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अमेरिकी सीनेट से रूस प्रतिबंध बिल पास: भारत और चीन पर मंडराया 100% टैरिफ का खतरा, समझें पूरा गणित

अमेरिकी सीनेट से रूस प्रतिबंध बिल पास: भारत और चीन पर मंडराया 100% टैरिफ का खतरा, समझें पूरा गणित

वाशिंगटन से एक ऐसी वैश्विक आर्थिक खबर सामने आ रही है, जो भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकती है। अमेरिकी सीनेट ने रूस पर शिकंजा कसने के इरादे से एक बेहद कड़ा प्रतिबंध विधेयक (Sanctions Bill) पास कर दिया है। इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल और अन्य सामान खरीदने वाले देशों पर भारी-भरकम 100% तक का टैरिफ लगाने का रास्ता साफ हो गया है। इस कदम से भारत और चीन जैसे बड़े आयातक देशों की चिंताएं अचानक बढ़ गई हैं।

सीनेट में 86-11 के भारी अंतर से पारित हुआ बिल

अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट में इस विधेयक को भारी जनसमर्थन मिला। कुल 100 सदस्यों में से 86 सांसदों ने इस बिल के पक्ष में मतदान किया, जबकि महज 11 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट डाला।

यह बिल रिपब्लिकन पार्टी के प्रभावशाली सीनेटर लिंडसे ग्राहम (Lindsey Graham) के सम्मान में नामित किया गया है, जो यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही रूस के खिलाफ कड़े रुख के पैरोकार रहे हैं। सीनेटर ग्राहम का मानना है कि जब तक रूस को आर्थिक रूप से पंगु नहीं बनाया जाएगा, तब तक वह अपनी सैन्य आक्रामकता नहीं रोकेगा।

भारत और चीन निशाने पर क्यों?

फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद भारत और चीन ने रूस से डिस्काउंटेड (रियायती दरों पर) कच्चा तेल खरीदना जारी रखा। भारत के लिए रूस कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया, जिससे देश को अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।

हालांकि, अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों का तर्क है कि भारत और चीन द्वारा रूसी ऊर्जा की खरीद से मॉस्को के 'वॉर चेस्ट' (युद्ध कोष) को फंडिंग मिल रही है। नया अमेरिकी बिल इसी 'लूपहोल' को बंद करने के लिए सेकेंडरी प्रतिबंधों की वकालत करता है।

"रूस से व्यापार कर उसकी युद्ध मशीन को सहारा देने वाले किसी भी देश को अब अमेरिकी बाजार में व्यापार करने के लिए 100% तक की भारी पेनल्टी चुकानी होगी।" - अमेरिकी विधायी सूत्रों का संदेश

भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर हो सकता है?

यदि अमेरिकी प्रशासन इस विधेयक के तहत भारत पर 100% टैरिफ लगाने का सख्त फैसला लेता है, तो इसके गंभीर आर्थिक नतीजे हो सकते हैं:

  • निर्यात पर संकट: अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। आईटी सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और जेम्स-ज्वेलरी के भारतीय निर्यात पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी: यदि भारत रूसी तेल की खरीद कम करता है, तो उसे मिडिल ईस्ट से महंगा क्रूड ऑयल खरीदना पड़ेगा, जिससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • कूटनीतिक तनाव: नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता और क्वाड (QUAD) जैसे मंचों पर रणनीतिक तालमेल प्रभावित हो सकता है।

आगे क्या होगा? विदेश नीति की बड़ी परीक्षा

अब इस विधेयक को अंतिम रूप देने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। जानकारों का मानना है कि भारत सरकार अपनी गुटनिरपेक्ष और ऊर्जा सुरक्षा नीति के तहत वाशिंगटन के साथ बैकचैनल कूटनीति के जरिए छूट (Exemption) हासिल करने की कोशिश करेगी। भारत हमेशा से यह रुख अपनाता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद देश की 1.4 अरब आबादी के राष्ट्रीय हित पर आधारित है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लागू हो जाएगा?

नहीं, बिल सीनेट से पास हुआ है। इसे पूरी तरह लागू करने से पहले अमेरिकी प्रशासन की कार्यकारी मंजूरी और रणनीतिक समीक्षा की आवश्यकता होगी। भारत को छूट मिलने की संभावनाएं भी खुली हैं।

2. अमेरिकी सीनेट में इस बिल के पक्ष में कितने वोट पड़े?

सीनेट में इस विधेयक को 86 पक्ष में और केवल 11 विपक्ष में वोटों के साथ प्रचंड बहुमत से मंजूरी मिली।

3. यह विधेयक किस अमेरिकी सीनेटर से जुड़ा है?

यह बिल रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम (Lindsey Graham) के नाम पर तैयार किया गया है, जो यूक्रेन के समर्थन में लगातार मुखर रहे हैं।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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