वाराणसी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नगरी में श्री कृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की पावन तपोस्थली श्रीधर्मसंघ शिक्षा मंडल के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक श्रीमणि मंदिर, दुर्गाकुंड में तीन दिवसीय भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का शुभारंभ हो चुका है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि अपनी भव्यता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए भी पूरे क्षेत्र में विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
भव्य सजावट और आकर्षण का केंद्र बनीं झांकियां
उत्सव को लेकर पूरे मंदिर परिसर को दूधिया प्रकाश फैलाने वाली विद्युत झालरों, रंग-बिरंगे फूलों और मनमोहक सजावट से दुल्हन की तरह सजाया गया है। मंदिर समिति से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रेरणादायी प्रसंगों को दर्शाती हुई दस से अधिक अत्यंत मनमोहक झांकियां तैयार की गई हैं। इन झांकियों के माध्यम से कन्हैया के बाल्यकाल से लेकर उनके संपूर्ण जीवन दर्शन को बहुत ही सुंदर ढंग से जीवंत किया गया है।
धर्मसंघ के महामंत्री पंडित जगजीतन पांडेय ने जानकारी दी है कि ये झांकियां उत्सव के तीनों दिनों तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुली रहेंगी। मंदिर में आने वाले भक्त इन झांकियों के जरिए भगवान कृष्ण की लीलाओं के दर्शन कर धन्य हो रहे हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला
तीन दिनों तक चलने वाले इस त्रिदिवसीय अनुष्ठान (3 सितंबर से 5 सितंबर 2026) के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ उच्च कोटि के संगीत, नृत्य और भजन-कीर्तन का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।
पहला दिन: भक्ति संगीत और भजन-कीर्तन
उत्सव के पहले दिन शाम ढलते ही मंदिर परिसर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूब गया। स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक भजनों और संकीर्तन के माध्यम से ऐसा समां बांधा कि उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
दूसरा दिन: मुख्य जन्माष्टमी पर्व और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
उत्सव के मुख्य दिन यानी 4 सितंबर को सुबह से ही विविध धार्मिक आयोजनों का तांता लगा हुआ है। दिनभर चलने वाले इन कार्यक्रमों की रूपरेखा इस प्रकार है:
- शाम 04:00 बजे: ठाकुरजी की अत्यंत भव्य और अलौकिक झांकी सजाई जाएगी।
- शाम 05:00 बजे: कृष्ण एवं उनके सहयोगियों द्वारा मंत्रमुग्ध कर देने वाले भजनों की प्रस्तुति।
- शाम 07:00 बजे: प्रख्यात कलाकार अमृत मिश्र और उनके साथियों द्वारा कथक नृत्य पर आधारित एक आकर्षक नृत्य नाटिका पेश की जाएगी। इसके साथ ही शनिष ज्ञावली का मनमोहक बांसुरी वादन भी गूंजेगा।
- रात 09:00 बजे से मध्यरात्रि तक: सुप्रसिद्ध गायिका शैलबाला अपने सुरों से भगवान के चरणों में भजन और पारंपरिक बधाई गीत अर्पित करेंगी।
- मध्यरात्रि 12:00 बजे: धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज के पावन सानिध्य और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लाला का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
101 क्विंटल हलवे का महाप्रसाद और छप्पन भोग
वाराणसी के इस ऐतिहासिक जन्मोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यहां का महाप्रसाद है। बांके बिहारी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भव्य 'छप्पन भोग' अर्पित किया जाएगा। इसके अलावा, भक्तों के बीच वितरण के लिए विशेष रूप से 101 क्विंटल स्वादिष्ट हलवे का प्रसाद तैयार किया गया है, जिसे उत्सव में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।
जन्मोत्सव के इस विशेष अवसर पर ठाकुरजी का विभिन्न प्रकार के फलों के रस, दुर्लभ द्रव्यों और सुगंधित पुष्पों से 'फलोंदक' एवं 'पुष्पोदक' स्नान कराया जाएगा, जो इस अनुष्ठान को और अधिक पवित्र बनाता है।
तीसरे दिन मचेगी नंदोत्सव की धूम
जन्माष्टमी के अगले दिन यानी 5 सितंबर को मंदिर परिसर में 'नंदोत्सव' की धूम मचेगी। इस पावन अवसर पर पारंपरिक सोहर, बधाई गीत गाए जाएंगे और भक्त नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयकारों के साथ भगवान श्रीकृष्ण के प्रकट होने की खुशी मनाएंगे। धर्मसंघ के इस भव्य आयोजन में शामिल होने के लिए वाराणसी ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।