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वाराणसी में टला बड़ा हादसा: गंगा स्नान के दौरान गहरे पानी में डूबे तमिलनाडु के बुजुर्ग, NDRF ने बचाई जान

वाराणसी में टला बड़ा हादसा: गंगा स्नान के दौरान गहरे पानी में डूबे तमिलनाडु के बुजुर्ग, NDRF ने बचाई जान

धार्मिक नगरी वाराणसी में एक बार फिर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ (NDRF) के जवानों ने अपनी सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया है। मंगलवार की सुबह गंगा घाट पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब तमिलनाडु से आए एक बुजुर्ग श्रद्धालु स्नान के दौरान अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। लेकिन, मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की मुस्तैदी ने पलक झपकते ही उनकी जान बचा ली। इस घटना के बाद घाट पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली और बचाव दल की जमकर सराहना की।

सुबह का वक्त और दांडी घाट पर मची चीख-पुकार

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना मंगलवार सुबह करीब 7:30 बजे की है। हर रोज की तरह वाराणसी के प्रसिद्ध दांडी घाट पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो चुकी थी। देश के कोने-कोने से लोग मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए घाटों पर पहुंच रहे थे। इसी दौरान दक्षिण भारत के तमिलनाडु से आए श्रद्धालुओं का एक जत्था भी स्नान कर रहा था।

स्नान करने वालों में 63 वर्षीय एस. मुतायन भी शामिल थे, जो तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के रहने वाले हैं। गंगा के विहंगम दृश्य और आस्था में डूबे मुतायन स्नान करते-करते अनजाने में ऐसे हिस्से में चले गए जहाँ पानी का बहाव तेज था और गहराई काफी अधिक थी। जैसे ही वे गहरे पानी में गए, उनका संतुलन बिगड़ गया और वे खुद को संभाल नहीं पाए। देखते ही देखते वे डूबने लगे।

एनडीआरएफ की 11वीं वाहिनी के जवानों ने दिखाई तत्परता

गनीमत यह रही कि उस समय घाट पर सुरक्षा के मद्देनजर एनडीआरएफ की 11वीं वाहिनी के जवान पिकेट ड्यूटी पर तैनात थे। बचावकर्मियों की नजर जैसे ही डूब रहे बुजुर्ग पर पड़ी, उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपनी कार्रवाई शुरू कर दी। आपदा मोचन बल के जवानों के लिए हर एक सेकंड बेहद कीमती था।

स्थिति की नजाकत को भांपते हुए जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत पानी का रुख किया। आधुनिक बचाव उपकरणों और लाइफ बॉय (Life Boy) की मदद से जवानों ने डूब रहे एस. मुतायन तक त्वरित पहुंच बनाई। कुशल तैराक जवानों ने पेशेवर अंदाज में बुजुर्ग को अपनी गिरफ्त में लिया और सुरक्षित तरीके से खींचते हुए नदी तट पर ले आए।

बाल-बाल बचे श्रद्धालु, परिजनों ने जताया आभार

नदी से बाहर निकाले जाने के दौरान बुजुर्ग सदमे में थे, लेकिन एनडीआरएफ की मेडिकल फर्स्ट रिस्पॉन्डर टीम ने तुरंत उन्हें प्राथमिक सहायता दी। कुछ ही पलों में जब उन्होंने सामान्य रूप से सांस लेनी शुरू की, तो उनके साथ आए परिजनों और वहां मौजूद अन्य श्रद्धालुओं की जान में जान आई।

बचाए गए श्रद्धालु एस. मुतायन और उनके परिवार ने एनडीआरएफ के जवानों का तहेदिल से आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि यदि उस वक्त ये जवान मुस्तैद न होते, तो परिणाम बेहद भयानक हो सकते थे। घाट पर मौजूद स्थानीय लोगों ने भी तालियां बजाकर और जवानों की पीठ थपथपाकर उनके इस साहसिक कार्य की सराहना की।

प्रशासन और एनडीआरएफ की लगातार अपील

इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ के अधिकारियों ने एक बार फिर आम जनता और देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए चेतावनी जारी की है। अधिकारियों का कहना है कि गंगा नदी का जलस्तर और उसके भीतर की धाराएं अक्सर अप्रत्याशित होती हैं, जिन्हें बाहर से भांप पाना आम आदमी के लिए मुश्किल होता है।

  • निर्धारित क्षेत्रों में ही करें स्नान: हमेशा प्रशासन द्वारा तय किए गए और बैरिकेडिंग वाले सुरक्षित जोन में ही गंगा स्नान करें।
  • गहरे पानी से बचें: अज्ञात घाटों या कम जाने-माने छोरों पर नदी के बीचों-बीच जाने का दुस्साहस बिल्कुल न करें।
  • निर्देशों का पालन: घाटों पर लाउडस्पीकर से होने वाली घोषणाओं और वहां तैनात गोताखोरों व सुरक्षाकर्मियों के निर्देशों को सर्वोपरि मानें।
  • आपात स्थिति में संपर्क: किसी भी तरह की दुर्घटना या संकट की स्थिति में तुरंत वहां मौजूद एनडीआरएफ, जल पुलिस या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

वर्तमान मौसम और जल प्रवाह के बदलावों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष एडवाइजरी जारी की है। मानसून के इस दौर में नदियों का मिजाज तेजी से बदलता है। वाराणसी आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से लगातार यह अपील की जा रही है कि वे अपनी आस्था के साथ-साथ अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें।

एनडीआरएफ के जवानों की यह मुस्तैदी एक बार फिर साबित करती है कि खाकी और वर्दी में तैनात ये जवान किस तरह अपनी जान जोखिम में डालकर आम नागरिक के जीवन की रक्षा करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि थोड़ी सी सावधानी और प्रशासन का सहयोग बड़े से बड़े हादसे को टाल सकता है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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