स्वास्थ्य व्यवस्था के पहिये को गति देने में डॉक्टरों के साथ-साथ एक और ऐसा वर्ग है, जिसके बिना चिकित्सा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हम बात कर रहे हैं फार्मासिस्टों की, जिन्हें आधुनिक चिकित्सा जगत की रीढ़ माना जाता है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित प्रतिष्ठित बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के केंद्रीय चिकित्सालय में हाल ही में विश्व फार्मासिस्ट दिवस अत्यंत उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर स्वास्थ्य सेवाओं में फार्मासिस्टों की अनिवार्य भूमिका, औषधयों के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग तथा मरीजों को उनके सेवन से जुड़ी जरूरी गाइडलाइन उपलब्ध कराने पर विस्तार से मंथन किया गया।
भगवान धन्वंतरि की वंदना से हुआ भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम का आगाज पारंपरिक और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ हुआ। बरेका केंद्रीय चिकित्सालय में आयोजित इस समारोह का विधिवत शुभारंभ प्रमुख मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार, जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार, अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों, फार्मासिस्टों, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग कर्मियों और कर्मचारी परिषद के सम्मानित सदस्य नवीन सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया।
अतिथियों ने सबसे पहले भारतीय चिकित्सा विज्ञान के जनक भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात, चिकित्सा क्षेत्र के प्रेरणास्त्रोत एम.एल. श्राब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। इस गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम के उद्देश्यों को और अधिक बल प्रदान किया।

स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कड़ी
समारोह के दौरान कार्यक्रम के समन्वयक राजेंद्र कुशवाहा और सोमनाथ हेम्ब्रम ने विश्व फार्मासिस्ट दिवस के ऐतिहासिक और व्यावहारिक महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि फार्मासिस्ट महज़ दवाएं देने वाला व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह संपूर्ण स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील कड़ी है।
उन्होंने आगे बताया कि अस्पताल के भीतर जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने से लेकर उनके वैज्ञानिक भंडारण (Storage) और जरूरतमंद मरीजों तक उनके सही वितरण तक, फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी बहुआयामी होती है। एक मरीज को दवा का सेवन कब, कैसे और किस मात्रा में करना है, इसकी सटीक जानकारी देना केवल एक फार्मासिस्ट ही बेहतर ढंग से कर सकता है।"किसी भी औषधि का वास्तविक और प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब उसका उचित तरीके से भंडारण, सुरक्षित वितरण और सही सेवन सुनिश्चित किया जाए। यहीं पर एक कुशल फार्मासिस्ट की वास्तविक उपयोगिता और डॉक्टर-मरीज के बीच की कड़ी का महत्व समझ आता है।"
- राजेंद्र कुशवाहा एवं सोमनाथ हेम्ब्रम, समन्वयक
बदलते दौर में नए शोध और तकनीक से अपडेट रहना है जरूरी
चिकित्सा विज्ञान एक ऐसा क्षेत्र है जो हर पल विकसित हो रहा है। इस बात को आगे बढ़ाते हुए फार्मासिस्ट डॉ. अतुल कुमार साहू ने अपने संबोधन में वर्तमान समय की माँगों पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने कहा कि फार्मेसी के वैश्विक और राष्ट्रीय पटल पर लगातार नए शोध (Researches), आधुनिक औषधियाँ और तकनीकी बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
डॉ. साहू ने इस बात पर जोर दिया कि केवल पुराने अनुभवों के सहारे चिकित्सा सेवा को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। इसके लिए जरूरी है कि सेवारत फार्मासिस्टों के साथ-साथ इस विधा का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवा विद्यार्थियों को भी इन अत्याधुनिक बदलावों की जानकारी समय-समय पर दी जाए। तकनीकी ज्ञान का अभाव चिकित्सा क्षेत्र में किसी बड़ी त्रुटि का कारण बन सकता है, इसलिए निरंतर अपडेशन आज की सबसे बड़ी अनिवार्यता है।
प्रशिक्षण कार्यशालाओं और संगोष्ठियों की आवश्यकता
तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बिठाने के लिए बरेका चिकित्सालय के विशेषज्ञों ने कुछ ठोस सुझाव भी साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके लिए नियमित अंतराल पर निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए:
- विशेष संगोष्ठियों का आयोजन: समय-समय पर सेमिनार आयोजित कर नई दवाओं की कार्यप्रणाली पर चर्चा हो।
- व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम: मेडिकल और फार्मा स्टाफ के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप लगाए जाएं।
- कार्यशालाएं (Workshops): व्यावहारिक सत्रों के जरिए दवाओं के दुष्प्रभावों और उनके सही रख-रखाव की ट्रेनिंग दी जाए।
इन आयोजनों के माध्यम से न केवल फार्मासिस्टों का बौद्धिक कौशल और ज्ञान अपग्रेड होगा, बल्कि इसका सीधा लाभ अस्पताल में आने वाले आम मरीजों को मिलेगा। मरीजों को दवाओं के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग की बेहतर और वैज्ञानिक जानकारी मिल सकेगी, जिससे उपचार की गुणवत्ता में अप्रत्याशित सुधार देखा जा सकता है।
अस्पताल में मरीजों की उपस्थिति और जन-जागरूकता
इस पूरे कार्यक्रम का एक और सकारात्मक पहलू यह रहा कि इसमें केवल अस्पताल के प्रशासनिक और चिकित्सीय अमले ने ही हिस्सा नहीं लिया, बल्कि केंद्रीय चिकित्सालय में उपचाराधीन मरीज भी इस आयोजन का प्रत्यक्ष हिस्सा बने। इसके अलावा बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मचारी और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने चिकित्सा जगत में फार्मासिस्टों के अनीयनीय और निःस्वार्थ योगदान के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त किया। इस आयोजन के जरिए न सिर्फ स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल बढ़ा, बल्कि अस्पताल में इलाजरत मरीजों और उनके तीमारदारों को भी दवाओं के सुरक्षित उपयोग, उनकी एक्सपायरी और साइड इफेक्ट्स के प्रति जागरूक किया गया।
कुल मिलाकर, बरेका केंद्रीय चिकित्सालय में आयोजित यह दिवस समारोह केवल एक औपचारिकता बनकर नहीं रह गया, बल्कि इसने स्वास्थ्य सेवा से जुड़े हर एक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी के प्रति और अधिक निष्ठावान होने का मजबूत संदेश दिया।