वाराणसी के ऐतिहासिक और घनी आबादी वाले दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण का महाअभियान अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की संयुक्त टीमों ने सोमवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत एक और बड़ा कदम उठाते हुए शेष बचे भवनों पर हथौड़ा और बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई के साथ ही इलाके के नक्शे को पूरी तरह बदलने की यह प्रक्रिया अपने निर्णायक मोड़ पर आ गई है, जिससे आने वाले दिनों में स्थानीय लोगों और पर्यटकों को आवागमन में भारी राहत मिलने की उम्मीद है।
अंतिम चरण की कार्रवाई: पांच और भवन जमींदोज
सोमवार को सुबह तड़के ही प्रशासन की टीमें पुलिस बल के साथ दालमंडी क्षेत्र में एक्टिव हो गई थीं। तय योजना के मुताबिक, सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे पांच शेष भवनों को तोड़ने की अंतिम कार्रवाई शुरू की गई। कुछ संकरे और अंदरूनी हिस्सों में जहां भारी मशीनों का पहुंचना संभव नहीं था, वहां मजदूरों ने हथौड़ों और अन्य उपकरणों की मदद से दीवारों को गिराया। वहीं, मुख्य मार्ग पर बुलडोजर की गरज के साथ अतिक्रमण के दायरे वाले हिस्सों को तेजी से हटाया गया।
पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, दालमंडी के इस बहुप्रतीक्षित चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत अब तक कुल 172 से अधिक भवनों या उनके हिस्सों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा चुकी है। सोमवार को जिन पांच भवनों पर कार्रवाई हुई, वे इस परियोजना के अंतिम चरण का हिस्सा हैं। विभाग का यह भी स्पष्ट कहना है कि किसी भी संपत्ति को बिना मुआवजा दिए या कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना हाथ नहीं लगाया गया है। जिन भवन स्वामियों के कागजात और अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, उन्हें नियमानुसार निर्धारित मुआवजा राशि पहले ही वितरित की जा चुकी है।सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और ड्रोन से पैनी नजर
ऐतिहासिक और संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण प्रशासन किसी भी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं था। ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। मौके पर भारी संख्या में पीएसी और सिविल पुलिस बल के जवानों की तैनाती की गई थी, ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे।
सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रहे एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रशासन पूरी पारदर्शिता और शांतिपूर्ण तरीके से अंतिम पांच भवनों को हटाने की कार्रवाई को अंजाम दे रहा है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए न केवल जमीन पर पुलिस बल मुस्तैद था, बल्कि आसमान से ड्रोन के जरिए पूरे क्षेत्र की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखी जा रही थी। ड्रोन कैमरों की मदद से भीड़भाड़ वाले इलाकों और छतों की लगातार मॉनिटरिंग की गई, जिससे पूरी कार्रवाई बिना किसी व्यवधान के शांतिपूर्वक आगे बढ़ी।
क्या है दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना का उद्देश्य?
वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। दालमंडी एक ऐसा व्यापारिक केंद्र और संकरा मार्ग है जहां रोजाना हजारों की संख्या में लोगों का आना-जाना होता है। अतीत में संकीर्ण गलियों के कारण यहां एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड या अन्य आपातकालीन वाहन चाहकर भी समय पर नहीं पहुंच पाते थे।
इस सड़क चौड़ीकरण परियोजना के पूरा हो जाने से न सिर्फ जाम की विकराल समस्या से हमेशा के लिए निजात मिलेगी, बल्कि काशी आने वाले पर्यटकों और स्थानीय दुकानदारों व रहवासियों के लिए आवागमन बेहद सुगम और सुरक्षित हो जाएगा। स्थानीय निवासियों का भी एक बड़ा वर्ग इस विकास कार्य को सकारात्मक नजरिए से देख रहा है, हालांकि अपनों पुरखों की निशानी माने जाने वाले घरों के हिस्सों के टूटने का थोड़ा गम भी उनके चेहरों पर साफ झलक रहा है।
सोमवार को अंतिम भवनों के ध्वस्तीकरण का काम पूरा होने के बाद अब पीडब्ल्यूडी और नगर निगम की टीमेंजल्द ही मलबे को हटाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू करेंगी। मलबा साफ होने के बाद सड़क निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा। प्रशासन का दावा है कि तय समयसीमा के भीतर इस पूरे प्रोजेक्ट को धरातल पर उतार लिया जाएगा, जिससे काशी के इस व्यस्त बाजार का रूप पूरी तरह से बदल जाएगा।