पुणे शहर की सड़कों पर रेंगते वाहनों और घंटों ट्रैफिक जाम में फंसने वाले नागरिकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और औद्योगिक केंद्र कहे जाने वाले पुणे में यातायात की चिरपरिचित समस्या का स्थायी समाधान ढूंढने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। पुणे महानगरपालिका (मनपा) की स्थायी समिति ने बहुप्रतीक्षित हाई कैपेसिटी मास ट्रांजिट रूट (HCMTR) परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के भारी-भरकम प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के साथ ही इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने की रफ्तार काफी तेज हो गई है।
2,634 करोड़ रुपये के भारी-भरकम मुआवजे को मंजूरी
पुणे शहर के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखने वाले इस रिंग रोड जैसे कॉरीडोर के लिए जमीन अधिग्रहण करना एक बेहद जटिल और खर्चीला काम था। इसे अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। ताजा प्रशासनिक अपडेट के मुताबिक, HCMTR परियोजना के लिए कुल 4.98 लाख वर्गमीटर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने और जमीनों के मालिकों को उचित मुआवजा देने के लिए लगभग 2,634 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि का आवंटन यह साफ करता है कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन इस प्रोजेक्ट को लेकर कितने गंभीर हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठकों और समीक्षाओं के बाद महानगरपालिका ने इस पूरी प्रक्रिया में तेजी लाई है। मनपा ने जमीन अधिग्रहण से जुड़े तमाम जरूरी प्रस्ताव अब जिला कलेक्टर कार्यालय को आधिकारिक तौर पर सौंप दिए हैं, ताकि कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके।
पुणे के इन 15 प्रमुख इलाकों से होकर गुजरेगा HCMTR
यह हाई कैपेसिटी मास ट्रांजिट रूट पुणे के नक्शे पर एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यह रूट शहर के लगभग आधे हिस्से को आपस में जोड़ेगा, जिससे शहर के भीतर की यात्रा मिनटों में तय की जा सकेगी। योजना के अनुसार, यह कॉरीडोर शहर के कुल 15 अति-व्यस्त और प्रमुख इलाकों से होकर गुजरेगा। आइए जानते हैं कि कौन-से इलाके इस रूट के दायरे में आएंगे:
- बोपोडी और औंध
- भांबुर्डा और एरंडवणे
- कोथरूड और हिंगणे
- पर्वती और मुंजेरी
- वानवड़ी और हडपसर
- मुंढवा और वडगांव शेरी
- लोहगांव, येरवडा और धानोरी
इन तमाम इलाकों के जुड़ने से पुणे के पूर्वी छोर से पश्चिमी छोर और उत्तरी हिस्से से दक्षिणी हिस्से तक की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा। प्रस्तावित कॉरीडोर की कुल लंबाई विभिन्न तकनीकी विवरणों में लगभग 35 से 43 किलोमीटर के बीच बताई गई है, जो शहर के चारों तरफ एक मजबूत यातायात कवच का काम करेगी।
सरकारी और निजी जमीनों का होगा समानांतर अधिग्रहण
किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी चुनौती जमीन की उपलब्धता होती है। HCMTR के मामले में प्रशासन ने एक बेहद व्यावहारिक रणनीति अपनाई है। उपलब्ध प्रोजेक्ट डिटेल्स के मुताबिक, इस रूट के रास्ते में आने वाली जमीनों का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही विभिन्न सरकारी विभागों के पास उपलब्ध है। इस मार्ग की योजना मौजूदा सड़कों, नालों, नहरों, नदी पार करने वाले हिस्सों के अलावा वन भूमि, खुली जमीनों, ग्रीनफील्ड क्षेत्रों, रेलवे भूमि और कुछ पहले से निर्मित हिस्सों से होकर गुजरने की है।
पुराने तकनीकी ब्रेकअप के अनुसार, इस रूट के अलग-अलग हिस्सों की लंबाई क्रमशः 17.8 किमी, 5.28 किमी, 5.34 किमी और लगभग 7.55 किमी तय की गई है। पुणे मनपा की योजना के तहत विभिन्न सरकारी विभागों के बीच जमीन का आपसी हस्तांतरण (Land Transfer) तेजी से किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, जिन जगहों पर निजी जमीनों की आवश्यकता है, उनके अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी इसके समानांतर चलाया जा रहा है ताकि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले जमीन की कोई कमी न रहे।
अक्टूबर 2026 में आ सकता है निर्माण कार्य का टेंडर
जैसे-जैसे जमीन अधिग्रहण की फाइलें आगे बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे आम जनता और निवेशकों की निगाहें निर्माण टेंडर पर टिक गई हैं। प्रशासनिक गलियारों से मिल रही जानकारी के अनुसार, अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक चलता रहा, तो इसी साल अक्टूबर 2026 में इस मेगा प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के लिए टेंडर जारी किए जा सकते हैं।
हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि टेंडर जारी होने की अंतिम तिथि पूरी तरह से आगामी प्रशासनिक मंजूरियों, भूमि हस्तांतरण की गति और कानूनी प्रक्रियाओं की प्रगति पर निर्भर करेगी। पिछले महीने यानी 28 अगस्त को मनपा आयुक्त और जिला कलेक्टर की संयुक्त अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक में यह साफ निर्देश दिए गए थे कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े सभी प्रस्ताव तुरंत कलेक्टर ऑफिस को भेजे जाएं, जिसके बाद से काम में तेजी आई है।
कानूनी प्रावधान और मुआवजा वितरण की क्या है प्रक्रिया?
इस पूरी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और कानूनी दायरे में रहकर की जा रही है। इसके लिए 'राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्युजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिettlement एक्ट, 2013' (Land Acquisition Act, 2013) और 'महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम, 1966' की धारा 126 को आधार बनाया गया है।
नियमों के मुताबिक, 2013 के कानून की धारा 19 की अधिसूचना जारी होने से पहले अनुमानित मुआवजे की 30 प्रतिशत राशि जमा करने का प्रावधान होता है। हालांकि, इस मामले में जिला प्रशासन ने एक बड़ी राहत दी है। जिला प्रशासन ने कहा है कि पूरी मुआवजा राशि अंतिम अवॉर्ड (Final Award) घोषित होने के समय जमा की जा सकती है, जिससे शुरुआती दौर में ही भारी-भरकम 30 प्रतिशत राशि जमा करने का तत्काल वित्तीय दबाव प्रशासन पर नहीं आएगा।
पुणे के भविष्य के लिए क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट?
तेजी से बढ़ते आईटी हब, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और शैक्षणिक संस्थानों के केंद्र पुणे में वाहनों की संख्या पिछले एक दशक में बेतहाशा बढ़ी है। रिंग रोड और मेट्रो के साथ-साथ HCMTR प्रोजेक्ट पुणे के ट्रैफिक कंजेशन को तोड़ने का सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। जब यह रूट पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा, तो शहर के अंदरूनी हिस्सों में जाने से बचे बिना भारी वाहन और लंबी दूरी के यात्री शहर के बाहरी हिस्से से ही निकल सकेंगे।
स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और वाहन चालकों में इस परियोजना को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। बहरहाल, अब सभी की निगाहें अक्टूबर 2026 पर टिकी हैं, जब इस प्रोजेक्ट के धरातਲ पर उतरने की दिशा में टेंडर प्रक्रिया का अगला और सबसे बड़ा अध्याय शुरू होगा।