अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सबसे बड़े मंच पर एक बार फिर पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका है। वैश्विक आतंकवाद के नासूर पर जब बात आई और तीखे सवालों के तीर छोड़े गए, तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पास खिसियाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। हालात इतने असहज हो गए कि पाकिस्तानी हुक्मरान बिना एक भी सवाल का जवाब दिए प्रेस ब्रीफिंग बीच में ही छोड़कर खिसकने में ही भलाई समझी।
वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की एक और फजीहत
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर के देश आतंकवाद के खात्मे के लिए एक मंच पर आ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) के गलियारों में जब आतंकवाद को पालने-पोसने और सीमा पार से भारत में अशांति फैलाने के पुराने और पुख्ता सबूतों पर चर्चा छिड़ी, तो पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल के माथे पर बल पड़ गए। भारतीय पक्ष के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों ने भी जब सीधे और दो टूक सवाल दागे, तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की बोलती बंद हो गई।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ब्रीफिंग के दौरान जब मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड्स को पाकिस्तानी जमीन पर खुलेआम पनाह मिलने और वैश्विक प्रतिबंधों से बचाने के षड्यंत्रों पर सवाल पूछा गया, तो पाकिस्तानी पीएम पूरी तरह बगलें झांकते नजर आए। कुछ पलों की खामोशी और असहजता के बाद, बिना किसी औपचारिकता को पूरा किए वे मंच छोड़कर चले गए। इस दृश्य ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आतंकवाद के समर्थन पर आधारित देश के पास दुनिया के तीखे सवालों का कोई तार्किक या कूटनीतिक जवाब नहीं है।
आतंकवाद और कूटनीतिक खोखलापन
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान दशकों से वैश्विक समुदाय की आंखों में धूल झोंकने की असफल कोशिश करता रहा है। आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का हिस्सा बनाने वाला यह देश अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ चुका है। संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में हुई इस किरकिरी ने यह साफ कर दिया है कि अब दुनिया के देश पाखंड और दोहरे मानदंडों को और अधिक बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।
प्रमुख बिंदु:
- कठिन सवाल: सीमा पार आतंकवाद और शरण देने के पुराने मामलों पर पूछे गए सीधे सवाल।
- खामोशी और पलायन: जवाब देने में असमर्थ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का प्रेस ब्रीफिंग बीच में छोड़कर जाना।
- अंतरराष्ट्रीय अलगाव: वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की साख में लगातार आ रही भारी गिरावट।
- बढ़ता कूटनीतिक दबाव: भारत द्वारा लगातार रखे जा रहे पुख्ता सबूतों के आगे पस्त हुआ पाकिस्तान।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय
इस घटना के बाद से ही वैश्विक मीडिया गलियारों में पाकिस्तान की थू-थू हो रही है। जानकारों का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं पर पल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ निर्णायक और वास्तविक कार्रवाई नहीं करता, तब तक उसे हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसी तरह के अपमानजनक हालातों का सामना करना पड़ेगा। दिखावे के बयान और वैश्विक मंचों पर सहानुभूति बटोरने की पुरानी रणनीतियां अब पूरी तरह से बेअसर साबित हो रही हैं।
इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के साए में पलने वाली हुकूमतें कभी भी लोकतांत्रिक और शांतिप्रिय देशों के सामने टिक नहीं सकतीं। संयुक्त राष्ट्र में हुई इस किरकिरी ने पाकिस्तान के उस खोखले दावों की पोल खोल दी है जिसमें वह खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताता आया है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान की मुश्किलें और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना है।