विंध्य एक्सप्रेस-वे का उग्र विरोध धान के कटोरे, को बचाने के लिए चंदौली में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू
चंदौली (बिछिया धरना स्थल), 13 जुलाई 2026:
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में 23 गांवों के किसानों ने एकजुट होकर 'किसान संघर्ष मोर्चा' का गठन किया है और बिछिया धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। किसानों का साफ कहना है कि जब तक इस विनाशकारी परियोजना को वापस नहीं लिया जाता या इसका मार्ग नहीं बदला जाता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा।
उपजिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, किसानों ने रुख किया साफ
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए चंदौली के उपजिलाधिकारी (SDM) खुद धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने किसान संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों से मुलाकात कर उनकी मांगों और समस्याओं को सुना और ज्ञापन लिया। हालांकि, किसानों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही को तुरंत स्थगित किया जाए, अन्यथा यह धरना अनवरत जारी रहेगा।
👉अभिशाप साबित होगी यह परियोजना भाकियू प्रवक्ता
भाकियू (टिकैत) के वाराणसी मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी ने उपजिलाधिकारी के सामने किसानों का पक्ष रखते हुए कुछ बेहद गंभीर मुद्दे उठाए:
- लघु और सीमांत किसानों पर संकट: चंदौली जिला एक आकांक्षी जिला होने के साथ-साथ 'धान का कटोरा' भी कहलाता है। यहाँ के 80% लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है। जिन किसानों की जमीन ली जा रही है, वे बेहद छोटे (औसतन 1 से 2 बीघा जमीन वाले) किसान हैं। जमीन छिनने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
- बाढ़ का खतरा: यह इलाका निचला है और यहाँ से कर्मनाशा, चंद्रप्रभा और गड़इ जैसी नदियां गुजरती हैं। अगर यहाँ सड़क बनती है, तो प्राकृतिक जलभराव के कारण फसलें डूब जाएंगी और पूरे क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाएगी।
"यह परियोजना विकास नहीं, बल्कि चंदौली के किसानों के लिए एक अभिशाप साबित होने जा रही है।" - मणि देव चतुर्वेदी
👉किसानों की मुख्य मांगें:
- विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना को तत्काल वापस लिया जाए।
- सरकार इस सड़क के लिए किसी अन्य वैकल्पिक मार्ग पर पुनर्विचार करे।
- वर्तमान में चल रही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए।
- पीड़ित किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए जनसुनवाई का आयोजन हो।
👉आर-पार की लड़ाई: राकेश टिकैत भी आ सकते हैं चंदौली
भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष सतीश सिंह चौहान ने सरकार को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा, "अगर सरकार ने हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो इस आंदोलन में कई मंडलों के किसान शामिल होंगे। जरूरत पड़ी तो राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी चंदौली के इस धरने में पहुंचेंगे। यह लड़ाई अब आर-पार की है।"
वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा के घटक संगठन 'अखिल भारतीय किसान महासभा' के जिलाध्यक्ष श्रवण मौर्या ने भी धरने को समर्थन देते हुए कहा कि सरकारें सिर्फ पूंजीपतियों के फायदे के लिए काम कर रही हैं, उन्हें किसान-मजदूरों की कोई परवाह नहीं है।
👉संयुक्त किसान मोर्चा संभालेगा कमान
किसानों ने साफ कर दिया है कि अपनी जमीन बचाने के लिए वे अंतिम सांस तक लड़ेंगे। इस आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) चंदौली के साथ बातचीत चल रही है, जो जल्द ही इस पूरी लड़ाई की कमान अपने हाथ में लेगा।
धरने में शामिल प्रमुख लोग:
- भाकियू टिकैत टीम: उपाध्यक्ष छोटे लाल चौहान 'मोछू', रामदुलारे कन्नौजिया, कन्हैया (तहसील अध्यक्ष), रूपेंद्र सिंह, अलाउद्दीन (सचिव), प्रभाकर सिंह (ब्लाक अध्यक्ष), जिउत मौर्या, बहादुर यादव, जिउत पाल, हाक़िम सुलेमानी, दशरथ राम, छोटू यादव।
- किसान संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी: भगत चौहान (अध्यक्ष), त्रिलोकी (कोषाध्यक्ष), अरविन्द (मीडिया प्रभारी), राम लक्षण (उपाध्यक्ष), राम बिलाश (प्रवक्ता), पोलावान (महामंत्री), शमशेर (संगठन मंत्री) और मार्गदर्शक फौजदार चौहान।
👍कार्यक्रम की अध्यक्षता: लक्ष्मीना देवी
मंच संचालन: प्रोफेसर राम बिलाश चौहान
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