Breaking
► महाराष्ट्र में अल-नीनो और सूखे का गंभीर संकट, 75 फीसदी फसलें तबाह ► अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 26 प्रत्याशी मैदान में, बागियों ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी ► क्रिकेट जगत में हलचल: आरोन फिंच ने की वनडे विश्व कप 2027 के सेमीफाइनल की भविष्यवाणी ► Aaj Ka Panchang 10 October 2026: सर्वपितृ और शनिश्चरी अमावस्या पर श्राद्ध का सही समय और राहुकाल ► मतदाता सूची में नाम जुड़वाने को लेकर निर्वाचन आयोग का बड़ा बयान, जानिए पूरी प्रक्रिया ► अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल: सऊदी गठबंधन का यमन में बड़ा सैन्य हमला, पुतिन और ट्रंप के बीच ईरान पर मंथन ► दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट का बड़ा असर, स्कूल-कॉलेज और मेट्रो को लेकर क्या है अपडेट? ► मुकेश कुमार शर्मा का जनसंपर्क अभियान, छित्तमपुर कोटी में मिला समर्थन ► बिग बॉस 20 में आम्रपाली दुबे की बॉडी शेमिंग पर भड़कीं बहन, मोटू-पतलू कमेंट पर मचा बवाल ► तमिलनाडु उपचुनाव में हार के बाद स्टालिन का बड़ा हमला, विजय की पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप ► महाराष्ट्र में अल-नीनो और सूखे का गंभीर संकट, 75 फीसदी फसलें तबाह ► अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 26 प्रत्याशी मैदान में, बागियों ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी ► क्रिकेट जगत में हलचल: आरोन फिंच ने की वनडे विश्व कप 2027 के सेमीफाइनल की भविष्यवाणी ► Aaj Ka Panchang 10 October 2026: सर्वपितृ और शनिश्चरी अमावस्या पर श्राद्ध का सही समय और राहुकाल ► मतदाता सूची में नाम जुड़वाने को लेकर निर्वाचन आयोग का बड़ा बयान, जानिए पूरी प्रक्रिया ► अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल: सऊदी गठबंधन का यमन में बड़ा सैन्य हमला, पुतिन और ट्रंप के बीच ईरान पर मंथन ► दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट का बड़ा असर, स्कूल-कॉलेज और मेट्रो को लेकर क्या है अपडेट? ► मुकेश कुमार शर्मा का जनसंपर्क अभियान, छित्तमपुर कोटी में मिला समर्थन ► बिग बॉस 20 में आम्रपाली दुबे की बॉडी शेमिंग पर भड़कीं बहन, मोटू-पतलू कमेंट पर मचा बवाल ► तमिलनाडु उपचुनाव में हार के बाद स्टालिन का बड़ा हमला, विजय की पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप

अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज, हर 5 महीने में बढ़ रहा नया 1 ट्रिलियन

अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज, हर 5 महीने में बढ़ रहा नया 1 ट्रिलियन

क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहे जाने वाले देश पर इतना कर्ज हो सकता है कि आंकड़े देखकर ही सिर चकरा जाए? जी हां, अमेरिका ने कर्ज के मामले में एक ऐसा नया और डरावना रिकॉर्ड बना दिया है, जिसने पूरी दुनिया के अर्थशास्त्रियों की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज (US National Debt) पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है।

कछुए की चाल नहीं, रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रहा है कर्ज

आंकड़ों पर गौर करें तो यह स्थिति और भी डरावनी नजर आती है। पिछले कुछ सालों से अमेरिकी कर्ज में जिस तेजी से इजाफा हुआ है, उसने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। स्थिति यह है कि अब हर 5 से 6 महीने के भीतर अमेरिका के कुल कर्ज में 1 ट्रिलियन डॉलर (1 लाख करोड़ डॉलर) का भारी-भरकम इजाफा हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रफ्तार आने वाले समय में वैश्विक बाजारों के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकती है। जिस देश की करेंसी में पूरी दुनिया व्यापार करती है, अगर उसी देश की वित्तीय सेहत डगमगा जाए, तो ग्लोबल इकोनॉमी का क्या होगा—यह सवाल अब हर बड़े मंच पर पूछा जाने लगा है।

क्यों बढ़ रहा है अमेरिका पर यह बेतहाशा कर्ज?

इस भारी-भरकम कर्ज के पीछे कई मुख्य कारण जिम्मेदार हैं:

  • सरकारी खर्चों में भारी बढ़ोतरी: अमेरिका सरकार का बजट घाटा लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि टैक्स से होने वाली कमाई की तुलना में खर्च कई गुना ज्यादा है।
  • ब्याज दरों का असर: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में किए गए बदलावों के कारण सरकार को पुराने कर्ज पर अधिक ब्याज चुकाना पड़ रहा है।
  • आपातकालीन राहत पैकेज: पिछले कुछ वर्षों में महामारी और अन्य आर्थिक संकटों से निपटने के लिए सरकार द्वारा जो भारी राहत पैकेज बांटे गए थे, उन्होंने ट्रेजरी पर भारी दबाव डाला है।
  • सैन्य और सामरिक खर्च: वैश्विक तनाव के इस दौर में रक्षा बजट और विदेश नीति से जुड़े खर्चों में कोई कमी नहीं आई है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर इसका क्या असर होगा?

आम तौर पर लोगों को लगता है कि अमेरिका का कर्ज वहां की सरकार की समस्या है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। वैश्विक अर्थव्यवस्था आपस में गहराई से जुड़ी हुई है। जब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कर्ज के दलदल में फंसती है, तो इसका असर भारत समेत तमाम उभरते हुए बाजारों पर भी पड़ता है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं:

  • डॉलर की मजबूती और स्थिरता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
  • कच्चे तेल (Crude Oil) और सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
  • भारतीय शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों (FIIs) की गतिविधियों पर इसका सीधा मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकता है।
  • ग्लोबल मंदी (Global Recession) का खतरा और अधिक गहरा सकता है।
"यह केवल एक नंबर नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि मौजूदा वित्तीय नीतियां लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हैं। अगर समय रहते अमेरिका ने अपने खर्चों पर लगाम नहीं लगाई, तो इसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।" - वरिष्ठ अर्थशास्त्री

आगे क्या है अमेरिकी सरकार का रुख?

वाशिंगटन में बैठे नीति-निर्माता लगातार इस बात पर बहस कर रहे हैं कि 'डेथ सीलिंग' (Debt Ceiling) को कैसे मैनेज किया जाए। हालांकि, राजनीतिक खींचतान के चलते किसी भी ठोस नतीजे पर पहुंचना मुश्किल हो रहा है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों ही एक-दूसरे पर फिजूलखर्ची का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन कर्ज का ग्राफ नीचे आने के बजाय लगातार ऊपर की ओर ही भाग रहा है।

फिलहाल, 40 ट्रिलियन डॉलर का यह आंकड़ा अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी की घंटी है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका इस आर्थिक चक्रव्यूह से बाहर निकल पाता है या यह कर्ज का पहाड़ और अधिक बड़ा रूप लेता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज वर्तमान में कितना हो गया है?

Ans: अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।

Q2: अमेरिका का कर्ज इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है?

Ans: सरकारी खर्चों में लगातार वृद्धि, भारी बजट घाटा, ऊंचे ब्याज दर और विभिन्न राहत पैकेजों के कारण यह कर्ज रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रहा है।

Q3: क्या अमेरिकी कर्ज का असर भारत पर भी पड़ेगा?

Ans: हां, वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में किसी भी बड़े संकट का असर भारतीय शेयर बाजार, मुद्रा (रुपया-डॉलर) और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।

About the Author

काव्या त्रिपाठी

काव्या त्रिपाठी

Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

काव्या त्रिपाठी की पूरी प्रोफाइल पढ़ें →

अगली खबर पढ़ें:

कश्मीर पर अमेरिकी राजनयिक के एक बयान से हिला पाकिस्त... →