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केला खाने से पहले हो जाएं सावधान! नवी मुंबई में हुआ खतरनाक खुलासा

केला खाने से पहले हो जाएं सावधान! नवी मुंबई में हुआ खतरनाक खुलासा

क्या आप भी रोजाना अपनी डाइट में सेहतमंद रहने के लिए केले को शामिल करते हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके पैरों तले जमीन खिसका देने के लिए काफी है। हम अक्सर फल इस उम्मीद में खाते हैं कि वे हमारे शरीर को पोषण देंगे और हमें ऊर्जावान रखेंगे। लेकिन, क्या आपने कभी यह सोचा है कि जिस फल को आप सेहत के लिए सबसे अच्छा मान रहे हैं, वही आपके शरीर में धीमा जहर घोल रहा हो? हाल ही में सामने आया एक ताजा मामला इस बात की गवाही देता है कि मुनाफा कमाने की अंधी दौड़ में किस हद तक इंसानी सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

नवी मुंबई के एपीएमसी मार्केट में बड़ा भंडाफोड़

मामला महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित मशहूर तुर्भे एपीएमसी मार्केट (Turbhe APMC Market) का है। यहां खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग ने एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसने फल कारोबार में चल रहे खतरनाक काले कारोबार की पोल खोल दी है। अधिकारियों को गुप्त सूचना मिली थी कि बाजार की एक दुकान पर नियमों को ताक पर रखकर केलों को प्राकृतिक तरीके से नहीं, बल्कि खतरनाक और जहरीले रसायनों (Chemical Drugs) की मदद से कृत्रिम रूप से पकाया जा रहा है।

इस पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर एफडीए की एक विशेष टीम ने तुरंत एक्शन लेते हुए तुर्भे एपीएमसी मार्केट की संबंधित दुकान पर अचानक छापा (Raid) मारा। छापे के दौरान जो दृश्य सामने आया, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।

खतरनाक 'इथेटन' घोल में डुबोए जा रहे थे केले

जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि दुकान के अंदर केलों को पकाने के लिए किसी सुरक्षित तकनीक का इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें सीधे एक खतरनाक और घातक केमिकल सॉल्यूशन में डुबोया जा रहा था। इस घातक रसायन का नाम 'इथेटन' (Ethephon) बताया जा रहा है। केलों को इस जहरीले घोल में सीधे डुबोकर रातों-रात पीला और बिक्री के लिए तैयार किया जा रहा था, ताकि वे ताजे और पके हुए दिखें।

इतना ही नहीं, खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को मौके पर इस्तेमाल किए जा रहे इस केमिकल की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर शंकाएं हुईं। अधिकारियों का मानना है कि फल पकाने के लिए जिस 'इथेटन' का इस्तेमाल किया जा रहा था, वह मिलावटी या पूरी तरह से नकली (Spurious) था, जो मानव शरीर के लिए और भी ज्यादा घातक साबित हो सकता है।

1,394 किलोग्राम जहरीले केले जब्त

एफडीए की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर मौजूद सभी संदिग्ध केलों को अपने कब्जे में ले लिया। रेड के दौरान कुल 1,394 किलोग्राम (लगभग 1.4 टन) केले जब्त किए गए। बाजार में इनकी कुल कीमत लगभग 67,814 रुपये आंकी गई है। हालांकि पैसों के लिहाज से यह आंकड़ा भले ही छोटा लगे, लेकिन आम जनता की सेहत के दृष्टिकोण से यह बहुत बड़ा और चिंताजनक विषय है। जब्त किए गए इन सभी केलों को तुरंत प्रभाव से कब्जे में लेकर आगे की प्रयोगशाला जांच (Lab Testing) के लिए भेज दिया गया है ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो सके कि इसमें किस स्तर के जहर का इस्तेमाल हुआ था।

पुलिस थाने में मामला दर्ज, आगे की कानूनी कार्रवाई जारी

इस गंभीर मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की शिकायत पर स्थानीय एपीएमसी पुलिस स्टेशन (APMC Police Station) में संबंधित दुकान मालिक और इस अवैध धंधे में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ आधिकारिक तौर पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस और एफडीए की संयुक्त टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह खतरनाक केमिकल कहां से सप्लाई किया जा रहा था और इस अवैध सिंडिकेट के तार कहां-कहां जुड़े हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा और इस मामले में कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रासायनिक रूप से पकाए गए फल सेहत के लिए क्यों हैं खतरनाक?

विशेषज्ञों के मुताबिक, प्राकृतिक रूप से पकने वाले फलों में जरूरी पोषक तत्व और एंजाइम बरकरार रहते हैं। इसके विपरीत, एथेटन या कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायनों से जबरन पकाए गए फल ऊपर से भले ही आकर्षक और पीले दिखाई दें, लेकिन अंदर से वे जहरीले हो जाते हैं। ऐसे फलों का सेवन करने से निम्नलिखित गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं:

  • पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां और अल्सर।
  • उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग की शिकायत।
  • तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर बुरा असर।
  • लंबे समय तक सेवन करने पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा।
  • गर्भवती महिलाओं और बच्चों के विकास पर विपरीत प्रभाव।

आम जनता के लिए जरूरी सावधानी

बाजार में फल खरीदते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि आप और आपका परिवार रासायनिक जहर के दुष्प्रभावों से बच सके:

  • बहुत ज्यादा चमकदार, एक समान पीले और बिना किसी प्राकृतिक दाग-धब्बे वाले केलों को खरीदने से बचें।
  • अगर केले बाहर से पूरी तरह पीले हैं लेकिन डंठल (Stem) अभी भी हरा और कड़क है, तो यह केमिकल से पकाए जाने का बड़ा संकेत हो सकता है।
  • फलों को खाने से पहले हमेशा उन्हें बहते हुए साफ पानी में कम से कम 10 से 15 मिनट के लिए भिगोकर रखें और अच्छी तरह धो लें।
  • संभव हो तो स्थानीय और भरोसेमंद विक्रेताओं से ही फल खरीदें।

नवी मुंबई की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हमारे खान-पान की चीजों में मिलावट किस खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। जरूरत इस बात की है कि खाद्य सुरक्षा विभाग ऐसे भ्रष्ट कारोबारियों के खिलाफ लगातार और सख्त छापे मारे, ताकि आम नागरिकों की जिंदगी और सेहत के साथ खिलवाड़ करने की कोई हिम्मत न कर सके।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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