Breaking
► PM मोदी आज करेंगे सेमीकॉन इंडिया 2026 का शंखनाद, 52 देशों के दिग्गज होंगे शामिल ► बांदा में मां के सामने नदी में समा गया 4 साल का मासूम, इलाज के लिए निकले थे घर से ► बीसीसीआई का बड़ा दांव: एशियन गेम्स से बाहर हुआ यह धुरंधर, वनडे के लिए तैयार हो रहा नया मास्टरप्लान ► हमीरपुर की बेटियां उठाएंगी लोहा, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दमखम दिखाने को तैयार ► गायकवाड़ और जडेजा की धमाकेदार वापसी, वेस्टइंडीज सीरीज के लिए टीम इंडिया घोषित ► भारतीय वनडे टीम में अचानक हुए 8 बड़े बदलाव, हैरान करने वाले फैसले ► वाराणसी सीवर विवाद: बालू भरी बोरियों पर अजय राय का तीखा हमला ► सिंगापुर के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट में 46.2% की रिकॉर्ड उछाल, एआई की मांग से चमकी अर्थव्यवस्था ► अमेरिकी संसद का बड़ा कदम: रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर लग सकता है 100% तक टैरिफ ► सिंगापुर एफ-1 रेस के पीछे का छुपा सच: सालभर क्या करते हैं मेकर्स? ► PM मोदी आज करेंगे सेमीकॉन इंडिया 2026 का शंखनाद, 52 देशों के दिग्गज होंगे शामिल ► बांदा में मां के सामने नदी में समा गया 4 साल का मासूम, इलाज के लिए निकले थे घर से ► बीसीसीआई का बड़ा दांव: एशियन गेम्स से बाहर हुआ यह धुरंधर, वनडे के लिए तैयार हो रहा नया मास्टरप्लान ► हमीरपुर की बेटियां उठाएंगी लोहा, राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दमखम दिखाने को तैयार ► गायकवाड़ और जडेजा की धमाकेदार वापसी, वेस्टइंडीज सीरीज के लिए टीम इंडिया घोषित ► भारतीय वनडे टीम में अचानक हुए 8 बड़े बदलाव, हैरान करने वाले फैसले ► वाराणसी सीवर विवाद: बालू भरी बोरियों पर अजय राय का तीखा हमला ► सिंगापुर के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट में 46.2% की रिकॉर्ड उछाल, एआई की मांग से चमकी अर्थव्यवस्था ► अमेरिकी संसद का बड़ा कदम: रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर लग सकता है 100% तक टैरिफ ► सिंगापुर एफ-1 रेस के पीछे का छुपा सच: सालभर क्या करते हैं मेकर्स?

मलेशियाई राजनीति में बड़ा भूचाल: अनवर इब्राहिम की सरकार पर मंडराया संकट?

मलेशियाई राजनीति में बड़ा भूचाल: अनवर इब्राहिम की सरकार पर मंडराया संकट?

कुआलालंपुर की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सरगर्मी अपने चरम पर है। मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के सामने एक बार फिर से अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की बड़ी चुनौती आन खड़ी हुई है। देश के राजनीतिक समीकरणों में आए अचानक बदलाव ने विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। सत्ता के गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम अपनी गठबंधन सरकार को बचा पाने में कामयाब होंगे या फिर देश को जल्द ही किसी बड़े राजनीतिक उलटफेर का सामना करना पड़ेगा?

यूएमएनओ प्रमुख ज़ाहिद की बढ़ती महत्वाकांक्षाएं

मलेशियाई राजनीति के जानकारों का मानना है कि यूनाइटेड मलय नेशनल ऑर्गनाइजेशन (UMNO) के प्रमुख और देश के उप प्रधानमंत्री अहमद ज़ाहिद हमीदी पूरी तरह से आश्वस्त नजर आ रहे हैं कि राजनीतिक हवा अब उनके पक्ष में बह रही है। ज़ाहिद और उनके खेमे की ओर से लगातार यह दबाव बनाया जा रहा है कि देश में जल्द से जल्द आम चुनाव (General Election) कराए जाएं। ज़ाहिद का यह आकलन है कि मौजूदा समय में उनके दल और उनके व्यक्तिगत राजनीतिक समीकरणों के लिए जनता का रुख अनुकूल हो चुका है।

हालांकि, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है। यदि वे अपने उप प्रधानमंत्री की इस मांग के आगे झुक जाते हैं, तो उनकी सरकार का कार्यकाल समय से पहले ही समाप्त हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर, यदि वे इस दबाव का डटकर मुकाबला करते हैं और चुनाव टालने में सफल रहते हैं, तो वे कुछ और समय जरूर खरीद सकते हैं, लेकिन इससे आंतरिक कलह और गहरी हो सकती है।

विशेषज्ञों की क्या है राय?

प्रसिद्ध एशियाई अध्ययन प्रोफेसर जेम्स चिन (James Chin) का कहना है कि अनवर इब्राहिम के पास समय खरीदने का विकल्प तो है, बशर्ते वे अपने डिप्टी के आक्रामक रुख का मजबूती से प्रतिरोध कर सकें। लेकिन केवल समय खरीदना ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। प्रोफेसर चिन के अनुसार, प्रधानमंत्री को इस राजनीतिक गतिरोध को तोड़ने के लिए कोई ठोस और व्यावहारिक रास्ता निकालना ही होगा, अन्यथा यह अंततः गठबंधन सरकार के पतन का कारण बन सकता है।

मलेशिया की राजनीति हमेशा से गठबंधनों और जोड़-तोड़ की राजनीति रही है। यहाँ किसी एक दल के लिए अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करना बेहद कठिन कार्य रहा है। अनवर इब्राहिम ने जब सत्ता संभाली थी, तो उन्होंने देश को स्थिरता देने का वादा किया था। लेकिन उनके मंत्रिमंडल के भीतर ही जब इस प्रकार की आंतरिक खींचतान शुरू हो जाए, तो शासन चलाना और आर्थिक सुधारों को लागू करना दोनों ही काम बेहद पेचीदा हो जाते हैं।

आगे क्या हो सकता है? राजनीतिक भविष्य के कयास

  • समय से पहले चुनाव: यदि ज़ाहिद का दबाव काम आता है, तो मलेशिया को तय समय से पहले ही चुनावी मैदान में उतरना पड़ सकता है।
  • गठबंधन में दरार: वर्तमान सत्ताधारी गठबंधन के भीतर आपसी अविश्वास बढ़ रहा है, जिसका सीधा फायदा विपक्षी दलों को मिल सकता है।
  • नीतिगत瘫्दी (Policy Paralysis): राजनीतिक अनिश्चितता के कारण देश में आर्थिक सुधार और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले अटक सकते हैं।

जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

इस चल रही राजनीतिक रस्साकसी का सबसे बुरा असर आम जनता और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। निवेशकों के मन में अनिश्चितता का माहौल बन रहा है। जब देश की शीर्ष लीडरशिप आपसी सत्ता संघर्ष में उलझी हो, तो विदेशी निवेशक भी अपने कदम पीछे खींचने लगते हैं। बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच मलेशियाई अवाम को एक स्थिर सरकार की सख्त जरूरत है, लेकिन राजनीतिक दल अपनी व्यक्तिगत और दलीय महत्वाकांक्षाओं को प्राथमिकता देते नजर आ रहे हैं.

निष्कर्ष

आने वाले कुछ हफ्ते मलेशियाई राजनीति के लिहाज से बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम अपनी राजनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए इस संकट से कैसे पार पाते हैं, यह देखने वाली बात होगी। क्या वे अपने गठबंधन को एकजुट रख पाएंगे या फिर ज़ाहिद हमीदी की रणनीति सफल होगी? इन तमाम सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही मिल सकेंगे, लेकिन इतना तय है कि मलेशियाई सियासत में रोमांच का दौर अभी थमता नजर नहीं आ रहा है।

About the Author

ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor (विदेश खबरें)

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

Read More

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →