Breaking
► पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी के चचेरे भाई की बेटी का फंदे से लटका मिला शव ► दलीप ट्रॉफी 2026: शमी और मुकेश की आंधी में उड़ा सेंट्रल जोन, सिर्फ 158 रन पर सिमटी पारी ► सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद टला बड़ा सियासी मार्च, CJP ने लिया यू-टर्न ► नेपाल बाढ़ में चमकी 'लेडी कैप्टन' प्रिया अधिकारी, 6 दिनों में किए 100 रेस्क्यू मिशन ► गाजा में फिर गहराया संकट: अमेरिकी फील्ड अस्पताल को खाली करने का सख्त आदेश, भड़की जंग ► बदलती जीवनशैली और खानपान से कैसे रखें नसों को स्वस्थ, जानिए अचूक उपाय ► सिंधु जल समझौते पर भारत ने हेग कोर्ट को क्यों दिखाया कड़ा रुख? जानें पूरा मामला ► SUV के नीचे फंसी 14 साल की लड़की, 30 लोगों ने बिना सोचे उठाई गाड़ी ► सितंबर के पहले दिन महंगाई का झटका, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर महंगा ► बिहार बाढ़ के बीच नेपाल से आई रहस्यमयी मछलियां, खाने से लोग बीमार ► पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी के चचेरे भाई की बेटी का फंदे से लटका मिला शव ► दलीप ट्रॉफी 2026: शमी और मुकेश की आंधी में उड़ा सेंट्रल जोन, सिर्फ 158 रन पर सिमटी पारी ► सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद टला बड़ा सियासी मार्च, CJP ने लिया यू-टर्न ► नेपाल बाढ़ में चमकी 'लेडी कैप्टन' प्रिया अधिकारी, 6 दिनों में किए 100 रेस्क्यू मिशन ► गाजा में फिर गहराया संकट: अमेरिकी फील्ड अस्पताल को खाली करने का सख्त आदेश, भड़की जंग ► बदलती जीवनशैली और खानपान से कैसे रखें नसों को स्वस्थ, जानिए अचूक उपाय ► सिंधु जल समझौते पर भारत ने हेग कोर्ट को क्यों दिखाया कड़ा रुख? जानें पूरा मामला ► SUV के नीचे फंसी 14 साल की लड़की, 30 लोगों ने बिना सोचे उठाई गाड़ी ► सितंबर के पहले दिन महंगाई का झटका, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर महंगा ► बिहार बाढ़ के बीच नेपाल से आई रहस्यमयी मछलियां, खाने से लोग बीमार

नेपाल बाढ़ में चमकी 'लेडी कैप्टन' प्रिया अधिकारी, 6 दिनों में किए 100 रेस्क्यू मिशन

नेपाल बाढ़ में चमकी 'लेडी कैप्टन' प्रिया अधिकारी, 6 दिनों में किए 100 रेस्क्यू मिशन

कुदरत का जब तांडव शुरू होता है, तो इंसानी बस्तियां और रास्ते ताश के पत्तों की तरह बिखर जाते हैं। नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने कुछ ऐसा ही खौफनाक मंजर पैदा किया। हर तरफ तबाही, उफनती नदियां और मदद की गुहार लगाती जिंदगियां। ऐसे में जब सामान्य रास्ते बंद हो चुके थे और जमीन पर मदद पहुंचना नामुमकिन सा लग रहा था, तब आसमान से उम्मीद बनकर उतरीं नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी

प्रिया अधिकारी ने इस आपदा के दौरान जिस अदम्य साहस, जांबाजी और पेशेवर कुशलता का परिचय दिया है, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। जान हथेली पर रखकर उन्होंने महज छह दिनों के भीतर लगभग 100 रेस्क्यू मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। आइए जानते हैं इस आपदा के बीच कैसे बनीं 'लेडी कैप्टन' संकटमोचक और क्या है उनकी इस प्रेरणादायक यात्रा की पूरी दास्तान।

तिमुरे के चुनौतीपूर्ण हालात और मौत को मात देती उड़ानें

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तिमुरे का इलाका सबसे ज्यादा दुर्गम और खतरनाक साबित हो रहा था। लगातार हो रही भारी बारिश, विजिबिलिटी की गंभीर समस्या और हवा के तेज थपेड़ों के बीच हेलिकॉप्टर उड़ाना किसी खतरे से खाली नहीं था। बड़े-बड़े अनुभवी पायलट भी ऐसी परिस्थितियों में उड़ान भरने से कतरा रहे थे।

लेकिन कैप्टन प्रिया अधिकारी ने इन तमाम खतरों को दरकिनार करते हुए अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखा। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी मशीन को उन बादलों और उफनते सैलाब के बीच उतारा, जहां से सुरक्षित लौटकर आना अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं था।

महज छह दिन और 1000 से ज्यादा जिंदगियों के लिए उम्मीद

आंकड़े खुद ब खुद इस बात की गवाही देते हैं कि प्रिया अधिकारी का यह सफर कितना कठिन और ऐतिहासिक रहा है:

  • 6 दिन का महा-अभियान: बिना थके, बिना रुके लगातार छह दिनों तक कॉकपिट में डटी रहना।
  • 100 रेस्क्यू मिशन: बेहद कम समय में एक के बाद एक लगभग 100 बार उड़ान भरकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना।
  • जान बचाने की जंग: छतों पर फंसे, पेड़ों का सहारा लिए और उफनते पानी के बीच मदद का इंतजार कर रहे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को नया जीवन देना।

एक स्थानीय अधिकारी ने नाम न छापे जाने की शर्त पर बताया, "जब हमने आसमान में उस हेलिकॉप्टर को मंडराते देखा, तो लगा कि कोई फरिश्ता हमारी मदद के लिए आ गया है। कैप्टन प्रिया ने जिस सटीकता से चॉपर को लैंड कराया, वह उनकी बेहतरीन ट्रेनिंग और मजबूत मानसिक स्थिति को दर्शाता है।"

कौन हैं कैप्टन प्रिया अधिकारी? (Inspiring Background)

नेपाल की एविएशन इंडस्ट्री में प्रिया अधिकारी एक जाना-माना और बेहद सम्मानित नाम हैं। वह देश की उन चुनिंदा महिलाओं में से हैं जिन्होंने पुरुष-प्रधान माने जाने वाले इस क्षेत्र में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है। नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन बनने का गौरव हासिल करने वाली प्रिया ने अपनी इस सफलता से साबित कर दिया है कि लगन और मेहनत से किसी भी कांच की छत (Glass Ceiling) को तोड़ा जा सकता है।

उनकी शुरुआती ट्रेनिंग से लेकर अब तक का सफर आसान नहीं रहा है। हर उड़ान के साथ उन्होंने अपने कौशल को और निखारा है। सामान्य दिनों में पर्यटकों और वीवीआईपी उड़ानों को संभालने वाली प्रिया ने संकट के समय यह साबित कर दिया कि असली हीरो वही है जो आपदा के वक्त अपनी जान की बाजी लगाकर दूसरों की रक्षा करे।

सोशल मीडिया और देश भर में हो रही है सराहना

जैसे ही कैप्टन प्रिया अधिकारी की बहादुरी की कहानियां मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर सामने आईं, लोगों ने उनकी जमकर तारीफ करनी शुरू कर दी। ट्विटर (एक्स) से लेकर फेसबुक तक, हर जगह उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं।

देश के आम नागरिकों से लेकर शीर्ष राजनेताओं और सैन्य अधिकारियों ने उनके इस जज्बे को सलाम किया है। कई लोगों ने उन्हें 'रियल लाइफ सुपरहीरो' और 'नेपाल की शान' करार दिया है। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, "मर्दों की इस दुनिया में जब भी हौसले की मिसाल दी जाएगी, कैप्टन प्रिया अधिकारी का नाम सबसे ऊपर लिखा जाएगा। इन्होने यह साबित कर दिया कि बहादुरी का जेंडर से कोई लेना-देना नहीं होता।"

आपदा प्रबंधन और महिला नेतृत्व का एक नया अध्याय

नेपाल वर्तमान में जलवायु परिवर्तन और मानसूनी आपदाओं के कारण बेहद बुरे दौर से गुजर रहा है। ऐसे में राहत और बचाव कार्यों में आधुनिक तकनीकों और कुशल पायलटों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। प्रिया अधिकारी का यह कदम आने वाली पीढ़ियों की उन बेटियों के लिए एक मजबूत नींव का काम करेगा जो एविएशन या डिफेंस सेक्टर में अपना करियर बनाना चाहती हैं।

उनकी इस सफलता ने यह भी रेखांकित किया है कि देश की आपदा प्रबंधन प्रणालियों में महिलाओं की भागीदारी को और अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए। संकट की हर घड़ी में जिस प्रकार का संयम और दूरदर्शिता प्रिया ने दिखाई, वह बड़े-बड़े प्रोफेशनल्स के लिए एक सीख है।

निष्कर्ष: अदम्य साहस को सलाम

नेपाल की इस भीषण बाढ़ ने भले ही कई जिंदगियों को लील लिया हो और लाखों लोगों को बेघर कर दिया हो, लेकिन कैप्टन प्रिया अधिकारी जैसी शख्सियतों ने यह उम्मीद कायम रखी है कि इंसानियत और जज्बे के आगे बड़ी से बड़ी आपदा भी घुटने टेकने पर मजबूर हो जाती है। छह दिनों में 100 रेस्क्यू मिशनों को पूरा करने वाली यह 'लेडी कैप्टन' आज हर भारतीय और नेपाली नागरिक के दिल में एक खास जगह बना चुकी है। उनकी यह कहानी आने वाले कई सालों तक लोगों को प्रेरित करती रहेगी।

About the Author

ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor (विदेश खबरें)

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

Read More