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भारत-इजरायल की दोस्ती पर नेतन्याहू का बड़ा बयान, मोदी को कहा धन्यवाद

भारत-इजरायल की दोस्ती पर नेतन्याहू का बड़ा बयान, मोदी को कहा धन्यवाद

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर भारत और इजरायल के बीच की नजदीकी अक्सर दुनिया भर का ध्यान खींचती है। हाल ही में यहूदी नववर्ष यानी 'रोश हशनाह' के पावन अवसर पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई गर्मजोशी भरी बातचीत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह रणनीतिक साझेदारी वक्त के हर इम्तिहान पर खरी उतरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इजरायल के लोगों को दी गई शुभकामनाओं के जवाब में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बयान वैश्विक कूटनीति में खासी चर्चा का विषय बना हुआ है।


रोश हशनाह पर पीएम मोदी की शुभकामनाएं

यहूदी समुदाय के सबसे पवित्र त्योहारों में शुमार 'रोश हशनाह' के मौके पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के जरिए दुनिया भर के यहूदी समुदाय और इजरायल के नागरिकों को नए साल की मुबारकबाद दी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में पारंपरिक यहूदी अभिवादन 'शाना तोवा' का इस्तेमाल करते हुए लिखा था कि आने वाला नया साल सभी के जीवन में शांति, उम्मीद, अच्छी सेहत और निरंतर तरक्की लेकर आए।

प्रधानमंत्री मोदी के इस संदेश ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि भारत वैश्विक पटल पर अपने पुराने और भरोसेमंद मित्रों के साथ किस प्रकार सांस्कृतिक और कूटनीतिक रूप से जुड़ा हुआ है। भारत के प्रधानमंत्री का यह संदेश केवल एक औपचारिक बधाई नहीं था, बल्कि यह दोनों देशों की जनता के बीच की आपसी आत्मीयता को भी दर्शाता है।

नेतन्याहू का पलटवार: ‘आपकी लीडरशिप और पक्की दोस्ती के लिए धन्यवाद’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेहद गर्मजोशी भरा जवाब दिया। नेतन्याहू ने पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए उनकी नेतृत्व क्षमता और दोनों देशों के बीच की अटूट दोस्ती की जमकर सराहना की।

इजरायली पीएम ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा, "यहूदी नववर्ष के अवसर पर मैं अपने प्रिय मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी लीडरशिप और हमारी अटूट दोस्ती के लिए धन्यवाद देता हूं। हम दो प्राचीन सभ्यताओं और दो महान लोकतंत्रों के देश हैं, जिनके रिश्ते समय की कसौटी पर हमेशा खरे उतरे हैं।"

इसके साथ ही, नेतन्याहू ने व्यक्तिगत स्तर पर भी अपने रिश्तों का जिक्र किया। उन्होंने साझा किया कि वह और उनकी पत्नी सारा आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दोबारा मुलाकात करने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह बयान दोनों नेताओं के बीच के व्यक्तिगत तालमेल और आपसी भरोसे को स्पष्ट रूप से बयां करता है।

दो प्राचीन सभ्यताएं और साझा मूल्य

भारत और इजरायल के बीच के संबंध सिर्फ कूटनीतिक समझौतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें इतिहास और संस्कृति की गहराइयों में जुड़ी हुई हैं। दोनों ही देश दुनिया की सबसे पुरानी जीवित सभ्यताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। आधुनिक युग में ये दोनों राष्ट्र दुनिया के सबसे बड़े और जीवंत लोकतंत्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

  • लोकतांत्रिक मूल्य: दोनों देश स्वतंत्रता, मानवाधिकार और कानून के शासन में अटूट विश्वास रखते हैं।
  • सुरक्षा और रक्षा सहयोग: तकनीक, रक्षा, कृषि और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी आज दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुकी है।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: सदियों से दोनों संस्कृतियों के बीच वैचारिक और व्यापारिक आदान-प्रदान रहा है, जो आज के समय में और अधिक मजबूत हुआ है।

पश्चिम एशिया के हालात और ब्रिक्स घोषणा का संदर्भ

एक तरफ जहां दोनों देशों के शीर्ष नेता आपसी रिश्तों की मजबूती का जश्न मना रहे थे, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर पश्चिम एशिया के हालात पर भी गहरी चिंता जताई जा रही थी। हाल ही में सामने आई ब्रिक्स (BRICS) की नई दिल्ली घोषणा में पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।

ब्रिक्स देशों ने क्षेत्र के सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। घोषणा में इस बात पर जोर दिया गया है कि आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही, किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूर्ण सम्मान किया जाना अनिवार्य है।

गाजा और मानवीय मदद पर गंभीर मंथन

ब्रिक्स की इस बैठक और घोषणा में गाजा में जारी संघर्ष और हिंसा पर भी तीखा रुख अपनाया गया। अंतरराष्ट्रीय मंच से यह मांग की गई कि क्षेत्र में तुरंत और स्थायी युद्धविराम लागू किया जाए, ताकि वहां के नागरिकों को राहत मिल सके। इसके अलावा:

  • गाजा पट्टी में बिना किसी रुकावट के मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) पहुँचाने की व्यवस्था की जाए।
  • शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई गई।
  • अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और परमाणु सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया गया।
  • आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर चर्चा की गई।

भविष्य की दिशा और रणनीतिक साझेदारी

मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत और इजरायल की यह मजबूत होती दोस्ती दुनिया को एक सकारात्मक संदेश देती है। एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर संघर्ष और तनाव का माहौल है, वहीं दो महान लोकतंत्रों का एक-दूसरे के पर्वों पर शुभकामनाएं देना और परस्पर सहयोग का संकल्प लेना कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है।

आने वाले दिनों में भारत और इजरायल के बीच रक्षा, सेमीकंडक्टर, जल प्रबंधन और आतंकवाद के खिलाफ जंग जैसे मुद्दों पर सहयोग के और अधिक प्रगाढ़ होने की पूरी उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की यह व्यक्तिगत और राजनीतिक केमिस्ट्री आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति के कई नए आयाम तय करती नजर आएगी।

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रोली सिंह

रोली सिंह

Writer (स्थानीय खबरें)

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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