क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जो साल में सिर्फ एक ही दिन, यानी पूरे 24 घंटों के लिए खुलता है? मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में इन दिनों कुछ ऐसा ही अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है। भगवान महाकालेश्वर के शीर्ष पर विराजमान भगवान नागचंद्रेश्वर के मंदिर के कपाट खुलते ही आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि देखने वाले दंग रह गए। मंदिर परिसर से लेकर क्षिप्रा नदी के तट और शहर की मुख्य सड़कों तक, हर तरफ शिव भक्तों का जनसैलाब नजर आ रहा है।
साल में सिर्फ 24 घंटे के लिए खुलते हैं पट
सनातन परंपरा में नागपंचमी के पर्व का विशेष महत्व है, और जब बात उज्जैन की हो तो इसका उल्लास कई गुना बढ़ जाता है। महाकालेश्वर मंदिर के ठीक ऊपर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर का यह मंदिर साल के बाकी 364 दिन बंद रहता है। परंपरा के अनुसार, नागपंचमी की रात 12 बजे इस मंदिर के पट खोले जाते हैं और अगले 24 घंटे यानी नागपंचमी की पूरी रात तक आम जनता पूजा-अर्चना कर सकती है। यही वजह है कि देश के कोने-कोने से शिव भक्त इस दुर्लभ पल के साक्षी बनने के लिए उज्जैन पहुंचे हैं।
इस बार भी ठीक रात 12 बजे प्रशासनिक अधिकारियों और पुजारियों की मौजूदगी में मंदिर के पट खोले गए। पट खुलते ही मंदिर परिसर 'हर हर महादेव' और 'बम बम भोले' के जयकारों से गूंज उठा। पहला पूजन और अभिषेक प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ, जिसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ जो लगातार जारी है।
डेढ़ किलोमीटर लंबी कतार, अटूट है भक्तों का उत्साह
भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन की लालसा भक्तों में इतनी गहरी है कि वे भीषण गर्मी और उमस की भी परवाह नहीं कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, महाकाल लोक और उसके आसपास करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी कतारें लग चुकी हैं। श्रद्धालुओं को अपनी बारी आने के लिए कई घंटों का इंतजार करना पड़ रहा है, इसके बावजूद लोगों के चेहरे पर थकान की जगह भगवान भोलेनाथ के दर्शन की खुशी साफ झलक रही है।
- भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने किए हैं पुख्ता इंतजाम:
- सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात की गई है।
- श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी और छाया की विशेष व्यवस्था की गई है।
- दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग और अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने।
- वृद्ध और दिव्यांग जनों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि वे सुगमता से दर्शन कर सकें।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अद्भुत प्रतिमा में भगवान शिव और माता पार्वती 10 फनों वाले नाग के आसन पर विराजमान हैं। दुनिया में यह इकलौता ऐसा मंदिर है जहां भगवान शिव के नाग रूपी स्वरूप के दर्शन होते हैं। कहा जाता है कि इस 11वीं शताब्दी की परमार कालीन मूर्ति को नेपाल से उज्जैन लाया गया था। ऐसी मान्यता है कि नागपंचमी के दिन जो भी सच्चे मन से नागचंद्रेश्वर के दर्शन करता है, उसके जीवन से कालसर्प दोष और नाग दोष का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "लाखों की संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंच चुके हैं। हमारी प्राथमिकता है कि हर एक भक्त सुरक्षित तरीके से भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करे और सुगमता से बाहर निकले। सभी इंतजाम चाक-चौबंद हैं।"
क्या आप भी जाने की सोच रहे हैं?
यदि आप भी नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो आपके पास अभी भी मौका है। मंदिर के पट आज रात तक खुले रहेंगे। हालांकि, भारी भीड़ को देखते हुए आपको धैर्य रखना होगा। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति लगातार अपील कर रहे हैं कि लोग अनुशासन बनाए रखें और पुलिस-প্রশাসনের निर्देशों का पालन करें ताकि सभी को सुगमता से भगवान के दर्शन प्राप्त हो सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में कितनी बार खुलता है?
यह मंदिर साल में केवल एक बार, नागपंचमी के अवसर पर पूरे 24 घंटे के लिए आम जनता के दर्शन हेतु खोला जाता है।
2. इस मंदिर की मूर्ति की क्या विशेषता है?
यह दुनिया की इकलौती ऐसी मूर्ति है जिसमें भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी 10 फनों वाले नाग के सिंहासन पर आसीन हैं। यह प्रतिमा 11वीं शताब्दी की है।
3. दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचने का सबसे सही समय क्या है?
चूंकि मंदिर 24 घंटे खुला रहता है, आप अपनी सुविधा के अनुसार जा सकते हैं। हालांकि, भीड़ से बचने के लिए कतार की स्थिति की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ें।