भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के पुरोधा रहे दिवंगत अशोक सिंघल के जीवन और उनके सपनों को नया आयाम देने के लिए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने पूरी तरह कमर कस ली है। आज शुक्रवार को नई दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू स्थित विश्व संवाद केंद्र में आयोजित एक महत्वपूर्ण संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि संगठन दिवंगत नेता के बताए मार्ग पर चलते हुए वेद, संस्कृत और समाज सेवा के कार्यों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाएगा।
आलोक कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अशोक सिंघल फाउंडेशन, संत समाज और देश के अन्य राष्ट्रवादी संगठनों के सहयोग से आने वाले पूरे वर्ष को 'जन्म शताब्दी वर्ष' के रूप में समर्पित किया जाएगा। इस दौरान उन तमाम अभियानों और रचनात्मक कार्यों को गति दी जाएगी, जो अशोक सिंघल के दिल के बेहद करीब थे और जिनके लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।
वेदों और संस्कृत के प्रचार-प्रसार को मिलेगी नई गति
संवाददाता सम्मेलन में आगे बोलते हुए विहिप अध्यक्ष ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अशोक सिंघल का वेदों के प्रति अगाध प्रेम जगजाहिर है। वह अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक वेदों के अध्ययन और इसके प्रसार में जुटे रहे। आलोक कुमार ने ओडिशा में स्थित स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के आश्रम का विशेष रूप से उल्लेख किया और बताया कि संगठन पहले से ही कई वेद विद्यालयों का संचालन कर रहा है।
उन्होंने कहा, "अशोक जी की यह इच्छा थी कि भारत की प्राचीन वैदिक परंपरा और संस्कृत भाषा का वैभव फिर से स्थापित हो। इसलिए, वेद और संस्कृत का प्रचार-प्रसार करना विश्व हिंदू परिषद के लिए हमेशा से सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रहा है और इस जन्म शताब्दी वर्ष में इसे एक जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा।"
गौ-वंश की रक्षा के लिए केंद्रीय कानून की मांग तेज
गौ-संवर्धन और गौहत्या के मुद्दों पर बोलते हुए आलोक कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश भर में मवेशियों की अंधाधुंध कटाई और गौहत्या किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। विहिप इस वर्ष गौ-रक्षा, गौ-संवर्धन और संपूर्ण देश में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाले केंद्रीय कानून (सेंट्रल एक्ट) की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी अभियान को और तेज करेगी। उन्होंने याद दिलाया कि इस दिशा में संगठन और संत समाज पहले से ही आंदोलित रहे हैं और अब इसे निर्णायक मोड़ पर ले जाने का समय आ गया है।
काशी और मथुरा को लेकर अब न्यायिक प्रक्रिया पर रहेगा फोकस
अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य और दिव्य मंदिर के निर्माण के साथ ही विहिप के ऐतिहासिक संकल्प का एक बड़ा चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इस सफलता के बाद अब संगठन का पूरा ध्यान काशी और मथुरा से जुड़े न्यायिक मामलों और कानूनी प्रक्रियाओं को गति देने पर है।
वर्ष 1984 में आयोजित पहली 'धर्म संसद' का जिक्र करते हुए आलोक कुमार ने कहा कि उस समय देश के पूज्य संतों ने अयोध्या, मथुरा और काशी की पुनर्प्राप्ति का एक ऐतिहासिक और अटूट संकल्प लिया था। अयोध्या का अध्याय पूरा होने के बाद, अब काशी और मथुरा के लिए भी संतों के उसी संकल्प को समयबद्ध और शांतिपूर्ण तरीके से कानूनी दायरे में रहते हुए साकार किया जाएगा।
धर्मांतरण के खिलाफ कड़े कानूनों का विस्तार और 'घर वापसी' अभियान
देश में चल रहे बलपूर्वक, छल, प्रलोभन या भय आधारित धर्मांतरण के मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विहिप अध्यक्ष ने कहा कि इस कुप्रथा को जड़ से समाप्त किया जाना राष्ट्र की अखंडता के लिए बेहद आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि विश्व हिंदू परिषद के निरंतर और कड़े प्रयासों का ही परिणाम है कि आज देश के कई भाजपा शासित राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कठोर कानून लागू हो चुके हैं। वर्तमान में विहिप देश के लगभग 850 प्रखंडों में सक्रिय रूप से 'घर वापसी' और धर्मांतरण की रोकथाम के संकल्प पर काम कर रही है। इस वर्ष इस अभियान को और अधिक व्यापक और प्रभावी बनाया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार के षड्यंत्र को सफल न होने दिया जाए।
अशोक सिंघल फाउंडेशन द्वारा विशेष स्मृति स्तंभों की स्थापना
दिवंगत नेता के योगदान को हमेशा के लिए जीवंत रखने के वास्ते 'अशोक सिंघल फाउंडेशन' ने एक अनूठी रूपरेखा तैयार की है। आलोक कुमार ने जानकारी दी कि देश के विभिन्न महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष जानकारी से युक्त भव्य 'स्मृति स्तंभ' स्थापित किए जाएंगे। इन स्तंभों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अशोक सिंघल के संघर्षपूर्ण जीवन, राम मंदिर आंदोलन और उनके सांस्कृतिक योगदान के बारे में विस्तार से जानने का अवसर मिलेगा।
27 सितंबर को भारत मंडपम में होगा भव्य जन्मशती समारोह का उद्घाटन
अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के इस ऐतिहासिक अवसर पर एक विशाल और भव्य मुख्य उद्घाटन समारोह आगामी 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के प्रतिष्ठित 'भारत मंडपम' में आयोजित किया जाएगा। इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत कई दिग्गज हस्तियां मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।
इस अवसर पर अशोक सिंघल के प्रेरणादायी जीवन, उनके संघर्षों और भारतीय संस्कृति के उत्थान में उनके योगदान को दर्शाने वाली एक वृहद पुस्तक प्रदर्शनी (बुक एग्जीबिशन) का भी आयोजन किया जाएगा, जो आगंतुकों के मुख्य आकर्षण का केंद्र होगी।
देशभर के 44 प्रांतों में होंगे विशिष्ट आयोजन
राष्ट्रीय राजधानी के अलावा विहिप के संगठनात्मक सभी 44 प्रांतों में आने वाले एक सप्ताह के भीतर विशाल सभाओं और विशिष्ट आयोजनों की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इन कार्यक्रमों में देश की कई बड़ी हस्तियां शिरकत करेंगी:
- नागपुर: यहां आयोजित होने वाले विशिष्ट कार्यक्रम में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे।
- लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
- गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में आयोजित होने वाले विशेष सत्र में हरियाणा के मुख्यमंत्री समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे।
प्रेसवार्ता के अंत में विहिप के केंद्रीय महामंत्री बजरंग बागड़ा की उपस्थिति ने यह साफ कर दिया कि संगठन इस पूरे अभियान को लेकर पूरी तरह संगठित और अनुशासित तरीके से आगे बढ़ रहा है। विहिप के इन तमाम आयोजनों और संकल्पों से यह स्पष्ट है कि आने वाला वर्ष भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और वैचारिक दृढ़ता के दृष्टिकोण से मील का पत्थर साबित होने वाला है।