संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी (UPSC) की परीक्षाओं की शुचिता और समय की पाबंदी जगजाहिर है, लेकिन कई बार यह कड़ाई उन युवाओं के लिए क्रूर मजाक बन जाती है जो वर्षों तक जी-तोड़ मेहनत करते हैं। रविवार को महाराष्ट्र के नासिक शहर में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां महज दो से तीन मिनट की देरी ने कई युवाओं के महीनों और सालों के सपनों को एक झटके में तोड़ दिया। परीक्षा केंद्र के बाहर का यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने के लिए काफी था।
के.वी.एन. नाईक कॉलेज केंद्र पर मंगा हंगामा
घटना नासिक के प्रतिष्ठित के.वी.एन. नाईक कॉलेज परीक्षा केंद्र की है, जहां देश की दो बेहद प्रतिष्ठित परीक्षाएं—संयुक्त रक्षा सेवाएं यानी सीडीएस (CDS-2) और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी एवं नौसेना अकादमी परीक्षा (NDA-NA-2) आयोजित की जा रही थीं। सुबह जब परीक्षा का दौर शुरू होने वाला था, उससे ठीक पहले केंद्र के बाहर अचानक तनाव और चीख-पुकार का माहौल बन गया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, आयोग द्वारा परीक्षा के लिए सुबह 9:30 बजे का कड़ा रिपोर्टिंग समय तय किया गया था। लेकिन शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था और खराब सड़कों के जाल में फंसे कुछ छात्र जब तय समय से बमुश्किल 2 से 3 मिनट की देरी से केंद्र के मुख्य द्वार पर पहुंचे, तो उन्हें अंदर जाने से साफ रोक दिया गया। गार्ड्स और केंद्र प्रबंधन ने यूपीएससी के बेहद सख्त नियमों का हवाला देते हुए लोहे के गेट बंद कर दिए और तमाम मिन्नतों के बावजूद किसी भी छात्र को भीतर कदम नहीं रखने दिया।
अभिभावकों का फूटा गुस्सा, खड़े किए गंभीर सवाल
गेट बंद होने के बाद बाहर खड़े छात्रों और उनके साथ आए अभिभावकों का सब्र टूट गया। देखते ही देखते परीक्षा केंद्र के बाहर भारी हंगामा शुरू हो गया। आक्रोशित अभिभावकों और छात्रों ने केंद्र प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
छात्रों और उनके परिजनों का तर्क था कि देरी उनकी लापरवाही की वजह से नहीं, बल्कि नासिक शहर की खराब सड़कों, जानलेवा गड्ढों और सुबह के वक्त लगे भारी ट्रैफिक जाम की वजह से हुई थी। वे मात्र कुछ सेकेंड से लेकर दो मिनट की देरी से पहुंचे थे। अभिभावकों ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा, 'जब शहर के ही अन्य परीक्षा केंद्रों पर थोड़ा लचीला रुख अपनाते हुए 9:45 बजे तक प्रवेश की अनुमति दी जा रही थी, तो इसी विशेष केंद्र पर इतना क्रूर और कड़ा रुख क्यों अपनाया गया?'
पुलिस बल हुआ तैनात, मची अफरातफरी
हंगामा इतना बढ़ गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और स्थिति को नियंत्रित करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया। विवाद के तूल पकड़ने की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को टाला जा सके। तनाव के इस माहौल के बीच अंदर परीक्षा दे रहे छात्रों पर भी मानसिक दबाव साफ महसूस किया गया।
प्रशासन का कड़ा रुख: नियमों से समझौता नहीं
इस पूरे विवाद के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन ने अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट किया है। नासिक के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने मीडिया और जनता के सामने स्थिति साफ करते हुए कहा कि यूपीएससी परीक्षाओं की गरिमा और नियम बेहद कड़े होते हैं। इन परीक्षाओं का पूरा नियंत्रण और संचालन सीधे केंद्रीय स्तर से होता है, जिसमें स्थानीय प्रशासन या केंद्र प्रबंधन के पास अपने स्तर पर नियमों में फेरबदल करने का कोई अधिकार नहीं होता।
जिलाधिकारी ने छात्रों द्वारा ट्रैफिक और सड़कों की खराबी के दिए जा रहे तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि जो अभ्यर्थी समय की पाबंदी का पालन करते हुए सही समय पर पहुंचे थे, उन्हें बिना किसी बाधा के प्रवेश दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि तय समय सीमा समाप्त होने के बाद गेट बंद करना आयोग के दिशानिर्देशों का अनिवार्य हिस्सा है।
कड़े नियमों के बावजूद नासिक में रिकॉर्ड उपस्थिति
एक तरफ जहां कुछ छात्रों के लिए यह दिन बेहद निराशाजनक और दुखद रहा, वहीं दूसरी तरफ नासिक केंद्र पर परीक्षा को लेकर कुल मिलाकर गजब का उत्साह और अनुशासन भी देखने को मिला। कड़े नियमों और विवादों के साये के बीच नासिक केंद्र पर इस बार उम्मीद से कहीं ज्यादा उपस्थिति दर्ज की गई।
आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो नासिक केंद्र के लिए कुल 4,375 परीक्षार्थियों ने अपना पंजीकरण कराया था। इनमें से 3,113 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 1,262 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। आमतौर पर इस तरह की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में उपस्थिति 50 प्रतिशत के आसपास ही सिमट कर रह जाती है, लेकिन नासिक में इस बार यह आंकड़ा उछलकर 71.15 प्रतिशत तक पहुंच गया।
भविष्य के लिए एक बड़ा सबक
यह घटना देश के उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ा और कड़ा सबक है जो भविष्य में सिविल सेवा या रक्षा सेवाओं की इन प्रतिष्ठित परीक्षाओं में बैठने का सपना देख रहे हैं। यूपीएससी जैसी संस्थाओं में एक सेकंड की भी देरी कितनी भारी पड़ सकती है, इसकी बानगी नासिक की इस घटना ने साफ कर दी है। यातायात की समस्याएं अपनी जगह हैं, लेकिन परीक्षा के दिन हर छात्र को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे तमाम बाधाओं को पार करते हुए तय समय से कम से कम आधा घंटा पहले अपने गंतव्य तक पहुंच जाएं, ताकि ऐसी किसी भी दिल तोड़ने वाली स्थिति का सामना न करना पड़े।