महाराष्ट्र के बीड जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली और आम नागरिकों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। परली शहर में एक खूंखार आवारा कुत्ते ने ऐसा तांडव मचाया कि महज 24 घंटों के भीतर 47 लोगों को अपना शिकार बना लिया। इस अचानक हुए हमले से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं।
एक ही दिन में 47 लोग घायल, 19 की हालत गंभीर
मिली जानकारी के अनुसार, परली के अलग-अलग इलाकों में इस पागल कुत्ते ने एक के बाद एक लोगों को काटना शुरू किया। हमले की इस खौफनाक रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देखते ही देखते घायलों की संख्या 47 तक पहुंच गई। इनमें छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं।
स्थानीय अस्पतालों से मिल रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन 47 पीड़ितों में से 19 लोगों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। कई लोगों के चेहरे, हाथों और पैरों पर कुत्ते ने गहरे जख्म दिए हैं, जिन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा के लिए रेफर करना पड़ा। अचानक आए इस संकट के कारण परली के सरकारी और निजी अस्पतालों में घायलों और उनके परिजनों की भारी भीड़ जमा हो गई।
अचानक हुए हमलों से सहमे लोग, घरों में कैद होने की नौबत
घटना के बाद से परली के निवासियों में भारी रोष और डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी कतरा रहे हैं। गलियों और सड़कों पर आवारा पशुओं का झुंड आम बात हो गई है, लेकिन इस बार का हमला इतना आक्रामक था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
एक स्थानीय निवासी ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह अपने घर के बाहर खड़े थे, तभी अचानक एक कुत्ता पीछे से आया और बिना किसी उकसावे के उन पर टूट पड़ा। जब तक वह संभलते, कुत्ता उन्हें बुरी तरह जख्मी कर चुका था। इसी तरह कई अन्य लोग भी अपने दैनिक कार्यों के दौरान इस खूंखार जानवर का शिकार बने।
प्रशासन और नगर पालिका की भूमिका पर उठे सवाल
इस बड़ी घटना के बाद नागरिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोगों ने नगर पालिका प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। निवासियों का कहना है कि शहर में लगातार बढ़ रही आवारा कुत्तों की संख्या के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। न तो इनकी नसबंदी (Sterilization) के लिए कोई प्रभावी अभियान चलाया जा रहा है और न ही रेबीज रोधी टीकाकरण पर कोई ध्यान दिया जा रहा है।
नागरिकों की प्रमुख मांगें:
- तत्काल कार्रवाई: उस खूंखार कुत्ते को तुरंत पकड़कर शहर से दूर सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाए।
- नसबंदी अभियान: आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी पर लगाम लगाने के लिए युद्ध स्तर पर एंटी-रबीज और नसबंदी अभियान चलाया जाए।
- मुआवजा: गंभीर रूप से घायलों और अस्पताल में इलाज करा रहे गरीबों को प्रशासन की ओर से आर्थिक सहायता व मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाए।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। परली के सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) और इम्यूनोग्लोबुलिन की पर्याप्त खुराक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी पीड़ित को इलाज के लिए भटकना न पड़े। वहीं, नगर पालिका की टीमों को उस आक्रामक कुत्ते को ढूंढने के लिए मैदान में उतार दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आवारा कुत्तों में इस तरह का अत्यधिक आक्रामक व्यवहार अक्सर 'रेबीज' (Rabies) संक्रमण या किसी अंदरूनी चोट/परेशानी के कारण होता है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह बेहद जरूरी हो जाता है कि वह समय रहते इस दिशा में ठोस और दूरगामी योजना तैयार करे, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
बढ़ता खतरा और हमारी जिम्मेदारी
परली की यह घटना सिर्फ एक शहर की नहीं, बल्कि देश के कई शहरी और ग्रामीण इलाकों की कड़वी सच्चाई बन चुकी है। आवारा पशुओं और इंसानों के बीच का यह टकराव लगातार जानलेवा रूप लेता जा रहा है। स्थानीय लोगों की मांग है कि जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक प्रशासन को नाइट पेट्रोलिंग और त्वरित राहत टीमों का गठन करना चाहिए ताकि जनता सुरक्षित महसूस कर सके। फिलहाल, परली के लोगों की निगाहें नगर पालिका और जिला प्रशासन के अगले एक्शन पर टिकी हुई हैं।