर धावा बोल दिया और अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक बिजली व्यवस्था बहाल नहीं होती, वे उपकेंद्र से हटने वाले नहीं हैं।
चार दिनों का अघोषित अंधेरा और उमस भरी गर्मी
आधुनिक दौर में बिजली हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में यदि किसी इलाके में चार दिनों तक बिजली न आए, तो वहां का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है। सीताद्वार उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले कई गांवों में पिछले 96 घंटों से एक यूनिट बिजली भी सप्लाई नहीं हुई है। इस भीषण गर्मी और उमस के बीच बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा बेहाल हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली न होने के कारण पीने के पानी का संकट भी गहराने लगा है, क्योंकि अधिकांश घरों में पानी की टंकियां समर्सिबल या मोटर पर निर्भर करती हैं। इसके अलावा, छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है और व्यापारियों का कामकाज ठप पड़ गया है।
अधिकारियों की उदासीनता से भड़का गुस्सा
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले चार दिनों से वे लगातार बिजली विभाग के स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों के फोन घनघना रहे हैं, लेकिन किसी की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। फोन या तो स्विच ऑफ मिलते हैं या फिर 'फॉल्ट ठीक हो रहा है' जैसी रटी-रटाई बातें कहकर कॉल काट दी जाती हैं।
इसी लचर कार्यशैली और टालमटोल रवैये से आजिज आकर ग्रामीणों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। बुधवार की सुबह सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एकजुट हुए और नारेबाजी करते हुए सीधे सीताद्वार उपकेंद्र पहुंच गए।
उपकेंद्र परिसर में डटे ग्रामीण
सीताद्वार उपकेंद्र पर पहुंचते ही ग्रामीणों ने विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। हाथों में लाठी-डंडे और बैनर-पोस्टर लेकर पहुंचे लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने उपकेंद्र के मुख्य गेट पर ही डेरा डाल दिया और धरने पर बैठ गए।
- तत्काल बिजली बहाली: ग्रामीण तुरंत ट्रांसफार्मर बदलने या फॉल्ट ठीक करने की मांग कर रहे हैं।
- अधिकारियों से वार्ता: प्रदर्शनकारी किसी जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर बुलाकर लिखित आश्वासन चाहते हैं।
- लापरवाही की जांच: स्थानीय लाइनमैन और अवर अभियंता (JE) पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
ग्रामीणों की जुबानी, दर्द की दास्तान
धरने पर बैठे एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हम पिछले चार दिनों से नरकीय जीवन जी रहे हैं। रातभर मच्छरों के काटने और उमस के बीच जागना पड़ रहा है। विभाग के लोग सिर्फ झूठे आश्वासन दे रहे हैं। अगर आज बिजली नहीं आई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।"
एक अन्य महिला गृहणी ने बताया कि घरों में रखे इनवर्टर भी पहले ही दम तोड़ चुके हैं। मोबाइल चार्ज करने तक के लिए लोगों को मीलों दूर जाना पड़ रहा है। ऐसे में गुस्सा आना स्वाभाविक है।
पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस थाने की टीम भी तुरंत मौके पर पहुंच गई। पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारी ग्रामीणों को शांत कराने और समझाने-बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक ग्रामीण अपनी जिद पर अड़े हुए थे और उनका कहना था कि जब तक उपकेंद्र से बिजली सप्लाई सुचारू नहीं होती, वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।
बिजली विभाग की सफाई
वहीं, दूसरी ओर बिजली विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इलाके में किसी मुख्य ट्रांसफार्मर या लाइन में बड़ा फॉल्ट आ गया है, जिसे दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। तकनीकी टीम लगातार फॉल्ट खोजने में जुटी है और जल्द ही आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
बहरहाल, यह स्थिति देश के ग्रामीण इलाकों में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल खोलने के लिए काफी है। एक तरफ सरकार चौबीस घंटे बिजली देने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ चार-चार दिनों तक गांवों का बत्ती गुल रहना जमीनी हकीकत को बयां करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी हस्तक्षेप कर ग्रामीणों को राहत दिलाता है।