महाराष्ट्र की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों मतदाता सूची (Voter List) को लेकर एक नया बवंडर खड़ा हो गया है। राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, जिसके बाद से सियासी पारा चढ़ गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के युवा विधायक रोहित पवार ने इस पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और सीधे तौर पर चुनाव अधिकारियों से मुलाकात कर जवाब मांगा है।
आखिर ऐसा क्या है इस आंकड़े में, और क्यों विपक्ष इसे लेकर इतना हमलावर है? आइए इस पूरी खबर को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि इसके पीछे के तकनीकी और राजनीतिक मायने क्या हैं।
क्या है पूरा मामला और क्या कहते हैं आंकड़े?
महाराष्ट्र में मतदाताओं की सटीक जानकारी जुटाने और सूची को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का महाअभियान चलाया जा रहा है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में कुल मतदाताओं की संख्या 9,78,54,049 है।
इस अभियान के तहत अब तक 7,69,52,262 यानी लगभग 78.64 प्रतिशत मतदाताओं के फॉर्म पूरी तरह से डिजिटल किए जा चुके हैं। हालांकि, चिंता का विषय यह है कि कुल 2,07,93,916 (यानी 21.25 प्रतिशत) मतदाताओं के फॉर्म विभिन्न कारणों से जमा नहीं हो सके हैं।
फॉर्म जमा न होने के मुख्य कारण
- मतदाताओं का अपने घर पर न मिलना
- मतदाता की मृत्यु हो जाना
- स्थाई रूप से दूसरी जगह पलायन (शिफ्ट होना)
- एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होना
प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस काम को पूरा करने के लिए पूरे महाराष्ट्र में 1,00,253 बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को मैदान में उतारा गया था। राज्य के 36 जिलों में से 14 जिलों में एसआईआर का काम शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है, जबकि मुंबई के दोनों जिलों में भी यह काम 99 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
रोहित पवार के कड़े सवाल और आंकड़े
राकांपा विधायक रोहित पवार ने इन आंकड़ों पर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने चुनाव अधिकारियों से मिलकर यह जानना चाहा कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर लोगों के नाम सूची से क्यों और कैसे बाहर हो गए। मीडिया से बातचीत करते हुए रोहित पवार ने कुछ ऐसे आंकड़े रखे जिन्होंने सबको चौंका दिया:
"हटाए गए नामों में करीब 34 लाख मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया है, जबकि 76 लाख ऐसे परिवार हैं जिनसे संपर्क ही नहीं हो सका। इसके अलावा, लगभग 77 लाख मतदाताओं के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने अपना स्थायी पता बदल लिया है।"
पवार का कहना है कि यदि इन आंकड़ों की गहराई से जांच की जाए, तो आने वाले समय में यह संख्या और भी ज्यादा बढ़ सकती है, जिससे लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व यानी चुनाव की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है।
सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर सनसनीखेज आरोप
इस पूरे विवाद में नया मोड़ तब आया जब रोहित पवार ने एक खास सॉफ्टवेयर को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए मतदाताओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया—जैसे कि भाजपा की विचारधारा का समर्थन करने वाले, 'संदिग्ध' (Suspicious) और विरोधी मतदाता। पवार का दावा है कि उन्हें महाराष्ट्र की सभी 288 विधानसभा सीटों के आंकड़े मिले हैं, जिससे इस पूरी प्रक्रिया पर संदेह पैदा होता है। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों पर सत्ता पक्ष की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
अब आम जनता के पास क्या विकल्प है?
यदि आपका या आपके किसी परिचित का नाम इस प्रक्रिया में प्रभावित हुआ है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, मतदाता सूची का अंतिम मसौदा संबंधित जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
- नाम चेक करें: सबसे पहले जिला प्रशासन की वेबसाइट पर जाकर मतदाता सूची में अपना नाम जांच लें।
- फॉर्म 6 भरें: यदि आपका नाम सूची से गायब है या किसी कारणवश छूट गया है, तो आप नया नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 जमा कर सकते हैं।
- दावे और आपत्तियां: एसआईआर के इस चरण में नागरिकों को अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा अधिकार दिया गया है।
निष्कर्ष: चुनावी राज्यों में मतदाता सूची का शुद्ध होना बेहद जरूरी है, लेकिन 2 करोड़ से ज्यादा फॉर्म्स का जमा न होना एक बहुत बड़ा आंकड़ा है। यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़ा है, बल्कि हर एक नागरिक के मतदान के अधिकार से भी जुड़ा हुआ है। चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आगे भी तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: महाराष्ट्र में SIR अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A1: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से अद्यतन (Updated), त्रुटिमुक्त और पारदर्शी बनाना है, ताकि फर्जी या दोहरी प्रविष्टियों को हटाया जा सके।
Q2: अगर मेरा नाम मतदाता सूची से कट गया है, तो मैं क्या करूं?
A2: यदि आपका नाम सूची में नहीं है, तो आप 'फॉर्म 6' भरकर अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
Q3: कितने प्रतिशत मतदाताओं के फॉर्म अभी तक डिजिटल हो चुके हैं?
A3: चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में लगभग 78.64 प्रतिशत मतदाताओं के फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं, और शेष प्रक्रिया तेजी से जारी है।