सुबह के नाश्ते में प्लेट पर रखा अंडा हम में से लगभग हर किसी ने देखा होगा। लेकिन क्या कभी आपके मन में यह जिज्ञासा जगी है कि आखिर एक मुर्गी बिना मुर्गे के भी अंडा कैसे दे देती है? और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि अगर अंडा मुर्गी से ही आया है, तो बाजार से खरीदे गए हर अंडे को गर्म जगह या इनक्यूबेटर में रखने पर भी उसमें से चूजा क्यों नहीं निकलता?
इस पूरी पहेली का जवाब मुर्गी के शरीर के भीतर होने वाली दो अलग और बेहद दिलचस्प प्रक्रियाओं में छिपा हुआ है—पहला है अंडे का निर्माण (Egg Formation) और दूसरा है उसका निषेचन (Fertilization)। आइए पर्दा उठाते हैं इस बायोलॉजिकल मिस्ट्री से।
मुर्गी बिना मुर्गे के अंडा कैसे देती है?
सबसे पहले अपने दिमाग से इस भ्रम को पूरी तरह निकाल दीजिए कि मुर्गे के बिना मुर्गी अंडा दे ही नहीं सकती। प्रकृति ने मादा पक्षियों का शरीर कुछ इस तरह डिजाइन किया है कि उन्हें अंडा देने के लिए किसी नर की आवश्यकता नहीं होती।
जब एक मादा मुर्गी वयस्कता (Sexual Maturity) की उम्र तक पहुंचती है, तो उसके शरीर में एक नेचुरल रिप्रोडक्टिव साइकिल शुरू हो जाता है। उसकी ओवरी (Ovary) में योक यानी पीले हिस्से का विकास होता है और परिपक्व होने पर वह ओवरी से रिलीज होता है।
इसके बाद यह योक ओवीडक्ट (Oviduct) से गुजरता है। इसी सफर के दौरान इसके चारों तरफ एग व्हाइट (Albumin), झिल्लियां (Membranes) और अंत में सख्त खोल यानी एगशेल (Shell) का निर्माण होता है। इस पूरी अंडा-निर्माण प्रक्रिया में लगभग 25 घंटे का समय लगता है। इस पूरी बायोलॉजिकल चेन में मुर्गे यानी रूस्टर (Rooster) की कोई भूमिका नहीं होती।
फिर मुर्गा किस काम आता है?
अब सवाल यह उठता है कि अगर बिना मुर्गे के भी अंडा बन जाता है, तो मुर्गे की जरूरत कहां पड़ती है? मुर्गे की आवश्यकता केवल और केवल फर्टिलाइजेशन (Fertilization) के लिए होती है।
जब मुर्गी और मुर्गा मेटिंग (Mating) करते हैं, तब नर पक्षी के स्पर्म मादा के रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट तक पहुंचते हैं। जब अगला योक ओवरी से निकलकर ओवीडक्ट के शुरुआती हिस्से में पहुंचता है, तो वहां स्पर्म के साथ मिलकर फर्टिलाइजेशन हो सकता है।
इसके बाद बनने वाला अंडा 'फर्टिलाइज्ड' (Fertile) हो जाता है और यदि इसे उचित इनक्यूबेशन (गर्मी और नमी) मिले, तो इसमें भ्रूण (Embryo) विकसित होकर चूजा बन सकता है। लेकिन अगर मुर्गा मौजूद ही नहीं है, तो योक फर्टिलाइज नहीं होगा। अंडा तब भी बनेगा, लेकिन उससे नया जीवन नहीं निकल सकेगा।
बाजार के अंडों से चूजा क्यों नहीं निकलता?
इस पूरे विज्ञान को एक बहुत ही आसान समीकरण से समझा जा सकता है:
- मुर्गी + बिना मुर्गा = अंडा तो बनेगा, लेकिन वह अनफर्टिलाइज्ड (Unfertilized) होगा।
- मुर्गी + मुर्गा + सफल फर्टिलाइजेशन = फर्टिलाइज्ड अंडा बनने की संभावना।
यही मुख्य वजह है कि खाने के लिए अंडे देने वाले कमर्शियल लेयर फार्म्स (Layer Farms) में मुर्गे को रखने की कोई आवश्यकता नहीं होती। सुपरमार्केट या स्थानीय grocery stores में मिलने वाले टेबल एग्स पूरी तरह से अनफर्टिलाइज्ड होते हैं। इसलिए, यदि आप बाजार से अंडा लाकर उसे किसी गर्म जगह या इनक्यूबेटर में रख भी दें, तो उसमें से चूजा निकलने की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती।
क्या बाहर से देखकर पहचाना जा सकता है फर्टिलाइज्ड अंडा?
यह एक आम सवाल है कि क्या अंडे के छिलके को देखकर यह बताया जा सकता है कि वह फर्टिलाइज्ड है या नहीं? इसका सीधा जवाब है—नहीं। एगशेल के रंग या उसकी बनावट से यह तय करना असंभव है।
अंडे को फोड़ने पर उसके पीले हिस्से (Yolk) के ऊपर एक बहुत छोटा सफेद धब्बा दिखाई देता है, जिसे जर्मिनल डिस्क (Germinal Disc) कहा जाता है। अनफर्टिलाइज्ड अंडे में यह धब्बा एक ठोस सफेद बिंदु जैसा दिखता है, जबकि फर्टिलाइज्ड अंडे में यह एक हल्की रिंग या छल्ले जैसा नजर आ सकता है। हालांकि, आम उपभोक्ता के लिए हर बार इसकी सही पहचान करना आसान नहीं होता।
क्या मुर्गी के एक बार मेटिंग करने से कई फर्टिलाइज्ड अंडे मिल सकते हैं?
चिकन बायोलॉजी यहीं आकर और अधिक रोचक हो जाती है। मुर्गियों के पास एक खास क्षमता होती है—वे नर पक्षी के स्पर्म को अपने रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में कुछ दिनों या हफ्तों तक स्टोर (Store) करके रख सकती हैं।
इसका मतलब यह है कि हर नए फर्टिलाइज्ड अंडे के लिए तुरंत मेटिंग होना जरूरी नहीं है। पोल्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्पर्म स्टोर करने की यह क्षमता कुछ मामलों में लगभग चार सप्ताह तक भी चल सकती है। यही वजह है कि ब्रीडर फार्म्स से मुर्गा हटाए जाने के तुरंत बाद भी कुछ हफ्तों तक फर्टिलाइज्ड अंडे मिलने का सिलसिला जारी रह सकता है।
फर्टिलाइज्ड अंडे से चूजा बनने में कितना समय लगता है?
यदि आपके पास एक फर्टिलाइज्ड अंडा है, तो भी चूजा अपने आप नहीं निकल जाएगा। इसके लिए उसे सही तापमान, उचित आर्द्रता (Humidity) और लगातार इनक्यूबेशन की जरूरत होती है।
प्राकृतिक रूप से मुर्गी खुद अंडों पर बैठकर उन्हें जरूरी गर्माहट देती है, जबकि कमर्शियल पोल्ट्री में इनक्यूबेटर का इस्तेमाल किया जाता है। एक सामान्य चिकन अंडे का इनक्यूबेशन पीरियड ठीक 21 दिन का होता है। 21वें दिन चूजा खोल तोड़कर बाहर आता है। लेकिन यदि तापमान या ह्यूमिडिटी में जरा भी गड़बड़ी हुई, तो फर्टिलाइज्ड अंडे से भी स्वस्थ चूजे का बाहर आना मुमकिन नहीं हो पाता.
सफेद और भूरे अंडे में क्या है फर्क?
अक्सर लोगों के मन में यह भ्रम रहता है कि सफेद अंडे अनफर्टिलाइज्ड होते हैं और भूरे (Brown) अंडे फर्टिलाइज्ड होते हैं। यह पूरी तरह से एक मिथक है।
अंडे के छिलके का रंग सफेद, भूरा, नीला या हरा होना केवल मुर्गी की नस्ल (Breed) और उसकी आनुवंशिकी (Genetics) पर निर्भर करता है। छिलके के रंग का फर्टिलािटी से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। सफेद अंडा भी फर्टिलाइज्ड हो सकता है और भूरा अंडा भी अनफर्टिलाइज्ड हो सकता है।