शतरंज की बिसात पर जब एक 5 साल की छोटी बच्ची ने कदम रखा था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि वह नागपुर की गलियों से निकलकर दुनिया के नक्शे पर भारत का परचम लहरा देगी। आज खेल जगत से एक बेहद गर्व और उत्साह से भरी खबर सामने आई है। नागपुर की शान और देश की स्टार चेस खिलाड़ी दिव्या देशमुख (Divya Deshmukh) को प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड (Arjuna Award 2025) के लिए चुना गया है। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार और महाराष्ट्र के लिए, बल्कि पूरे देश के खेल प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।
महज 5 साल की उम्र से शुरू हुआ था सफर
9 दिसंबर 2005 को नागपुर में जन्मीं दिव्या जितेंद्र देशमुख की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। बचपन में उन्होंने शौक के तौर पर खेल की दुनिया में कदम रखा था, लेकिन उनकी पैनी नजर और खेल के प्रति गजब की समझ ने उन्हें बाकियों से अलग कर दिया। साल 2013 का वह दौर जब उन्होंने नेशनल अंडर-9 चैंपियनशिप में हिस्सा लिया, वहां शुरुआती दौर में उन्हें कुछ हार का सामना करना पड़ा। लेकिन एक सच्चे योद्धा की तरह उन्होंने जोरदार वापसी की और 11 में से 9.5 अंक हासिल कर पहला बड़ा खिताब अपने नाम किया।
इसके बाद दिव्या ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका विजय रथ चल पड़ा:
- 2014 और 2015: लगातार दो बार वर्ल्ड यूथ अंडर-10 गर्ल्स चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीता।
- 2017: वर्ल्ड कैडेट अंडर-12 का खिताब अपने नाम किया।
- 2017-2019: कॉमनवेल्थ की विभिन्न आयु-वर्ग स्पर्धाओं में लगातार स्वर्ण पदक जीते।
महामारी का दौर और ग्रैंडमास्टर बनने का सफर
पूरी दुनिया जब साल 2020 में कोरोना महामारी के कारण थम सी गई थी, तब भी दिव्या की चालें नहीं रुकीं। उन्होंने फिडे ऑनलाइन चेस ओलंपियाड में स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साल 2021 उनके करियर का एक और मील का पत्थर साबित हुआ, जब उन्होंने अंतिम डब्ल्यूजीएम नॉर्म हासिल कर भारत की 22वीं महिला ग्रैंडमास्टर होने का गौरव हासिल किया।
महज 16 साल की उम्र में 2022 में उन्होंने नेशनल विमेंस चेस चैंपियनशिप जीती और 2023 में अपने इस खिताब को सफलतापूर्वक डिफेंड भी किया। अल्माटी में एशियन कॉन्टिनेंटल विमेंस चैंपियनशिप और टाटा स्टील चेस इंडिया विमेंस रैपिड का खिताब जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे आने वाले समय की ग्लोबल चेस क्वीन हैं।
साल 2024-25 रहा सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट
दिव्या देशमुख के करियर का सबसे सुनहरा दौर साल 2024 और 2025 का रहा। फिडे वर्ल्ड जूनियर गर्ल्स चैंपियनशिप में 10/11 के शानदार स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीतने के बाद, उन्होंने बुडापेस्ट ओलंपियाड में भारतीय महिला टीम को ऐतिहासिक स्वर्ण दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इस टूर्नामेंट में उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भी बोर्ड-3 का स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
जुलाई 2025 में बातुमि में हुए फिडे महिला विश्वकप के फाइनल में जो हुआ, उसने इतिहास बदल दिया। दिव्या ने अनुभवी खिलाड़ी कोनेरू हम्पी को टाईब्रेक में 1.5-0.5 से हराकर विश्व खिताब अपने नाम किया। वह यह विश्व कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और उनकी इस स्वर्णिम सफलता ने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
नागपुर के इतिहास में जुड़ा एक और स्वर्णिम अध्याय
यह सम्मान व्यक्तिगत रूप से दिव्या के लिए ही नहीं, बल्कि उनके गृह शहर नागपुर के लिए भी ऐतिहासिक है। नागपुर की कबड्डी खिलाड़ी नीता दलवे साल 1996 में शहर की पहली महिला अर्जुन अवॉर्डी बनी थीं। इसके बाद विजय मुनिश्वर, जोगिंदर सिंह बेदी और ओजस देवतले को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला। अब दिव्या नागपुर की 5वीं और इतिहास की केवल दूसरी महिला अर्जुन अवॉर्डी बनने जा रही हैं।
पिता डॉ. जितेंद्र देशमुख की भावनाएं: बेटी की इस सफलता पर उनके पिता डॉ. जितेंद्र देशमुख ने अत्यंत गर्व महसूस करते हुए कहा, "बेटी देश का नाम आगे बढ़ा रही है, इससे बड़ी खुशी हमारे परिवार के लिए कुछ हो नहीं सकती। अर्जुन अवॉर्ड मिलना पूरे परिवार और नागपुर के लिए गौरव का पल है। विश्वभर में दिव्या की पहचान 'नागपुर की बेटी' के रूप में है, यही हमारे लिए सबसे बड़ी बात है।" (फिलहाल दिव्या अमेरिका में एक टूर्नामेंट खेल रही हैं, जिसके चलते उनसे तुरंत संपर्क नहीं हो पाया है।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: दिव्या देशमुख किस खेल से जुड़ी हैं?
Ans: दिव्या देशमुख भारत की जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय शतरंज (Chess) खिलाड़ी हैं और महिला ग्रैंडमास्टर हैं।
Q2: दिव्या देशमुख को हाल ही में कौन सा प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है?
Ans: उन्हें भारत सरकार द्वारा खेल के क्षेत्र में दिए जाने वाले प्रतिष्ठित 'अर्जुन अवॉर्ड-2025' के लिए चुना गया है।
Q3: दिव्या देशमुख नागपुर की कौन सी महिला अर्जुन अवॉर्डी हैं?
Ans: वह नागपुर की कुल 5वीं और केवल दूसरी महिला अर्जुन अवॉर्डी हैं (उनसे पहले 1996 में नीता दलवे को यह सम्मान मिला था)।