बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। कोटवा थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत में लिए गए एक 40 वर्षीय व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इस घटना ने एक बार फिर खाकी की कार्यशैली और थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर बेरहमी से पिटाई करने और रिश्वत मांगने के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
घर से उठाया गया था सुदीश राम
मिली जानकारी के अनुसार, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति की पहचान कोटवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बड़हरवा कला, पूर्वी वार्ड संख्या-5 निवासी सुदीश राम के रूप में हुई है। वह स्वर्गीय मिट्ठू राम के पुत्र थे। परिजनों का दावा है कि बीते 29 सितंबर की शाम करीब चार बजे कोटवा थाने की पुलिस उनके घर पहुंची और सुदीश राम को शराब पीने के आरोप में हिरासत में ले लिया। उस वक्त किसी को यह अंदाजा नहीं था कि घर से हंसते-खेलते ले जाया गया यह शख्स जिंदा वापस नहीं लौटेगा।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस जब उसे पकड़कर थाने ले गई, तो वहां उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। थाने की हाजत में हुई इस कथित प्रताड़ना ने सुदीश की शारीरिक स्थिति को पूरी तरह बिगाड़ दिया। पुलिस की इस कथित कार्यशैली ने आम जनता के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, और लोग न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने की स्थिति में आ गए हैं।
अगली सुबह थाने पहुंचे परिजनों से पैसे मांगने का आरोप
घटना के अगले दिन यानी 30 सितंबर की सुबह जब सुदीश के परिजन उससे मिलने थाने पहुंचे, तो मामला और भी ज्यादा गंभीर मोड़ लेता दिखाई दिया। परिजनों का आरोप है कि थाना प्रभारी की ओर से उनकी रिहाई या मामले को रफा-दफा करने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई। गरीब परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम देना मुमकिन नहीं था, और वे इस असमंजस में थे कि अब क्या किया जाए।
स्वजनों का कहना है कि जब उन्होंने पैसे देने से असमर्थता जताई या मांग पूरी नहीं की, तो पुलिस ने अपनी जिद जारी रखी। इसके बाद जो हुआ, उसने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। रात के करीब दस बजे थाने से अचानक परिजनों के पास एक फोन आया, जिसमें उन्हें तुरंत सदर अस्पताल जाकर सुदीश से मिलने को कहा गया।
अस्पताल पहुंचे तो उड़े होश, आईसीयू में तोड़ा दम
जब घबराए हुए परिजन भागते-दौड़ते सदर अस्पताल पहुंचे, तो सुदीश की हालत देखकर उनके होश उड़ गए। वह अस्पताल के बिस्तर पर बेहद गंभीर और बुरी तरह घायल अवस्था में पड़े थे। परिजनों के मुताबिक, होश में आने पर सुदीश ने उन्हें बताया कि थाने के भीतर उनके साथ किस हद तक मारपीट और क्रूरता की गई है। उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिसे देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत आईसीयू (ICU) में भर्ती कर दिया।
आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हुए आखिरकार सुदीश राम ने दम तोड़ दिया। इलाज के दौरान उनकी मौत की खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सुदीश राम की अचानक हुई इस मौत ने उनके पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया है। उनके परिवार में अब चार बेटे और दो बेटियां हैं। इनमें से सिर्फ एक बेटी की शादी हो पाई है, जबकि बाकी सभी बच्चे अभी काफी छोटे हैं। कमाने वाले इकलौते मुखिया की इस तरह संदिग्ध मौत के बाद अब इन मासूम बच्चों के भरण-पोषण और भविष्य को लेकर बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। परिवार के सामने पेट भरने की चुनौती के साथ-साथ न्याय पाने की लंबी लड़ाई का पहाड़ भी खड़ा है।
पोस्टमार्टम से इनकार और न्याय की जिद
इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों और परिजनों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा देखा जा रहा है। आक्रोशित स्वजन और ग्रामीण इस मामले में सीधे तौर पर दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने और उनकी जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़े हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परिवार ने फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे शव को हाथ नहीं लगाने देंगे।
प्रशासनिक हलचल और आगे की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के बड़े अधिकारी भी मामले की लीपापोती और स्थिति को संभालने में जुट गए हैं। हालांकि, हिरासत में हुई इस मौत ने एक बार फिर मानवाधिकारों के उल्लंघन और पुलिस हिरासत में होने वाली हिंसा के पुराने जख्मों को हरा कर दिया है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके और पीड़ित परिवार को उचित न्याय मिल सके।
बहरहाल, पूर्वी चंपारण का यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है और हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक स्तर पर इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाया जाता है और दोषी पुलिसकर्मियों पर कानूनी शिकंजा कब कसा जाता है।