मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर अपनी अनूठी संस्कृति और परंपराओं के लिए पूरे देश में एक अलग पहचान रखता है। यहाँ हर पर्व को मनाने का अंदाज़ कुछ ऐसा होता है कि देश-विदेश के लोग इस शहर की मेहमाननवाजी और संस्कृति को देखने चले आते हैं। बात जब अनंत चतुर्दशी के पर्व की हो, तो इंदौर का उत्साह एक अलग ही स्तर पर पहुंच जाता है। साल 2026 में भी यह ऐतिहासिक परंपरा पूरी भव्यता और उत्साह के साथ जीवंत हो उठी, जब शहर की सड़कों पर रोशनी से जगमगाती 22 से अधिक विशाल झांकियों का कारवां निकला।
103 साल पुरानी ऐतिहासिक परंपरा और जनसैलाब
इंदौर में अनंत चतुर्दशी के अवसर पर निकलने वाले इस भव्य चल समारोह का इतिहास 103 साल पुराना है। इस सदी पुरानी परंपरा को देखने के लिए इस बार भी देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु इंदौर पहुंचे। शहर की सड़कें खचाखच भरी हुई थीं और चारों तरफ उत्सव का माहौल था। हर कोई इस ऐतिहासिक क्षण को अपनी आंखों में बसा लेने के लिए बेताब नजर आ रहा था। सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच यह कारवां अपनी पूरी भव्यता के साथ आगे बढ़ा।
शाम ढलते ही जैसे ही घड़ियां शाम के 6 बजाएंगी, वैसे ही ऐतिहासिक खजराना गणेश मंदिर की झांकी के साथ इस विशाल चल समारोह का आधिकारिक आगाज हुआ। इसके बाद एक के बाद एक मिलों, सामाजिक संगठनों और संस्थानों की झांकियां इस कारवां में शामिल होती चली गईं। रात का अंधेरा जैसे-जैसे गहराता गया, वैसे-वैसे इन झांकियों की सजावट और उनकी चमक इस पर्व के उत्साह को और अधिक बढ़ाती चली गई।खजराना गणेश की झांकी से हुआ भव्य आगाज
परंपरा के मुताबिक, इस बार भी चल समारोह की कमान खजराना गणेश मंदिर की झांकी के हाथों में रही। रात करीब 11 बजे यह मुख्य झांकी जब बंबई बाजार चौकी पहुंची, तो वहां मौजूद जनसमूह ने गणपति बप्पा के जयकारों के साथ उसका स्वागत किया। इस बार की खजराना गणेश की झांकी में अद्भुत कलाकारी देखने को मिली। झांकी में भगवान गणेश की भव्य प्रतिकृति के साथ-साथ उन्हें चंद्रमा पर सवार दर्शाया गया था, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा।
इसके ठीक पीछे शास्त्री कॉर्नर नवयुवक मंडल, इंदौर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, होप टेक्सटाइल, कल्याण मिल, मालवा मिल, हुकुमचंद मिल, स्वदेशी मिल, राजकुमार मिल और स्पूतनिक ट्यूटोरियल एकेडमी की शानदार और विशाल झांकियां कतारबद्ध होकर आगे बढ़ीं। हर एक झांकी अपने आप में अनूठी और कला का बेहतरीन नमूना थी।पौराणिक कथाओं के साथ सामाजिक संदेशों का अनूठा संगम
इस बार की झांकियों की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें केवल धार्मिक और पौराणिक कथाओं को ही नहीं, बल्कि आज के दौर के सबसे जरूरी सामाजिक संदेशों को भी बहुत ही खूबसूरती से उकेरा गया था।
- स्वदेशी मिल: यहाँ की झांकी में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर वध, भगवान शंकर और माता सती के प्रसंग के साथ-साथ समाज को जागरूक करने के लिए 'नशामुक्ति' का मजबूत संदेश दिया गया।
- कल्याण मिल: इस मिल की झांकी में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथयात्रा के दृश्यों के साथ-साथ आज की 'नारी शक्ति' को समर्पित थीम को प्रमुखता से दर्शाया गया।
- मालवा मिल: बच्चों के मनोरंजन और ज्ञान के लिए यहाँ ‘मछली जल की रानी है’ की थीम पर आधारित मनमोहक झांकी बनाई गई। इसके अलावा चंद्रमा-रोहिणी विवाह और भोलेनाथ की भव्य बारात के दृश्यों ने सबका मन मोह लिया।
- राजकुमार मिल: इस मिल द्वारा तैयार की गई मधु-कैटभ वध की झांकी करीब 80 फीट लंबी ट्रॉली पर सजाई गई थी, जिसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
- हुकुमचंद मिल: यहाँ रामायण काल के प्रसिद्ध प्रसंग—बाली-सुग्रीव युद्ध और भगवान राम द्वारा बाली वध के दृश्य को जीवंत किया गया।
- स्पूतनिक ट्यूटोरियल एकेडमी: इस संस्था की झांकी में भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े प्रसंगों को उकेरा गया। इसमें पूतना वध का दृश्य, जिसमें राक्षसी पूतना भगवान कृष्ण को दूध पिला रही है और कृष्ण उसका वध कर रहे हैं, को बेहद सजीव रूप में दिखाया गया। इसके ठीक पीछे गोवर्धन पर्वत उठाए हुए कान्हा का रूप और तीसरे हिस्से में महाभारत काल के चीरहरण यानी द्रौपदी चीरहरण के दृश्य को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रदर्शित किया गया।
इन सबके अलावा, एक विशेष झांकी में उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी इंदौरवासियों को कराए गए, जिससे पूरा माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।
अखाड़ों के उस्तादों और युवा कलाकारों के पारंपरिक करतब
इंदौर के इस चल समारोह की एक और जो सबसे बड़ी पहचान है, वह है यहाँ के पारंपरिक अखाड़े। झांकियों के आगे-आगे शहर के नामचीन अखाड़ों के पहलवान और युवा कलाकार अपने अद्भूत और साहसिक करतब दिखाते हुए चल रहे थे। कृष्णपुरा छतरी और अन्य प्रमुख मार्गों पर अखाड़े के उस्तादों ने लाठी-डंडों, तलवारबाजी और अन्य पारंपरिक शस्त्र कलाओं का प्रदर्शन कर दर्शकों की सांसें थाम दीं।
खास बात यह रही कि इस बार के अखाड़ों में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाओं और छोटी बच्चियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बालिकाओं और महिलाओं ने जिस फुर्ती और सटीकता के साथ शस्त्र कला और लाठी के करतब दिखाए, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। इसके साथ ही, ढोल की थाप पर थिरकती और ढोल बजाती हुई युवतियों ने इस उत्सव के जोश को कई गुना बढ़ा दिया। सड़कों के दोनों किनारों पर खड़े लाखों लोगों ने तालियां बजाकर इन कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
रातभर गूंजते रहे भक्ति और उल्लास के स्वर
अनंत चतुर्दशी का यह चल समारोह केवल कुछ घंटों का खेल नहीं होता, बल्कि इंदौर के लोग इस पूरी रात को जागकर उत्सव की तरह मनाते हैं। खजराना गणेश मंदिर से शुरू हुआ यह कारवां शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए अलसुबह तक अपनी मंजिल की ओर बढ़ता रहा। हर चौराहे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। पुलिस प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवकों ने मिलकर इस विशाल आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई।
यह आयोजन एक बार फिर यह साबित कर गया कि इंदौर सिर्फ स्वच्छता के मामले में ही देश में नंबर वन नहीं है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासतों को सहेजने और उन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने के मामले में भी इसका कोई मुकाबला नहीं है। बप्पा की विदाई का यह दर्द और अगले बरस आने की उम्मीद, दोनों ही इस चल समारोह में शामिल हर एक शख्स की आंखों और चेहरों पर साफ झलक रहे थे।