सपने देखने की कोई उम्र या दायरा नहीं होता, बस उन्हें पूरा करने के लिए सही समय पर सही फैसले लेने की जरूरत होती है। आज के दौर में जहां युवा विदेश जाकर नौकरी करने को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी युवा हैं जो विदेशों में बेहतरीन पढ़ाई और करियर के अवसर छोड़कर अपनी मातृभूमि पर कुछ बड़ा करने की ठान लेते हैं। ऐसी ही एक असाधारण और प्रेरणा से भरपूर कहानी है युवा उद्यमी तनमय तिवारी की, जिन्होंने ब्रिटेन (यूके) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भारत वापसी की और आज वे देश के रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण (Defence and Aerospace Manufacturing) क्षेत्र में एक चमकता हुआ नाम बन चुके हैं।
यूके का कंफर्ट जोन छोड़ा, भारत के डिफेंस सेक्टर पर लगाया दांव
तनमय तिवारी ने ब्रिटेन में करीब पांच साल बिताए। वहां उन्होंने प्रतिष्ठित संस्थानों से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक (Graduation) और परास्नातक (Post Graduation) की डिग्रियां हासिल कीं। आम तौर पर इस स्तर की पढ़ाई करने वाला कोई भी युवा किसी बड़ी मल्टीनेशनल एयरोस्पेस कंपनी में मोटी सैलरी वाली नौकरी चुनता है। लेकिन तनमय की सोच कुछ अलग थी। वर्ष 2020 में जब वे लखनऊ में आयोजित डिफेंस एक्सपो (DefExpo) में शामिल होने आए, तो भारतीय रक्षा विनिर्माण के बदलते परिदृश्य ने उनका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
डिफेंस एक्सपो के उन पांच दिनों ने तनमय की जिंदगी की दिशा ही बदल दी। उन्होंने वहीं तय कर लिया कि अब वे विदेशों के लिए नहीं, बल्कि अपने देश के डिफेंस इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। वर्ष 2021 में अपनी मास्टर्स की थीसिस पूरी करते ही वे भारत लौट आए और अपने सपनों को जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी।
महज एक बीएचके (1 BHK) फ्लैट से हुई थी शुरुआत
हर बड़ी सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी दास्तान होती है। तनमय तिवारी की कहानी भी इसका अपवाद नहीं है। उन्होंने 'डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स' (Datum Advanced Composites) नाम से अपने स्टार्टअप की शुरुआत किसी बड़ी कॉर्पोरेट बिल्डिंग से नहीं, बल्कि एक साधारण से वन बीएचके (1 BHK) फ्लैट से की थी।
शुरुआती दौर में उनकी कंपनी ने सिविल सेक्टर (नागरिक क्षेत्र) पर फोकस किया। इस दौरान उन्होंने कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक ड्रोन, ऑटोमोबाइल सेक्टर और हाई-एंड सुपरबाइक्स के लिए कार्बन फाइबर और ग्लास फाइबर से बने उन्नत कंपोजिट पुर्जे तैयार किए। हालांकि, तनमय का असली लक्ष्य रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में अपनी पैठ बनाना था, जिसके लिए वे लगातार गुणवत्ता के कड़े मानदंडों पर काम कर रहे थे।
आईआईटी कानपुर की टेस्टिंग ने खोले रक्षा क्षेत्र के दरवाजे
किसी भी नए स्टार्टअप के लिए डिफेंस सेक्टर में प्रवेश करना आसान नहीं होता, क्योंकि यहां क्वालिटी और मानकों के कड़े इम्तिहान होते हैं। तनमय ने इस चुनौती से पार पाने के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) का रुख किया। उन्होंने अपने कंपोजिट नमूनों और परीक्षण कूपन (Test Coupons) को जांच के लिए आईआईटी कानपुर भेजा।
जब परीक्षण के नतीजे आए, तो यह साबित हो गया कि तनमय की कंपनी द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद रक्षा क्षेत्र के कड़े और उच्च मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। इस हरी झंडी के मिलते ही कंपनी के लिए डिफेंस सेक्टर के रास्ते खुल गए। एक छोटे से शेड से बढ़ते-बढ़ते आज यह कंपनी कानपुर में लगभग 20,000 वर्गफुट की एक सुसज्जित फैक्ट्री से संचालित हो रही है, जिसमें करीब 40 कुशल पेशेवरों की एक समर्पित टीम काम कर रही है। उल्लेखनीय है कि उनकी यह कंपनी एएस 9100 (AS 9100) प्रमाणित है, जो एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग में गुणवत्ता प्रबंधन का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानक है।
उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से मिला पंख
वर्तमान वर्ष 2026 में देश का रक्षा विनिर्माण क्षेत्र एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UP Defence Industrial Corridor) इस बदलाव का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। तनमय तिवारी की कंपनी अब केवल रक्षा इकोसिस्टम को उत्पाद ही नहीं दे रही, बल्कि इस कॉरिडोर की अन्य बड़ी कंपनियों को भी अपने कंपोजिट पार्ट्स की आपूर्ति कर रही है। उनकी कंपनी विमान के ढांचों के निर्माण और हल्के आयुध (Light Armaments) से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में सक्रिय रूप से योगदान दे रही है।
लखनऊ नोड में लग रही है विशाल अत्याधुनिक इकाई
अपनी सफलता के इस सफर को और आगे बढ़ाते हुए, तनमय तिवारी अब उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ नोड में एक नई और बेहद आधुनिक इंजीनियरिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित करने जा रहे हैं। इस आगामी इकाई का स्केल हैरान करने वाला है:
- कुल क्षेत्रफल: लगभग 70,000 से 80,000 वर्गफुट (मौजूदा सुविधा से लगभग चार गुना बड़ा)।
- प्रत्यक्ष रोजगार: इस प्लांट के शुरू होने से करीब 200 लोगों को डायरेक्ट जॉब्स मिलेंगी।
- अप्रत्यक्ष रोजगार: लगभग 1,500 लोगों के लिए इनडायरेक्ट रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
सरकार के नीतिगत प्रोत्साहन और सब्सिडी का मिल रहा लाभ
युवा उद्यमियों के लिए देश में कारोबार करना अब पहले से कहीं अधिक सुगम हो गया है। तनमय तिवारी बताते हैं कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में निवेश करने पर सरकार की ओर से शानदार इंसेंटिव्स मिल रहे हैं। नई इकाई में किए जाने वाले पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत तक की भारी पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) का प्रावधान है। इसके अलावा, विदेश से आयात किए जाने वाले उपकरणों पर परिवहन सब्सिडी और पेटेंट व ट्रेडमार्क के पंजीकरण के लिए वित्तीय प्रतिपूर्ति (Reimbursement) जैसी सुविधाएं भी उद्यमियों का हौसला बढ़ा रही हैं।
युवाओं के लिए एक नया संदेश
एक साधारण वन बीएचके फ्लैट से शुरू होकर हजारों वर्गफुट की अत्याधुनिक डिफेंस फैक्ट्री तक का यह सफर इस बात का पुख्ता सबूत है कि यदि इरादे मजबूत हों, सही दिशा में तकनीकी का इस्तेमाल किया जाए और सरकार का नीतिगत सहयोग मिल रहा हो, तो कोई भी युवा उद्यमी देश की तकदीर बदल सकता है। तनमय तिवारी की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो स्टार्टअप की दुनिया में कुछ हटकर करना चाहते हैं और देश के आत्मनिर्भर भारत अभियान में अपना अमूल्य योगदान देना चाहते हैं।