आकाश की ऊंचाइयों पर उड़ते विमान के भीतर सुरक्षा व्यवस्था हमेशा से एक संवेदनशील और कड़ा विषय रही है। हाल ही में सामने आई एक चौंकाने वाली घटना ने पूरी एविएशन इंडस्ट्री को झकझोर कर रख दिया है। फ्लाईदुबई की एक उड़ान के दौरान जब एक यात्री ने पायलट पर कुल्हाड़ी से हमला करने की कोशिश की, तो हर कोई हैरान रह गया। इस घटना के बाद से आम लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है—आखिर एक यात्री की पहुंच तक कुल्हाड़ी कैसे पहुंची? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए जाने जाने वाले विमान के अंदर खुद एक कुल्हाड़ी या ऐसा खतरनाक हथियार रखा ही क्यों जाता है?
फ्लाईदुबई की वह डरावनी घटना, जिसने सबको चौंका दिया
यह सनसनीखेज मामला तब प्रकाश में आया जब फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट आसमान में थी। उड़ान के दौरान अचानक एक सिरफिरे यात्री ने कॉकपिट के दरवाजे को पार करने की कोशिश की और कथित तौर पर विमान के अंदर मौजूद एक आपातकालीन कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। गनीमत यह रही कि क्रू मेंबर्स और अन्य यात्रियों ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को समय रहते संभाल लिया और किसी बड़े हादसे को टाल दिया गया। लेकिन इस घटना के बाद एविएशन एक्सपर्ट्स के बीच बहस छिड़ गई कि विमान जैसी संवेदनशील जगह पर हथियारों की मौजूदगी कितनी सुरक्षित है।
जांच में यह बात सामने आई कि हमलावर ने किसी बाहरी हथियार का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि उसने फ्लाइट के अंदर ही मौजूद इमरजेंसी किट या कॉकपिट में रखेेडूल के तहत मिलने वाले औजार का उपयोग करने का प्रयास किया। इस घटना ने एयरलाइंस की सुरक्षा नीतियों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
सवाल: क्या सचमुच विमानों के अंदर कुल्हाड़ी रखी जाती है?
अगर आपके मन में यह सवाल है कि क्या सच में हर कमर्शियल फ्लाइट के अंदर कुल्हाड़ी (Axe) रखी जाती है, तो इसका जवाब है—हाँ। दुनिया भर के विमानन नियमों के अनुसार, लगभग हर बड़े कमर्शियल यात्री विमान के कॉकपिट या उसके आस-पास एक खास तरह की कुल्हाड़ी रखना अनिवार्य होता है। 9/11 हमलों के बाद से विमान सुरक्षा नियमों में कड़ाई जरूर की गई है, लेकिन कुछ विशेष आपातकालीन उपकरणों को हटाने की अनुमति आज भी नहीं दी गई है, और उनमें से एक कुल्हाड़ी भी है।
विमान के अंदर कुल्हाड़ी रखने के पीछे की असली वजह क्या है?
अब आपके जेहन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि अगर कुल्हाड़ी इतनी खतरनाक है, तो इसे विमान में क्यों रखा जाता है? क्या इसका इस्तेमाल कोई सुरक्षा खतरा पैदा करने के लिए है? बिल्कुल नहीं। इसके पीछे कुछ बेहद जरूरी और जीवन रक्षक कारण होते हैं:
- इमरजेंसी लैंडिंग के बाद निकासी (Emergency Evacuation): यदि विमान किसी दुर्घटना का शिकार हो जाता है या क्रैश लैंडिंग करता है, तो विमान के दरवाजे या खिड़कियां जाम हो सकती हैं। ऐसे में विमान के मेटल बॉडी को काटकर या इमरजेंसी एग्जिट का रास्ता बनाने के लिए इस कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया जाता है।
- आग पर काबू पाना (Firefighting): हवा में उड़ते विमान के भीतर यदि किसी इलेक्ट्रिकल पैनल या केबिन में शॉर्ट सर्किट से आग लग जाती है, और वह सामान्य अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) से नहीं बुझती है, तो पैनल के अंदरूनी हिस्सों तक पहुँचकर आग बुझाने के लिए दीवारों या पैनल को तोड़ने की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए यह कुल्हाड़ी बहुत काम आती है।कॉकपिट का जाम होना (Locked Cockpit Door): कई बार तकनीकी खराबी के कारण कॉकपिट का इलेक्ट्रॉनिक दरवाजा अंदर से पूरी तरह जाम हो जाता है और क्रू मेंबर अंदर नहीं जा पाते। ऐसी आपातकालीन स्थिति में दरवाजे को तोड़ने के लिए भी यह उपकरण मददगार साबित होता है।
यात्रियों की सुरक्षा और हथियारों का यह विरोधाभास
एक तरफ एयरपोर्ट पर यात्रियों के नाखून काटने वाली छोटी कैंची, नेल कटर और पानी की बोतल तक को सुरक्षा जांच के दौरान जब्त कर लिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ विमान के भीतर एक कुल्हाड़ी मौजूद होती है। यह विरोधाभास आम लोगों को अजीब लग सकता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कुल्हाड़ी आमतौर पर यात्रियों की पहुंच से दूर, यानी कॉकपिट के अंदर या एक विशेष सुरक्षित बॉक्स में बंद होती है। क्रू मेंबर्स को कड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है कि इस तरह के आपातकालीन उपकरणों का इस्तेमाल केवल गंभीर संकट के समय ही किया जाए। हालांकि, फ्लाईदुबई जैसी घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि यदि कोई असामाजिक तत्व या मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति किसी तरह इस तक पहुँच जाए, तो यह एक बड़ा खतरा बन सकता है।
क्या अब विमानों से कुल्हाड़ी हटाई जा रही है?
इस घटना के बाद से कई विमानन कंपनियों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच इस बात पर मंथन शुरू हो गया है कि क्या आधुनिक तकनीक के दौर में कुल्हाड़ी का कोई सुरक्षित विकल्प लाया जाना चाहिए। हालांकि, जानकारों का कहना है कि विमान की तकनीकी बनावट और आपातकालीन स्थितियों को देखते हुए मेटल कटिंग टूल्स की जरूरत से इंकार नहीं किया जा सकता। आधुनिक विमानों में कई जगहों पर अब हल्के और कम घातक दिखने वाले विशेष हाइड्रोलिक या आधुनिक रेस्क्यू टूल्स का इस्तेमाल करने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन पारंपरिक कुल्हाड़ी की उपयोगिता अभी पूरी तरह नकारी नहीं गई है.
निष्कर्ष
फ्लाईदुबई की फ्लाइट में पायलट पर हुआ हमला भले ही टल गया हो, लेकिन इसने एविएशन सेक्टर की सुरक्षा और आपातकालीन प्रोटोकॉल को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। विमान के अंदर रखी जाने वाली कुल्हाड़ी जहाँ एक तरफ आपातकाल में जीवन बचाने का सबसे बड़ा हथियार है, वहीं गलत हाथों में पड़ने पर यह एक जानलेवा खतरा भी बन सकती है। आने वाले समय में देखना यह होगा कि एयरलाइंस और नियामक संस्थाएं इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा के नियमों में क्या नए और सख्त बदलाव करती हैं।