सियासी गलियारों में हलचल: लालू यादव का बीजेपी पर बड़ा हमलाबिहार की राजनीति के दिग्गज और राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव एक बार फिर अपने चिर-परिचित अंदाज में नजर आए हैं। शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 की शाम को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान लालू यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बीजेपी की तुलना पौराणिक पात्र 'कंस' से करते हुए कहा कि आज की राजनीति में जो लोग सत्ता का अहंकार पाले हुए हैं, वे जनता के बीच कभी सफल नहीं हो सकते।
'जेल हमारा गुरुद्वारा है'
लालू यादव ने अपने संबोधन में कहा, 'मुझे डराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि जेल मेरे लिए कोई खौफ की जगह नहीं, बल्कि एक गुरुद्वारा है। मैंने वहां भी जनता की सेवा और संघर्ष के संकल्प लिए हैं।' लालू के इस बयान ने राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया है। वे अक्सर अपनी जेल यात्राओं को एक तपस्या के रूप में पेश करते रहे हैं।
जांच एजेंसियों पर उठाए सवाल
सीबीआई (CBI), ईडी (ED) और आयकर विभाग (IT) की लगातार हो रही कार्रवाई पर लालू यादव ने तंज कसते हुए कहा कि ये संस्थाएं अब स्वतंत्र नहीं रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन एजेंसियों का इस्तेमाल केवल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है। लालू ने कहा, 'हम इन नोटिसों और छापों से डरने वाले नहीं हैं। हम गांधी और लोहिया के रास्ते पर चलने वाले लोग हैं, जो सत्य के लिए अडिग रहते हैं।'
क्या है इस बयान के मायने?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू यादव का यह बयान आगामी चुनावों के मद्देनजर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए है। बिहार की राजनीति में लालू यादव का 'मास अपील' अभी भी बरकरार है। वे जानते हैं कि जब भी उन पर या उनके परिवार पर दबाव बढ़ता है, वे उसे सहानुभूति की लहर में बदलने का हुनर बखूबी जानते हैंबीजेपी का पलटवार
लालू यादव के इस बयान के बाद बीजेपी के नेताओं ने भी तुरंत प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, 'लालू यादव भ्रष्टाचार के पर्याय बन चुके हैं। वे कानून से बचने के लिए इसे राजनीतिक रंग दे रहे हैं। कंस और कृष्ण का उदाहरण देकर वे खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता सब जानती है।'
राजनीतिक अस्थिरता का संकेत
- साल 2026 के इस दौर में बिहार की राजनीति एक बार फिर से करवट ले रही है। लालू यादव का यह आक्रामक रुख बताता है कि आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य के बीच का तनाव और बढ़ने वाला है।सीबीआई और ईडी की सक्रियता का विपक्षी दलों पर असर।
- आरजेडी का 'जेल' कार्ड क्या जनता में सहानुभूति पैदा करेगा?
- बीजेपी के लिए बिहार में अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती।
निष्कर्ष
लालू प्रसाद यादव का यह बयान केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे झुकने वाले नहीं हैं। अब देखना यह होगा कि जनता उनके इस 'गुरुद्वारा' वाले तर्क को किस तरह लेती है। क्या यह बयान उन्हें नई ऊर्जा देगा या फिर कानूनी शिकंजा और कसता जाएगा, यह भविष्य की गर्त में है।
लगातार बदलते घटनाक्रमों पर हमारी नजर बनी रहेगी। बने रहिए हमारे साथ हर ताजा अपडेट के लिए।
।