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कठुआ में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग

कठुआ में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में राजनीतिक सरगर्मी उस वक्त अचानक तेज हो गई, जब जिला कांग्रेस कमेटी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर जोरदार हुंकार भरी। सोमवार, 28 सितंबर 2026 को जिला सचिवालय के बाहर हुए इस उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए।

जिला सचिवालय के बाहर उमड़ी भीड़, पुलिस के साथ हुई धक्का-मुक्की

सोमवार को पूर्वाह्न से ही कठुआ जिला सचिवालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। जिला कांग्रेस अध्यक्ष पंकज डोगरा के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में पार्टी के कई दिग्गज नेता शामिल हुए, जिनमें पूर्व सांसद चौधरी लाल सिंह और पूर्व मंत्री मनोहर लाल शर्मा की मौजूदगी ने इस आंदोलन को और आक्रामक बना दिया। हाथों में पार्टी के झंडे और तख्तियां लिए कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए।

जब प्रदर्शनकारी उग्र होकर आगे बढ़ने लगे, तो वहां तैनात सुरक्षा बलों और पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी हुई। बैरिकेड्स पार करने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। विरोध प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए एक रोष मार्च निकाला और अपनी नाराजगी दर्ज कराई।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और फैसलों पर उठाए गए गंभीर सवाल

पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद चौधरी लाल सिंह और पूर्व मंत्री मनोहर लाल शर्मा ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शासनकाल में देश की स्वायत्त और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को प्रभावित किया जा रहा है। नेताओं ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर अब देश की जनता का भरोसा डगमगाने लगा है, जिसके पीछे सत्ताधारी दल का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप है।

कांग्रेस नेताओं ने अपने दावों को पुख्ता करते हुए कहा कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों के दौरान आयोग द्वारा लिए गए कई अहम फैसलों और निर्देशों पर कम से कम 14 बार अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। इन आपत्तियों का सार्वजनिक होना इस बात का प्रमाण है कि आयोग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और कुछ खास फैसलों को लेकर आंतरिक असंतोष भी मौजूद है।

मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और पारदर्शिता पर संग्राम

पार्टी नेताओं का मुख्य फोकस मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (Revision of Electoral Rolls) में बरती जा रही कथित अनियमितताओं पर था। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सहित देश के अन्य हिस्सों में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं और पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

चौधरी लाल सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र की मूल आत्मा पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया में बसती है। यदि देश के हर पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार को ही सुरक्षित नहीं रखा जाएगा, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रह जाता। कांग्रेस ने मांग की है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दें और पिछले कुछ समय में चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे तमाम गंभीर सवालों की एक निष्पक्ष न्यायिक या उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

केंद्र सरकार पर बोला तीखा हमला, आगे भी जारी रहेगा आंदोलन

इस विरोध प्रदर्शन में केवल चुनाव आयोग ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार भी मुख्य निशाने पर रही। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार देते हुए उन्हें सत्ता से बाहर करने का आह्वान किया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष पंकज डोगरा के साथ-साथ रॉबिन शर्मा, राकेश चौधर, संजय राजदान, रविंद्र सिंह, साहिल अंडोत्रा और अध्यन शर्मा जैसे प्रमुख स्थानीय नेताओं ने भी सभा को संबोधित किया।

नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी आम जनता के अधिकारों, देश के संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा की रक्षा के लिए सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करती रहेगी। चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की धांधली या गड़बड़ी की आशंका को पूरी तरह से समाप्त करना और मतदाता सूची को पारदर्शी बनाना निर्वाचन आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसमें वर्तमान नेतृत्व विफल साबित हो रहा है।

प्रदर्शन के समापन पर कांग्रेस ने यह स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने नैतिक आधार पर इस्तीफा नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक स्तर पर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर फैलाया जाएगा।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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