क्रिकेट के मैदान पर कई बार ऐसे अनोखे वाकये देखने को मिल जाते हैं, जिन पर तुरंत विश्वास करना मुश्किल होता है। खेल के नियम और मैदान की परिस्थितियां कभी-कभी खिलाड़ियों के सबसे बेहतरीन प्रयासों पर भी पानी फेर देती हैं। ऐसा ही कुछ नजारा भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले जा रहे पहले एकदिवसीय मुकाबले में देखने को मिला, जहां युवा ऑलराउंडर नमन धीर अपने इंटरनेशनल डेब्यू को यादगार बनाने से बाल-बाल चूक गए। पंजाब के इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी ने अपनी गेंदबाजी से बल्लेबाज को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था, गिल्लियां हवा में उड़ चुकी थीं, लेकिन फिर भी स्कोरबोर्ड पर विकेट के आगे शून्य ही दर्ज रहा।
शुभमन गिल ने सौंपी थी डेब्यू कैप
घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाने वाले नमन धीर के लिए यह दिन बेहद खास था। मैच की शुरुआत से पहले जब कप्तान शुभमन गिल ने उन्हें भारत की वनडे कैप सौंपी, तो उनकी आंखों में चमक और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा साफ झलक रहा था। प्लेइंग इलेवन में शामिल किए जाने के बाद हर किसी की नजरें इस युवा ऑलराउंडर पर टिकी थीं कि वह अपने पहले ही मैच में किस तरह का प्रभाव छोड़ते हैं।
जब क्लीन बोल्ड करने के बाद भी बल्लेबाज रह गया नाबाद
घटना वेस्टइंडीज की पारी के 12वें ओवर की है। भारतीय कप्तान ने गेंदबाजी में बदलाव करते हुए अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे नमन धीर को गेंद थमाई। नमन ने अपनी पहली तीन गेंदों पर बेहद सधी हुई गेंदबाजी की और केवल एक रन खर्च किया। इसके बाद ओवर की चौथी गेंद पर उन्होंने अपनी काबिलियत का मुजाहिरा करते हुए कैरेबियाई ओपनर जॉन कैंपबेल को गच्चा दे दिया। गेंद सीधे ऑफ स्टम्प उड़ाते हुए निकल गई और कैंपबेल पूरी तरह से क्लीन बोल्ड हो गए। उस समय जॉन कैंपबेल 33 गेंदों में 39 रनों की आक्रामक पारी खेलकर क्रीज पर टिके हुए थे।
नमन और पूरी भारतीय टीम जश्न मनाने के लिए दौड़ पड़ी, क्योंकि किसी भी गेंदबाज के लिए अपने करियर के पहले ही मैच में पहला विकेट हासिल करना एक स्वप्निल शुरुआत होती है। लेकिन, अगले ही पल अंपायर के एक फैसले ने पूरे माहौल को बदल दिया और जश्न का उत्साह मायूसियों में तब्दील होने लगा।अजीबोगरीब नियम बना रोड़ा: जानिए क्यों अंपायर ने दिया 'डेड बॉल'
आखिर ऐसा क्या हुआ कि क्लीन बोल्ड होने के बावजूद जॉन कैंपबेल को आउट नहीं दिया गया? इसके पीछे क्रिकेट के नियम और एक छोटी सी लापरवाही मुख्य वजह रही। दरअसल, जब नमन धीर अपनी रन-अप पूरी करके गेंद डिलीवर कर रहे थे, ठीक उसी समय उनकी कमर या जेब से एक तौलिया (Towel) फिसलकर मैदान पर गिर गया था।
वेस्टइंडीज के ओपनर जॉन कैंपबेल की नजरें नमन के हाथ से छूटे तौलिये और जमीन पर गिरने पर पड़ गईं। इस दृश्य से बल्लेबाज का ध्यान पूरी तरह भटक गया और वह डिलीवरी पूरी होने से पहले ही क्रीज पर पीछे हट गए। क्रिकेट के नियमों (Laws of Cricket) के मुताबिक, यदि गेंदबाज की किसी गलती या अन्य बाहरी कारण से बल्लेबाज का ध्यान क्रीज पर बाधित होता है, और बल्लेबाज शॉट खेलने से पहले ही असहज होकर पीछे हट जाता है, तो अंपायर उस गेंद को 'डेड बॉल' (Dead Ball) यानी अमान्य घोषित कर सकता है।
मैदान पर तैनात मैदानी अंपायर ने तुरंत नियमों का पालन करते हुए उस गेंद को 'डेड बॉल' करार दे दिया। नतीजतन, जॉन कैंपबेल को जीवनदान मिल गया और नमन धीर का वह शानदार डिलीवरी इतिहास के पन्नों में एक बेकार गेंद के रूप में दर्ज हो गई।
पहले मैच में कैसा रहा नमन का प्रदर्शन?
दुर्भाग्यपूर्ण वाकये के बाद हालांकि नमन धीर ने अपना हौसला नहीं खोया और अपनी गेंदबाजी पर ध्यान केंद्रित रखा। उन्होंने इस मुकाबले में कुल 5 ओवर गेंदबाजी की और 33 रन दिए। हालांकि, उस ओवर के बाद उन्हें कोई अन्य सफलता हासिल नहीं हो सकी, लेकिन उनके जज्बे और नियंत्रण ने क्रिकेट प्रेमियों का दिल जरूर जीत लिया।
वेस्टइंडीज ने खड़ा किया चुनौतीपूर्ण स्कोर
मैच की बात करें तो टॉस जीतकर भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने पहले गेंदबाजी करने का रणनीतिक निर्णय लिया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 295 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। वेस्टइंडीज की ओर से जस्टिन ग्रीव्स ने कमाल की बल्लेबाजी करते हुए 108 गेंदों में 12 शानदार चौकों की मदद से 101 रनों की नाबाद शतकीय पारी खेली।
इसके अलावा, जिस खिलाड़ी को नमन धीर ने आउट किया था यानी जॉन कैंपबेल ने भी अपनी पारी को आगे बढ़ाते हुए 62 रनों का महत्वपूर्ण योगदान दिया। मध्यक्रम में आमिर जंगू ने भी नाबाद 58 रनों की तेजतर्रार पारी खेलकर स्कोर को सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचाया।
भारतीय गेंदबाजों का प्रदर्शन
विपक्षी टीम के मजबूत स्कोर के सामने भारतीय गेंदबाजों ने बीच-बीच में बेहतरीन वापसी की। भारत के लिए अनुभवी स्पिनर कुलदीप यादव ने एक बार फिर अपनी फिरकी का जादू बिखेरा और सबसे ज्यादा 4 महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए। उनका साथ तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा ने बखूबी निभाया, जिन्होंने 2 बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। इसके अलावा, ऑलराउंडर नीतिश कुमार रेड्डी के खाते में भी एक सफलता आई।
अंततः क्रिकेट के मैदान पर कई बार ऐसे तकनीकी पेंच और अजीब नियम आ जाते हैं जो खिलाड़ियों की मेहनत पर भारी पड़ जाते हैं। नमन धीर के साथ हुआ यह वाकया लंबे समय तक क्रिकेट प्रेमियों की यादों में ताजा रहेगा, जहां उन्होंने अपनी बेहतरीन गेंद से बल्लेबाज को धराशाई तो कर दिया था, लेकिन किस्मत और नियमों के फेर के चलते वे अपने पहले अंतरराष्ट्रीय विकेट के जश्न से महरूम रह गए।