बिहार के रेल यात्रियों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आ रही है। राजधानी पटना के मोकामा क्षेत्र में गंगा नदी पर बने ऐतिहासिक राजेंद्र पुल के समानांतर तैयार किए गए बिल्कुल नए रेल पुल पर आगामी 5 अक्टूबर यानी सोमवार से ट्रेनों का नियमित परिचालन शुरू होने जा रहा है। इस नए पुल के शुरू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच का रेल संपर्क न केवल अधिक मजबूत होगा, बल्कि यात्रियों को आवागमन में भी अभूतपूर्व सहूलियत मिलेगी।
कठोर सुरक्षा जांच के बाद हरी झंडी
किसी भी नए रेल मार्ग या पुल को जनता के लिए खोलने से पहले उसकी सुरक्षा मानकों की कड़ी परीक्षा ली जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत, रेल संरक्षा आयुक्त (CRS - Commission of Railway Safety), पूर्वी सर्किल, कोलकाता, गुरु प्रकाश ने इस नए पुल का विस्तृत और बारीकी से निरीक्षण किया। शनिवार को शुरू हुआ यह निरीक्षण दो दिनों तक यानी 3 और 4 अक्टूबर तक चला।
निरीक्षण के पहले दिन रेल संरक्षा आयुक्त ने मोटर ट्राली पर सवार होकर राजेंद्र पुल और हाथीदह ऊपर के बीच स्थित मुख्य पुल की पूर्वी लाइन का जायजा लिया। इसके बाद, हाथीदह ऊपर से लेकर रामपुर डुमरा के बीच हावड़ा छोर (हावड़ा एंड) की तरफ बनाए गए नए वायाडक्ट-1 तक रेल संरचना, पटरियों (Tracks) और सिग्नलिंग व्यवस्था का गहनता से मुआयना किया गया। इस दौरान रेलवे के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे, जिनमें मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण/दक्षिण) राजीव गुप्ता और मंडल रेल प्रबंधक (दानापुर) विनोद कुमार प्रमुख रूप से शामिल थे।
अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हुआ मोकामा-रामपुर डुमरा रेलखंड
यह केवल एक नया पुल बनने भर की कहानी नहीं है, बल्कि इसके साथ ही पूरे रेलखंड की तकनीकी क्षमता को भी कई गुना बढ़ा दिया गया है। शनिवार को मोकामा-रामपुर डुमरा रेलखंड पर रेल परिचालन की दक्षता और सुरक्षा (Safety) को पुख्ता करने की दिशा में कई बड़े मील के पत्थर हासिल किए गए।
- लगभग 13 किलोमीटर का क्षेत्र अपग्रेडेड: इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत करीब 13 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है।
- इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की कमिश्निंग: टाल, हाथीदह और रामपुर डुमरा स्टेशनों पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम की शुरुआत कर दी गई है। इससे ट्रेनों के आवागमन में भारी दक्षता और विश्वसनीयता आएगी।
- लेवल क्रॉसिंग गेट्स की सुरक्षा: दो महत्वपूर्ण लेवल क्रॉसिंग गेटों की इंटरलॉकिंग पूरी कर ली गई है, जिससे रेल और सड़क दोनों ही माध्यमों से सफर करने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम: इस रूट पर ऑटो सिग्नलिंग शुरू होने से ट्रेनों के संचालन का प्रबंधन बेहतर होगा और उपलब्ध पटरियों की क्षमता का अधिकतम व प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा।
उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच घटेगी दूरियां
भौगोलिक रूप से बिहार को दो हिस्सों में बांटने वाली गंगा नदी पर यातायात हमेशा से एक अहम चुनौती और प्राथमिकता रहा है। राजेंद्र पुल पर लंबे समय से अत्यधिक दबाव बना हुआ था, जिसके विकल्प के रूप में इस नए समानांतर रेल पुल का निर्माण किया गया है। विद्युतीकरण (Electrification) और दोहरीकरण (Doubling) के कार्यों से लैस इस पुल के शुरू हो जाने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों दोनों की ही रफ्तार और संख्या में इजाफा होगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए रूट के शुरू होने से ट्रेनों को लंबे समय तकआउटर पर खड़े रहने की समस्या से निजात मिलेगी और समय की भारी बचत होगी। दानापुर मंडल के अंतर्गत आने वाले इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के पूरा होने से न केवल स्थानीय व्यापार और आवागमन को गति मिलेगी, बल्कि पूर्व मध्य रेल के इस व्यस्त रूट पर ट्रेनों की लेटलतीफी की समस्या पर भी लगाम लगेगी।
यात्रियों के लिए क्या है खास?
यदि आप भी उत्तर बिहार से दक्षिण बिहार की ओर यात्रा करते हैं या इसके विपरीत मोकामा के रास्ते गुजरने वाली ट्रेनों का उपयोग करते हैं, तो 5 अक्टूबर से आपकी यात्रा का अनुभव काफी हद तक बदल जाने वाला है। रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा और संरक्षा के सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को राष्ट्र को समर्पित करने का निर्णय लिया है। रविवार को अंतिम चरण के तकनीकी परीक्षण के बाद, सोमवार सुबह से इस नए पुल पर पहली ट्रेन की सीटी गूंजने की पूरी तैयारी कर ली गई है।