कभी मध्य प्रदेश के कृषि उद्योग की रीढ़ कहे जाने वाले मुरैना जिले के कैलारस शक्कर कारखाने को बचाने की जिद अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। कारखाने को दोबारा शुरू कराने और इसकी संपत्तियों के हस्तांतरण के विरोध में बैठे विधायक पंकज उपाध्याय का आमरण अनशन आज चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। लगातार चार दिनों से सिर्फ पानी के सहारे अनशन पर डटे विधायक की सेहत अब तेजी से जवाब देने लगी है, जिससे उनके समर्थकों और स्थानीय किसानों में गहरी चिंता और आक्रोश का माहौल है।
चौथे दिन बिगड़ी तबीयत, शुगर कम और बीपी हाई
लगातार चार दिनों तक अन्न का एक भी दाना ग्रहण न करने के कारण विधायक पंकज उपाध्याय के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ना लाजिमी था। गुरुवार को मिली जानकारी के मुताबिक, उनका शुगर लेवल खतरनाक रूप से कम हो गया है, जबकि ब्लड प्रेशर (BP) काफी बढ़ गया है। शरीर में कमजोरी और स्वास्थ्य में आ रही इस गिरावट के बाद डॉक्टरों की एक विशेष टीम आनन-फानन में अनशन स्थल पर पहुंची और उनका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया।
दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि अनशन के शुरुआती चार दिनों तक शासन-प्रशासन की ओर से कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सुधि लेने नहीं पहुंचा। स्थानीय नागरिकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में इस प्रशासनिक उदासीनता को लेकर भारी गुस्सा है। हालांकि, तबीयत बिगड़ने के बाद चिकित्सा दल ने अपनी निगरानी शुरू कर दी है, लेकिन विधायक अपनी जिद और किसानों के हक की लड़ाई पर अब भी अडिग हैं।
क्या है पूरा विवाद और मांगें?
आखिर क्यों एक जनप्रतिनिधि को अपनी जान दांव पर लगानी पड़ रही है? इस सवाल के जवाब में स्थानीय किसान बताते हैं कि कैलारस शक्कर कारखाना इस पूरे इलाके की आर्थिक स्थिति की धुरी रहा है। मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- बंद पड़े कैलारस शक्कर कारखाने को तत्काल प्रभाव से दोबारा शुरू किया जाए। कारखाने से जुड़ी अमूल्य संपत्तियों के किसी भी तरह के हस्तांतरण (Transfer) पर तुरंत रोक लगाई जाए। क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसानों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
दिग्गज नेताओं का मिला समर्थन, सरकार पर बढ़ा दबाव
जैसे-जैसे अनशन के दिन बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे इस आंदोलन को प्रांतीय स्तर पर ताकत मिलती जा रही है। आंदोलन के चौथे दिन समर्थन देने वालों का तांता लग गया। राघौगढ़ के विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह, विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा, मुरैना विधायक दिनेश गुर्जर, पूर्व विधायक बैजनाथ कुशवाह और राधेलाल बघेल समेत कई दिग्गज नेता अनशन स्थल पर पहुंचे और विधायक पंकज उपाध्याय से मुलाकात कर अपना समर्थन जाहिर किया।
"यह लड़ाई सिर्फ एक विधायक की नहीं, बल्कि मुरैना के हज़ारों किसानों के पेट की है। कैलारस और राघौगढ़ शक्कर कारखानों से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को हम विधानसभा से लेकर मुख्यमंत्री के दरबार तक पुरजोर तरीके से उठाएंगे। सरकार को किसानों की मांगें माननी ही होंगी।" - जयवर्धन सिंह, पूर्व मंत्री एवं विधायक
वहीं, विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा ने कहा कि इस आंदोलन में अब सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी किसान जुड़ रहे हैं। नेताओं ने एक सुर में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन पूरे मध्य प्रदेश में आग की तरह फैल जाएगा।
प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी निगाहें
चौथे दिन स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है। क्या सरकार किसानों की सुध लेते हुए कारखाना शुरू करने का कोई ठोस आश्वासन देगी या फिर यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले लेगा? फिलहाल, मेडिकल टीम विधायक के स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन राजनीतिक पारा लगातार उफान पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. विधायक पंकज उपाध्याय क्यों आमरण अनशन पर बैठे हैं?
विधायक पंकज उपाध्याय मुरैना के बंद पड़े कैलारस शक्कर कारखाने को फिर से शुरू कराने और इसकी संपत्तियों के हस्तांतरण का विरोध करने के लिए आमरण अनशन पर बैठे हैं।
2. अनशन के दौरान विधायक की सेहत पर क्या असर पड़ा है?
लगातार चार दिनों तक उपवास रखने के कारण उनका शुगर लेवल काफी कम हो गया है और ब्लड प्रेशर बढ़ गया है, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया है।
3. इस आंदोलन को किन बड़े नेताओं का समर्थन मिला है?
इस आंदोलन को पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह, विधायक मुकेश मल्होत्रा, विधायक दिनेश गुर्जर सहित कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं और स्थानीय किसानों का समर्थन मिला है।