वाराणसी की पावन धरती पर रिवर-डे के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में गंगा पुत्रों ने अपनी आवाज़ खुलकर देश के नीति निर्धारकों के सामने रखी। दशाश्वमेध घाट पर मां गंगा की अविरल धारा और भव्य संध्या आरती की पृष्ठभूमि में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी और निषाद समाज के लोगों के बीच सीधा संवाद देखने को मिला। इस दौरान नाविकों, मछुआरों और निषाद समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी आजीविका से जुड़ी कई गंभीर और व्यावहारिक समस्याएं मंत्री के समक्ष रखीं, जिन पर विस्तार से चर्चा हुई।
दशाश्वमेध घाट पर हुआ संवाद, उठीं ज़मीनी समस्याएं
गंगा की लहरों पर अपनी नावों के सहारे जीवनयापन करने वाले नाविक समुदाय के लिए यह संवाद अपनी बात रखने का एक बड़ा मंच साबित हुआ। कार्यक्रम के दौरान नाविकों ने सबसे बड़ा मुद्दा नाव संचालन के लिए लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाने और गोताखोरों की स्थायी नियुक्ति का उठाया। वक्ताओं ने कहा कि गंगा में पर्यटन और धार्मिक श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में सुरक्षा और रोजगार दोनों दृष्टियों से नियमों को और अधिक पारदर्शी तथा मददगार बनाया जाना चाहिए।
केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने सभी की बातों को बेहद गंभीरता के साथ सुना। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार गंगा और उससे जुड़े हर वर्ग के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नाविकों की समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय अधिकारियों को उचित दिशा-निर्देश दिए जाएंगे ताकि उनकी आजीविका पर किसी प्रकार का संकट न आए और पर्यटकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
रोजगार और सुरक्षा पर केंद्रित रही चर्चा
रिवर-डे के मौके पर आयोजित इस बैठक में केवल लाइसेंस ही नहीं, बल्कि जल पुलिस के रवैये, नावों के रखरखाव और मछुआरा समाज के पारंपरिक अधिकारों पर भी खुलकर चर्चा हुई। स्थानीय नाविकों का कहना था कि प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय होने से गंगा पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा और सुरक्षा के इंतजाम भी पुख्ता होंगे।
- लाहसेंस प्रक्रिया: नाव चालकों के लिए लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को जटिलताओं से मुक्त करने की मांग।
- गोताखोरों की नियुक्ति: आपातकालीन स्थिति और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए घाटों पर प्रशिक्षित गोताखोरों की स्थायी तैनाती।
- आजीविका सुरक्षा: पारंपरिक पेश से जुड़े लोगों को आधुनिक सुविधाओं और योजनाओं से जोड़ने पर जोर।
- प्रशासनिक सहयोग: जल पुलिस और नाविकों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल।
गंगा संस्कृति और नाविक समाज का अटूट रिश्ता
काशी की पहचान केवल उसके मंदिरों और गलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की संस्कृति का एक बड़ा हिस्सा गंगा और उस पर चलने वाली नौकाओं से जुड़ा है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक जब दशाश्वमेध घाट से नाव की सवारी करते हैं, तो उन्हें काशी का असली आध्यात्मिक स्वरूप दिखाई देता है। ऐसे में नाविक समुदाय इस पूरी पर्यटन अर्थव्यवथा की रीढ़ माना जाता है।
मंत्री के साथ हुई इस बैठक को स्थानीय स्तर पर काफी सकारात्मक माना जा रहा है। समुदाय के लोगों को उम्मीद है कि इस संवाद के बाद उनकी समस्याओं का जमीनी स्तर पर जल्द ही कोई ठोस समाधान निकलेगा। सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद लोकतंत्र की असली खूबी है, और जब बात मां गंगा के तट पर बैठे इन मेहनतकश लोगों की हो, तो यह संवाद और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
आगे की राह और प्रशासनिक कदम
बैठक के समापन पर केंद्रीय मंत्री ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ भी समन्वय बैठक की रूपरेखा पर चर्चा की। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नाविकों द्वारा उठाई गई इन मांगों पर प्रशासन किस प्रकार से त्वरित कार्रवाई करता है। फिलहाल, काशी के घाटों पर इस संवाद की चर्चा जोरों पर है और हर कोई इसके सकारात्मक परिणामों की प्रतीक्षा कर रहा है।